औरैया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार किया गया मशरूम अब परिषदीय स्कूलों के बच्चों का आहार बनेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह प्रयास भाग्यनगर ब्लॉक के स्कूलों में शुरू किया जा रहा है। प्रशासन का यह प्रयोग बच्चों को जहां पौष्टिक आहार मुहैया कराएगा। वहीं महिलाओं के स्वावलंबन की राह को मजबूती मिलेगी।पायलट प्रोजेक्ट के तहत भाग्यनगर ब्लॉक के 90 परिषदीय स्कूलों को इस प्रयोग में जोड़ा गया है। ब्लॉक के पांच स्वयं सहायता समूह मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। महिलाओं के इस स्वरोजगार को अब पायलट प्रोजेक्ट के तहत कई गुना बढ़ाया जाएगा। 90 स्कूलों के 14 हजार से ज्यादा नौनिहालों को सप्ताह में एक दिन मशरूम की सब्जी खिलाई जाएगी।
सप्ताह में एक दिन मशरूम मुहैया कराने के लिए समूहों ने चार से छह किलो मशरूम का मानक तय किया है। समूहों ने 70-70 मशरूम के बैग तैयार किए गए हैं। देवरपुर गांव के लकी स्वयं सहायता समूह की पिंकी देवी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के मौके को देखकर उन्होंने मशरूम के बैग 10 से बढ़ाकर 70 कर लिए हैं। अगले माह से उत्पादन बढ़ जाएगा। इस पर स्कूलों में सप्लाई दी जाएगी। अभी तक महज कुछ लोगों को ही मशरूम बिक्री करते थे। लेकिन परिषदीय स्कूलों में खपत आने से अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।
भाग्यनगर ब्लॉक के स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट फरवरी में शुरू होगा। समूह की महिलाओं को मशरूम का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। 18-18 स्कूलों की जिम्मेदारी एक समूह को दी गई है। मध्याह्न भोजन में मशरूम की सब्जी से बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलेगा।
-संजीव कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी


