प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ परिसर से कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया। इसके साथ ही सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। इससे पहले पीएम मोदी ने शुक्रवार सुबह ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया था। यह नया भवन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय का केंद्र बन गया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि अब उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन किया जाएगा।
पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें
पीएम मोदी ने सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है। इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय अवश्य प्राप्त होती है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है।
उन्होंने कहा कि यह कदम विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देने का संकल्प लेकर सेवा-तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश की दिशा में अहम है। आज नया इतिहास बनते देख रहे हैं। आज भारत नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। यह भारत कि विकास यात्रा में नई शुरुआत है। पुराने भवनों में जगह की कमी थी। सुविधाओं की सीमाएं थी। करीब 100 साल पुरानी इमारतें अंदर से जर्जर होती जा रही थी। मैं समझता हूं कि इन चुनौतियों के बारे में भी देश को निरंतर बताया जाना चाहिए।
पीएम ने कहा ‘आजादी के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में अनेक अहम निर्णय हुए, कई नीतियां बनीं लेकिन ये इमारते ब्रिटिश शासन के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थीं। इनका मकसद भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था। एक समय था, जब कोलकाता शहर देश की राजधानी हुआ करता था।’ उन्होंने कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के दौर में कोलकाता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का प्रबल केंद्र बन चुका था। इसलिए 1911 में अंग्रेजों ने भारत की राजधानी को दिल्ली शिफ्ट किया। उसी के बाद अंग्रेजी हुकूमतों की जरूरतों और उसकी सोच को ध्यान में रखकर नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतें बनी। भवन ब्रिटेन के महाराज के सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम था। रायसीना हिल्स को इसलिए चुना गया ताकि ये इमारते अन्य इमारतों से ऊंची रहे। सौभाग्य से सेवा तीर्थ की इमारते जमीन से जुड़ी है, पहाड़ पर नहीं है। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं।