औरैया। बिजली विभाग ने अव्यवस्थाओं को चौकस करने और हादसों पर लगाम लगाने के लिए करोड़ों रुपये बजट खर्च करने का खाका खींचा। इस पर आधे से ज्यादा बजट खर्च भी हुआ, लेकिन तस्वीर रत्तीभर बदलती नजर नहीं आई। गांवों और कस्बों में अभी भी बिजली की केबल बल्लियों के सहारे हैं। कहीं पोल नहीं है तो कहीं बिजली के तार एंगल में बंधे हुए हैं। हादसों को आमंत्रण देने वाले ट्रांसफार्मर अभी भी तमाम स्थानों पर खुले में रखे हुए हैं। इनकी न बेरीकेट की गई और न ही प्लेटफार्म बनाकर इन्हें सुरक्षित किया गया है। ऐसे में विभाग के दावों में कितनी सच्चाई है, यह जानने को रविवार को पड़ताल की गई। इसमें कस्बों से लेकर गांवों में जो तस्वीर उभर कर आई, वह विभाग के दावों से कतई मेल नहीं खा रही है।बिधूना। कस्बे के मोहल्ला अंबेडकर नगर में विद्युत लाइन बांस की बल्लियों के सहारे टिकी हुई हैं। इससे स्थानीय लोग हर समय खतरे की आशंका में जी रहे हैं। अक्सर फाल्ट व तेज हवा के चलते इन लाइनों के टूटकर गिरने का खतरा मंड़राता रहता है। इस संबंध में विभाग के अवर अभियंता मोहित रस्तोगी ने बताया कि इन लाइनों के शिफ्टिंग के लिए एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने पर पोल लगाकर इन लाइनों को शिफ्ट किया जाएगा। नई बस्ती होने के कारण लोगों ने अपने स्तर से अस्थायी रूप से बांसों के सहारे लाइन खींच रखी हैं।दिबियापुर। हरचंदपुर रोड स्थित मंगलम काॅलोनी के पास सड़क पर बल्लियों के सहारे लगे बिजली के तार झूल रहे हैं। इससे अक्सर हादसे होते रहते हैं। इसी रोड पर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज को जाने वाली सड़क के अंदर खुले में नीचे रखा ट्रांसफार्मर भी हादसे को दावत दे रहा है। इसी तरह नगर के गुंजन रोड पर ऊंचाई पर खुले में रखे ट्रांसफार्मर से खतरा बना रहता है। अक्सर चिंगारी निकलने व फाल्ट के समय लोग भयभीत नजर आते हैं। यहां कई बार हादसे होते बचे हैं। स्थानीय लोग समस्या समाधान की कई बार मांग भी कर चुके हैं
Auraiya News: करोड़ों खर्च के बाद भी बल्लियों के सहारे दौड़ रहा करंट


