लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल संबंधी राजनीतिक विवाद को ”अति दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए रविवार को कहा कि सभी को भारतीय संविधान की मान-मर्यादा के मुताबिक राष्ट्रपति पद का सम्मान करना चाहिए और इस ओहदे का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है। इसे लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने मायावती पर करारा हमला बोला है। उन्होंने तंज करते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आप बीजेपी में शामिल क्यों नहीं हो जातीं? राष्ट्रपति महोदया मुर्मू जी को नई संसद भवन के उद्घाटन पर जब मोदी जी ने नहीं बुलाया, तब क्या उनका अपमान नहीं हुआ? राम मंदिर के उद्घाटन पर भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। तब आपको प्रोटोकॉल का ख्याल क्यों नहीं आया?
कांग्रेस को सत्ता में आने दें
संसद भवन में अन्य पत्रकारों और फिल्मी दुनिया के लोगों को आमंत्रित किया गया, तब राष्ट्रपति महोदया क्यों चुप रहीं? खुद मुर्मू जी ने भी कभी अपने सम्मान की बात नहीं उठाई। जब मोदी सरकार ने आदिवासियों का आरक्षण छीन लिया, तब भी मुर्मू जी ने कुछ नहीं कहा। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में आदिवासियों पर अत्याचार हुए, तब भी वे नहीं बोलीं। मायावती जी को बस बहाना चाहिए बीजेपी के साथ खड़ा होने का। लुका-छिपी बंद करें और बीजेपी में शामिल हो जाएं। कांग्रेस को सत्ता में आने दें ताकि एससी/एसटी/ओबीसी का फिर से भला होना शुरू हो सके।
सिलीगुड़ी कार्यक्रम को लेकर नाराज हुई राष्ट्रपति मुर्मू
आप को बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू को 7 मार्च को आदिवासी समुदाय के हर साल होने वाले प्रोग्राम 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया था। कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना तय था। हालांकि सुरक्षा और दूसरे लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए, अधिकारियों ने जगह को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया।
मायावती बोलीं घटना दुर्भाग्यपूर्ण
राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल बदले जाने पर नाराजगी जताते हुआ कहा कि मुझे लगता है बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहतीं। नॉर्थ बंगाल दौरे पर न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री मुझे रिसीव करने आया। मुझे नहीं पता कि ममता मुझसे नाराज हैं या नहीं। वैसे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप सब ठीक रहें। फिलहाल इस घटना को लेकर अब सियासत हो रही है। इसी कड़ी में मायावती ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से भी हैं, लेकिन अभी हाल में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे में जो कुछ भी हुआ, वह नहीं होना चाहिये था। उन्होंने कहा कि यह घटना ”अति-दुर्भाग्यपूर्ण है।”
संवैधानिक पदों का सम्मान करना चाहिए
मायावती ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेकर जारी राजनीतिक घटनाक्रम पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा, ”इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, वह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान करना चाहिए एवं उनकी गरिमा का ध्यान रखना चाहिये।” मायावती ने आशा व्यक्त की कि सोमवार से शुरू होने वाला संसद का आगामी सत्र देश और जनता के हित में सुचारू रूप से चलेगा।


