Sunday, February 15, 2026

Lucknow: हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा-डीजीपी ने फुटेज ढाई माह ही रखने का परिपत्र क्यों जारी किया? आगे कहा…

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस महानिदेशक (डी जी पी) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें राज्य के सभी थानों में सी सी टी वी फुटेज केवल दो से ढाई महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे काफी अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले ‘परमवीर सिंह सैनी  बनाम बलजीत सिंह (2020)’ के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम छह से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव को तीन सप्ताह में व्यक्तिगत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि डी जी पी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत ऐसा परिपत्र क्यों जारी किया।

आवश्यक नियम बनाए गए हैं या नहीं

यह भी पूछा है कि क्या बी एन एस एस की धारा 179(2) के तहत आवश्यक नियम बनाए गए हैं या नहीं। और, याचिकाकर्ता महिला को किस परिस्थिति में थाने बुलाया गया और क्यों? अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव को स्वयं अदालत में उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने यह आदेश उन्नाव की रूबी सिंह व अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्नाव पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 5 अगस्त 2025 को पुलिस ने उनके कुछ रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर उन्हें उठा लिया, लेकिन कोई गिरफ्तारी मेमो नहीं बनाया गया। आरोप है कि 7 अगस्त की रात याची – एक महिला को अवैध रूप से लॉकअप में रखा गया और उसके खिलाफ अश्लील टिप्पणियां की गईं। जबकि,  याचिकाकर्ता संख्या 2 और 3 को ₹10,000 की रिश्वत देने के बाद छोड़ा गया।

 

एसपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने…

25 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने मामले में उन्नाव के एसपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और संबंधित अवधि की सी सी टी वी  फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। लेकिन, एसपी ने बताया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है, क्योंकि 20 जून 2025 के डी जी पी के  परिपत्र के अनुसार केवल 2 से 2.5 महीने की रिकॉर्डिंग ही रखी जाती है।

अदालत ने इस पर गहरी नाराज़गी जताई और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि दी सी टी वी फुटेज को कम से कम छह महीने और अधिकतम 18 महीने तक सुरक्षित रखा जाए, और कहा है कि राज्यों को उसी अनुसार स्टोरेज क्षमता विकसित करनी होगी।

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