जम्मू डेस्क : पिछले कुछ महीनों में चांदी और तांबे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि आगे इन धातुओं में बड़ी तेजी की संभावना कम है। बीते कुछ महीनों में चांदी और तांबे की कीमतों में आई तेज उछाल ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान खींचा है। आने वाले समय में कीमतें या तो स्थिर रह सकती हैं या थोड़ी गिरावट भी आ सकती है।
तांबा (कॉपर) क्यों महंगा हुआ?
तांबे की कीमत बढ़ने की मुख्य वजह मजबूत मांग नहीं, बल्कि सप्लाई में रुकावट रही है। कई बड़ी खदानों में पर्यावरण, तकनीकी और मौसम संबंधी समस्याओं के कारण उत्पादन घटा, जिससे दाम 8,000 डॉलर से बढ़कर लगभग 14,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गए। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तांबे की बड़ी कमी नहीं है। अगर सप्लाई सामान्य हो जाती है, तो कीमतों में नरमी आ सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जून 2026 के बाद सप्लाई सुधरने पर तांबे के दाम स्थिर हो सकते हैं या थोड़ा नीचे आ सकते हैं।
चांदी (सिल्वर) का रुख
चांदी की हालिया तेजी को मजबूत बुनियादी कारणों की बजाय बाजार के रुझान का असर माना जा रहा है। इसकी दिशा काफी हद तक डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में चांदी और तांबे में तेज उछाल की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


