लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को पार्टी की आल इंडिया बैठक में संगठन को मजबूत करने और ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ हासिल करने के लिए तन, मन और धन से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। सात फरवरी को प्रदेश में हुई बड़ी बैठक के बाद आयोजित इस समीक्षा बैठक में राजनीतिक हालात, संसद में जारी टकराव तथा देश के सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में कहा गया कि देश में बेहतर राजनीतिक और सामाजिक वातावरण की जरूरत है ताकि बहुजन समाज के लोगों को उनके ‘अच्छे दिन’ मिल सकें। पार्टी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बनाकर सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की गईं और आगे भी इसी मिशन को जारी रखा जाएगा।
बहुजन मिशन से जुड़ रहे दूसरे राज्यों को लोग
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि उत्तर प्रदेश के आंबेडकरवादियों की तरह अन्य राज्यों में भी लोग बहुजन मिशन से जुड़ रहे हैं। पार्टी ने संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर के आदर्शों को आगे बढ़ाने और संविधान को सही रूप में लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पिछले वर्ष 19 दिसंबर को नई दिल्ली में हुई आल इंडिया बैठक के निर्देशों की समीक्षा करते हुए राज्यों से प्रगति रिपोर्ट ली गई। पार्टी पदाधिकारियों से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने पर जोर दिया गया। बसपा प्रमुख ने विपक्षी दलों और उनकी सरकारों पर गरीब, किसान और बहुजन विरोधी नीतियों का आरोप लगाया। कहा कि कथनी और करनी में अंतर के कारण उनकी विश्वसनीयता तेजी से घट रही है।
ऐसे में बसपा की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह जनता के सामने एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरे।
मायावती ने यह भी कहा कि जो लोग स्वार्थवश बहुजन आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है।
पार्टी से की ये अपील
पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे मिशन के प्रति समर्पित रहकर संघर्ष जारी रखें। बैठक में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों, खासकर अमेरिका के साथ संभावित डील को लेकर देश में उठ रही चिंताओं पर भी चर्चा हुई।
पार्टी ने कहा कि किसी भी समझौते में देश के किसानों और बहुजन समाज के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। बैठक के अंत में ‘बहुजन समाज को शोषित से शासक वर्ग बनाने’ के मिशन को हर हाल में आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।


