नई दिल्ली। भारत में एविएशन सेक्टर तेजी के साथ बढ़ रहा है। देश में अब फ्लाइट का सफर किसी लग्जरी की जगह जरूरत बनता जा रहा है। इसके लिए हवाई यात्रा को और बेहतर बनाया जा रहा है। देश में नए और बेहतर प्लेन भी शुरू किए जा रहे हैं।
भारत का एविएशन सेक्टर नई ऊंचाइयां छू रहा है। यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, एयरलाइंस रिकॉर्ड संख्या में विमानों के ऑर्डर देकर अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं और देश भर में नए एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने भी विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए पिछले साल दिसंबर में नई एयरलाइंस अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को परिचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया।
इनके अलावा उत्तर प्रदेश स्थित शंख एयर को पहले ही एनओसी मिल चुका है। इस एयरलाइन के 2026 में परिचालन शुरू होने की संभावना है।
एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती
भारत के एविएशन सेक्टर की इस विकास की कहानी के पीछे एक बड़ी आर्थिक चुनौती है जो एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी पड़ रही है और वो है एविएशन फ्यूल की लागत।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के वित्त वर्ष 2023-24 के डेटा के मुताबिक, भारतीय एयरलाइंस अपने ऑपरेटिंग खर्च का करीब 40 प्रतिशत विमान के ईंधन और तेल पर खर्च करती हैं।
आसान शब्दों में बात कही जाए तो एयरलाइन पर खर्च होने वाले हर 100 रुपये में से करीब 40 रुपये सिर्फ ईंधन पर खर्च होते हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि तेल ही एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा ऑपरेटिंग खर्च बना हुआ है, जो रखरखाव, यात्री सेवाओं और कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य सभी लागतों से कहीं ज्यादा है।
DGCA ने दिया एक-एक पैसे का हिसाब
DGCA के डेटा से पता चलता है कि विमान का ईंधन और तेल कुल ऑपरेटिंग खर्च का 39.4% है। एयरलाइंस टिकट के किराये का सबसे ज्यादा खर्च तेल पर ही खर्च करती हैं।


