Prateek Yadav News: समाजवादी कुनबे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. सपा संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का 38 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया है. पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जमना) जैसी गंभीर बीमारी ने एक ऐसे शख्स को हमसे छीन लिया, जो राजनीति के पावर सेंटर में पैदा होने के बावजूद हमेशा चकाचौंध से दूर रहा. प्रतीक की पहचान सिर्फ एक ‘यादव’ होने तक सीमित नहीं थी, वे एक सफल बिजनेसमैन, बॉडी बिल्डिंग के शौकीन और एक ऐसी शख्सियत थे, जिनकी जिंदगी के पन्ने उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरे रहे.
मौत की वजह: क्या कहती है मेडिकल रिपोर्ट?
प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत ने सबको हैरान कर दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत का कारण ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स’ (हृदय और श्वसन तंत्र का काम बंद कर देना) रहा. यह स्थिति बड़े पैमाने पर हुए पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म की वजह से बनी. आसान भाषा में कहें तो फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम गया था, जिससे दिल पर दबाव पड़ा और सांसें अचानक थम गईं. लखनऊ के सिविल अस्पताल लाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था. डॉक्टरों ने उनके विसरा और हार्ट के सैंपल सुरक्षित रखे हैं ताकि मौत की तह तक जाया जा सके.
प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत ने सबको हैरान कर दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत का कारण ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स’ (हृदय और श्वसन तंत्र का काम बंद कर देना) रहा. यह स्थिति बड़े पैमाने पर हुए पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म की वजह से बनी. आसान भाषा में कहें तो फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम गया था, जिससे दिल पर दबाव पड़ा और सांसें अचानक थम गईं. लखनऊ के सिविल अस्पताल लाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था. डॉक्टरों ने उनके विसरा और हार्ट के सैंपल सुरक्षित रखे हैं ताकि मौत की तह तक जाया जा सके.
अस्पताल से बिना अनुमति घर आना पड़ा भारी?
बताया जा रहा है कि प्रतीक पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. मौत से ठीक 13 दिन पहले, यानी 30 अप्रैल को भी उनकी तबीयत बिगड़ी थी. उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 3 दिन इलाज चला. डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी, लेकिन प्रतीक बिना मेडिकल परमिशन के ही घर चले आए थे. शायद यही लापरवाही उनकी सेहत पर भारी पड़ गई.
बताया जा रहा है कि प्रतीक पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. मौत से ठीक 13 दिन पहले, यानी 30 अप्रैल को भी उनकी तबीयत बिगड़ी थी. उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 3 दिन इलाज चला. डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी, लेकिन प्रतीक बिना मेडिकल परमिशन के ही घर चले आए थे. शायद यही लापरवाही उनकी सेहत पर भारी पड़ गई.
बचपन का संघर्ष और मुलायम का साथ
प्रतीक का जन्म 7 जुलाई 1987 को फर्रुखाबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर हुआ था. उनकी मां साधना गुप्ता एक नर्स थीं. प्रतीक जब महज एक साल के थे, तभी उनके पिता ने साथ छोड़ दिया और तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक हो गया. प्रतीक की जिंदगी में मोड़ तब आया जब उनकी मां साधना गुप्ता ने मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी की जान बचाई. अस्पताल में एक गलत इंजेक्शन लगने से साधना ने मूर्ति देवी को रोका था, जिससे मुलायम काफी प्रभावित हुए. साल 2007 में मुलायम ने साधना गुप्ता से शादी की और सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ‘साधना मेरी पत्नी और प्रतीक मेरा बेटा है.’
प्रतीक का जन्म 7 जुलाई 1987 को फर्रुखाबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर हुआ था. उनकी मां साधना गुप्ता एक नर्स थीं. प्रतीक जब महज एक साल के थे, तभी उनके पिता ने साथ छोड़ दिया और तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक हो गया. प्रतीक की जिंदगी में मोड़ तब आया जब उनकी मां साधना गुप्ता ने मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी की जान बचाई. अस्पताल में एक गलत इंजेक्शन लगने से साधना ने मूर्ति देवी को रोका था, जिससे मुलायम काफी प्रभावित हुए. साल 2007 में मुलायम ने साधना गुप्ता से शादी की और सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ‘साधना मेरी पत्नी और प्रतीक मेरा बेटा है.’
Advertisement
लंदन से MBA, लेकिन राजनीति को कहा ‘ना’
मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि प्रतीक भी परिवार की तरह राजनीति में आएं. प्रतीक ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया. जब वे भारत लौटे, तो उनके पास सत्ता के गलियारों में बैठने का पूरा मौका था, लेकिन उन्होंने रीयल एस्टेट के बिजनेस को चुना. वे मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर ही रहना पसंद करते थे.
मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि प्रतीक भी परिवार की तरह राजनीति में आएं. प्रतीक ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया. जब वे भारत लौटे, तो उनके पास सत्ता के गलियारों में बैठने का पूरा मौका था, लेकिन उन्होंने रीयल एस्टेट के बिजनेस को चुना. वे मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर ही रहना पसंद करते थे.
जब पिता के चैलेंज पर घटाया 36 किलो वजन
प्रतीक यादव को लग्जरी कारों और फिटनेस का जबरदस्त जुनून था. एक समय उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था. तब मुलायम सिंह यादव ने उनसे कहा था कि अगर वजन कम करोगे तो बड़ा इनाम मिलेगा. प्रतीक ने इस चैलेंज को गंभीरता से लिया और जिम में पसीना बहाकर 36 किलो वजन घटाया. इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपना खुद का जिम खोला और बॉडी बिल्डिंग को अपना पैशन बना लिया. वे अक्सर अपनी करोड़ों की लैंबोर्गिनी कार को लेकर चर्चा में रहते थे.
प्रतीक यादव को लग्जरी कारों और फिटनेस का जबरदस्त जुनून था. एक समय उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था. तब मुलायम सिंह यादव ने उनसे कहा था कि अगर वजन कम करोगे तो बड़ा इनाम मिलेगा. प्रतीक ने इस चैलेंज को गंभीरता से लिया और जिम में पसीना बहाकर 36 किलो वजन घटाया. इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपना खुद का जिम खोला और बॉडी बिल्डिंग को अपना पैशन बना लिया. वे अक्सर अपनी करोड़ों की लैंबोर्गिनी कार को लेकर चर्चा में रहते थे.
अपर्णा के साथ लव स्टोरी और तलाक का ऐलान
प्रतीक और अपर्णा बिष्ट की प्रेम कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी. दोनों स्कूल के दिनों से दोस्त थे. एक जन्मदिन की पार्टी में ईमेल आईडी एक्सचेंज करने से शुरू हुई यह दोस्ती 2011 में शाही शादी में बदली. हालांकि, उनकी शादीशुदा जिंदगी में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखे गए. इसी साल जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर तलाक की बात कहकर सबको चौंका दिया था, लेकिन महज 9 दिन बाद ही दोनों के बीच सुलह हो गई और उन्होंने अपनी तस्वीर साझा करते हुए खुद को ‘चैंपियंस का परिवार’ बताया.
प्रतीक और अपर्णा बिष्ट की प्रेम कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी. दोनों स्कूल के दिनों से दोस्त थे. एक जन्मदिन की पार्टी में ईमेल आईडी एक्सचेंज करने से शुरू हुई यह दोस्ती 2011 में शाही शादी में बदली. हालांकि, उनकी शादीशुदा जिंदगी में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखे गए. इसी साल जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर तलाक की बात कहकर सबको चौंका दिया था, लेकिन महज 9 दिन बाद ही दोनों के बीच सुलह हो गई और उन्होंने अपनी तस्वीर साझा करते हुए खुद को ‘चैंपियंस का परिवार’ बताया.
पत्नी अपर्णा यादव: परिवार की पहली ‘बीजेपी’ सदस्य
अपर्णा ने राजनीति में कदम रखा और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं. 2022 में उन्होंने सबको तब हैरान कर दिया जब वे सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं. वे मुलायम परिवार की पहली सदस्य थीं जिन्होंने बीजेपी का दामन थामा. वर्तमान में वे महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं.
अपर्णा ने राजनीति में कदम रखा और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं. 2022 में उन्होंने सबको तब हैरान कर दिया जब वे सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं. वे मुलायम परिवार की पहली सदस्य थीं जिन्होंने बीजेपी का दामन थामा. वर्तमान में वे महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं.
बिजनेस पार्टनर से विवाद और कानूनी उलझनें
प्रतीक का कारोबार मुख्य रूप से उनके साले चंद्रशेखर सिंह बिष्ट (अमन बिष्ट) के माध्यम से चलता था. साल 2012 में सपा सरकार बनने के बाद चंद्रशेखर ने कई कंपनियां रजिस्टर कराई थीं. पिछले साल प्रतीक तब चर्चा में आए जब उन्होंने अपने पूर्व पार्टनर कृष्णानंद पांडेय के खिलाफ 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की FIR दर्ज कराई थी.
प्रतीक का कारोबार मुख्य रूप से उनके साले चंद्रशेखर सिंह बिष्ट (अमन बिष्ट) के माध्यम से चलता था. साल 2012 में सपा सरकार बनने के बाद चंद्रशेखर ने कई कंपनियां रजिस्टर कराई थीं. पिछले साल प्रतीक तब चर्चा में आए जब उन्होंने अपने पूर्व पार्टनर कृष्णानंद पांडेय के खिलाफ 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की FIR दर्ज कराई थी.
एक अधूरा सफर…
प्रतीक यादव भले ही मीडिया से दूर रहते थे, लेकिन वे ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ के जरिए बेघर जानवरों और गरीब लोगों की मदद करते थे. आज उनके जाने से यादव परिवार में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल है. 38 साल की उम्र, अपनी छोटी बेटियों का चेहरा और अपनी शर्तों पर जीने वाला वो शख्स अब बस यादों में रह गया है.
प्रतीक यादव भले ही मीडिया से दूर रहते थे, लेकिन वे ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ के जरिए बेघर जानवरों और गरीब लोगों की मदद करते थे. आज उनके जाने से यादव परिवार में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल है. 38 साल की उम्र, अपनी छोटी बेटियों का चेहरा और अपनी शर्तों पर जीने वाला वो शख्स अब बस यादों में रह गया है.


