हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के चौथे दिन सोमवार को शासन से नामित तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच टीम ने करीब साढ़े तीन घंटे तक हादसे के कारणों और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पड़ताल की। टूटे पिलर, स्लैब और मलबे से कोर कटिंग के साथ स्टील के नमूने लिए।
प्री-स्ट्रेसिंग का कार्य पूरा हो जाता, तो शायद हादसा न होता
इसके अलावा स्लैब के सेगमेंट भी पूरी तरह जुड़ नहीं पाए थे। यदि समय रहते प्री-स्ट्रेसिंग का कार्य पूरा हो जाता, तो शायद हादसा न होता। एडीएम नमामि गंगे सुरेश कुमार की मौजूदगी में मिथलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह ने क्षतिग्रस्त पिलर, स्लैब और अन्य संरचनाओं की फोटो व वीडियो रिकॉर्डिंग कराई।
जांच टीम के सदस्य राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने बताया कि नमूनों को परीक्षण के लिए आईआईटी कानपुर अथवा वाराणसी भेजा जाएगा। यहां की रिपोर्ट से ही हादसे की वजह साफ हो सकेगी। शुरुआती जांच में आंधी-तूफान से ही हादसा प्रतीत हो रहा है।

टूटे पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए
छह नंबर पिलर की माप कराई जिसकी परिधि 8.66 मीटर निकली। निर्माण में प्रयुक्त सरिया, कंक्रीट और कपलर की भी जांच की। मलबे के बड़े टुकड़ों में अंदरूनी संरचना जांची। टूटे पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए। स्लैब और पिलर में इस्तेमाल 25 एमएम और 32 एमएम सरिया को कटवाकर सैंपल सुरक्षित किया। अधिकारियों की मौजूदगी में सभी नमूनों को सील पैक किया गया।
सभी 13 पिलरों का लोड टेस्ट होने के बाद शुरू होगा पुल का काम
बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के बाद अब निर्माण गुणवत्ता और मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। मृतकों के परिजनों से लेकर साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों तक ने दावा किया है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुरूप हुआ होता, तो पिलर इस तरह टूटकर नहीं गिरता।

प्रत्येक पिलर की क्षमता जांची जाएगी
इन आरोपों को प्रशासन और विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। जांच में जुटी विशेषज्ञों की टीम ने स्पष्ट किया है कि पुल के सभी 13 पिलरों की लोड टेस्टिंग कराई जाएगी। सामान्य तौर पर यह परीक्षण पुल का निर्माण पूरा होने के बाद किया जाता है, लेकिन हादसे के बाद अब दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ही प्रत्येक पिलर की क्षमता जांची जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार लोड टेस्ट के जरिये यह परखा जाएगा कि पिलर निर्धारित भार सहन करने की स्थिति में हैं या नहीं। जांच में यदि कोई पिलर कमजोर या मानक के विपरीत पाया गया, तो उसे गिराकर दोबारा निर्माण कराया जाएगा। उधर पुल हादसे में छह परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं।

सोमवार को मौके पर पहुंची सेतु निगम की विशेषज्ञ जांच टीम ने भी माना कि मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखना बड़ी चूक रही। जांच के लिए पहुंचे सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने कहा कि हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मृतकों के परिजनों के प्रति विभाग की गहरी संवेदनाएं हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि आंधी-तूफान को लेकर पहले से मौसम विभाग का अलर्ट जारी था। ऐसे हालात में निर्माण कार्य बंद करा देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन किसी भी प्रोजेक्ट में सर्वोच्च प्राथमिकता होता है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खराब मौसम के बीच भी पुल पर काम जारी रहा।

इसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। इस पर क्या कार्रवाई होगी इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा। ग्रामीणों और श्रमिकों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता, तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

हादसे के बाद से निर्माण एजेंसी, सेतु निगम और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि हादसा सिर्फ तेज आंधी-तूफान का नतीजा था या फिर निर्माण में तकनीकी खामियां और गुणवत्ता में कमी भी इसकी बड़ी वजह रहीं।



