Workplace Harassment Case : कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और बदसलूकी के खिलाफ इंग्लैंड की एक महिला ने मिसाल पेश की है। नेटवर्क रेल (Network Rail) कंपनी में काम करने वाली रोवेना ओवन्स ने अपने पुरुष सहकर्मियों की हरकतों से तंग आकर कानूनी लड़ाई लड़ी और अब उन्हें मुआवजे के तौर पर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा (£200,000+) की राशि मिली है।
40 मर्दों के बीच अकेली महिला और रोज का टॉर्चर
रोवेना ने साल 2015 में रेल हेडक्वार्टर में नौकरी शुरू की थी। उस वक्त विंबलडन सिग्नल सेंटर की 40 लोगों की टीम में सिर्फ 2-3 महिलाएं ही थीं। एंप्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल (कोर्ट) में यह साबित हुआ कि रोवेना ने नौकरी के दौरान 25 बार गंभीर लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) का सामना किया।
बदसलूकी की सारी हदें पार
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो बातें सामने आईं वे चौंकाने वाली थीं। पुरुष कर्मचारी ऑफिस के कंप्यूटरों पर अश्लील वॉलपेपर लगाते थे और खुलेआम गंदी फिल्में देखते थे। एक बार तो रोवेना के सामने आपत्तिजनक खिलौना तक लहराया गया। सहकर्मी रोवेना के पास बैठकर जानबूझकर डकार लेते थे। एक कर्मचारी ने तो लगातार 15 मिनट तक डकार लेकर उन्हें परेशान किया।
जब भी रोवेना से कोई काम में गलती होती तो पुरुष सहकर्मी ताना मारते कि यही नतीजा होता है जब औरतों को सिग्नल बॉक्स में रखा जाता है। पुरुष कर्मचारी अक्सर महिला ट्रेन ड्राइवरों के बारे में आपत्तिजनक बातें करते और रोवेना के पास आकर सीटी बजाते थे।
शिकायत की तो नौकरी से निकाला, फिर जीती कानूनी जंग
जब रोवेना ने इस माहौल की शिकायत अपने सीनियर अधिकारियों से की तो कंपनी ने उन्हें इंसाफ देने के बजाय नौकरी से ही निकाल दिया। रोवेना ने हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुरुआत में उनकी दलीलों को खारिज किया गया लेकिन अपील के बाद नेटवर्क रेल कंपनी को अपनी गलती माननी पड़ी। कोर्ट ने माना कि रोवेना को लंबे समय तक मानसिक तनाव और भेदभाव झेलना पड़ा। अंततः कंपनी को उन्हें भारी-भरकम मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया गया।


