Thursday, February 12, 2026

अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर ने वापस लिया इस्तीफा, फर्जी सर्टिफिकेट पर कही ये बात

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अयोध्या: सीएम योगी पर विवादित टिप्पणी से आहत होकर नौकरी से इस्तीफा देने वाले उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने बिना किसी दबाव के यह फैसला लिया है और फिलहाल अपने दफ्तर में काम कर रहे हैं।फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी को लेकर भी उन्होंने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने भाई विश्वजीत सिंह पर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगाए हैं।

भाई के आपराधिक संबंधों का दावा
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई विश्वजीत सिंह, मुख्तार अंसारी के मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य है और उसका फाइनेंशियल एडवाइजर भी रहा है। उनके मुताबिक विश्वजीत सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि विश्वजीत सिंह ने अपने माता-पिता के साथ मारपीट की, इस मामले में एफआईआर दर्ज है।

जाति और धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाकर दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया तथा कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख हुआ है, जो कथित तौर पर प्रयागराज की पवित्र भूमि से हो रही हैं। सिंह ने कहा कि वह सरकार, संविधान और देश के चुने हुए नेतृत्व के समर्थन में यह कदम उठा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘मैंने माननीय प्रधानमंत्री, माननीय मुख्यमंत्री और माननीय गृह मंत्री के समर्थन में और भारत के संविधान के समर्थन में इस्तीफा दिया था।

शंकराचार्य के बयान से आहत थे GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह
सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘प्रयागराज की पवित्र भूमि से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हमारे राज्य के चुने हुए नेता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जो संवैधानिक पद पर हैं।” खुद को सेवा नियमों से बंधा सरकारी कर्मचारी बताते हुए सिंह ने कहा कि वह ऐसी घटनाओं के प्रति उदासीन नहीं रह सकते। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उत्तर प्रदेश के सेवा नियमों से बंधा हूं। मुझे राज्य से वेतन मिलता है और मेरा परिवार उसी पर निर्भर है, लेकिन मैं कोई भावनाहीन व्यक्ति नहीं हूं।‘‘ सिंह ने कहा, ‘‘अगर मेरे राज्य और उसके प्रमुख के खिलाफ ऐसा आचरण जारी रहता है, तो एक कर्मचारी के तौर पर अपनी संवैधानिक और सेवा सीमाओं में रहते हुए मैं इसका विरोध करूंगा। फिलहाल प्रशांत कुमार सिंह ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में अपनी नौकरी फिर से शुरू कर दी है।

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