नई दिल्ली। सेल्सफोर्स साउथ एशिया की प्रेसिडेंट और सीईओ अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि अगर भारत अपनी प्रतिभा को शोध और बेहतर कौशल के साथ जोड़ ले, तो देश वैश्विक एआई इकोसिस्टम में बहुत अहम योगदान दे सकता है। भारत के पास एआई में नेतृत्व करने के लिए टैलेंट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्रेन्योरशिप वाली ऊर्जा है।
भट्टाचार्य ने बताया, “भारत की खास जरूरतों से बहुत सारे नवाचार सामने आएंगे, चाहे वह मल्टीलिंगुअल एआई हो, कम लागत वाले मॉडल हों या ऐसे उपाय जो बहुत बड़े पैमाने पर काम कर सकें। साथ ही, हमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं है।”
एआई की बढ़ती जरूरतों के बीच सबसे टिकाऊ गुण कोई तकनीकी कौशल नहीं, बल्कि जिज्ञासा है।
उन्होंने कहा, “अगर मैंने अपने अलग-अलग पड़ावों वाले सफर से कुछ सीखा है, तो वह यह है कि बदलाव के लिए तैयार रहना, सीखते रहना और जिज्ञासु बने रहना ही लंबे समय तक चलने वाले करियर की पहचान है। काम का भविष्य एआइ से बचकर निकलने के बारे में नहीं है। यह उसका नेतृत्व करने की हिम्मत रखने के बारे में है।”


