गांव उमरी निवासी शकील ने 22 मई 2016 को दिबियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि वह शाम को सात बजे के करीब अपने दरवाजे पर खड़ा था। इसी दौरान पास ही रामसिया मास्टर के मकान में रहने वाला बिधूना के भरथना रोड निवासी विक्रम वहां आया और गाली-गलौज करने लगा।आरोप लगाया था विक्रम ने तमंचा निकालकर उस पर फायर कर दिया। उसके झुक जाने से गोली उसके भाई सलीम के 10 वर्ष के बेटे शादाब की कलाई में लगी। फायर की आवाज सुनकर पहुंचे लोगों ने विक्रम को पकड़ लिया। उसके पास से तमंचा, एक कारतूस व खोखा भी बरामद हुआ। आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया था।
मामले की विवेचना के दौरान सामने आया कि विक्रम का असली नाम गुरुवचन सिंह है। वह मैनपुरी जिले के थाना बेवर के गांव चंदरपुर का रहने वाला है। पुलिस ने गुरुवचन के खिलाफ न्यायालय में हत्या की कोशिश और आयुध अधिनियम व अन्य धाराओं में आरोप पत्र भेजा था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 14 सितंबर 2016 को पत्रावली सत्र न्यायालय में भेज दी थी। इसके बाद से ही अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम न्यायालय में मामले की सुनवाई चल रही थी।
इसमें वादी और पीड़ित की प्रतिपरीक्षा के दौरान बयान भिन्न मिलने पर आरोप साबित नहीं हो सके। पीड़ित बच्चे शादाब ने जहां गुरुवचन को गोली चलाते हुए देखने से इन्कार कर दिया तो वहीं वादी शकील ने भी भीड़ में किसी के गोली चलाने और भीड़ द्वारा ही गुरुवचन को पकड़े जाने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि उसने गुरुवचन को गोली चलाते हुए नहीं देखा।
सभी गवाहों को सुनने को बाद न्यायालय ने 18 अप्रैल को साक्ष्यों के अभाव में गुरुवचन सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। आरोपी जमानत पर था।


