Saturday, July 18, 2026

UP: कूरियर बन गया नकली दवाओं का सबसे बड़ा हथियार, लखनऊ में बढ़ता जानलेवा खतरा; इन दवाओं की हो रही नकल

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राजधानी में नकली दवाओं की तस्करी का बड़ा माध्यम कूरियर सेवा बन गई है। जांच में सामने आया कि दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक जैसी अधिक मांग वाली दवाओं की नकली खेप दूसरे राज्यों से लाई जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी दवाएं मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग राजधानी में नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ नहीं पा रहा। इसकी बड़ी वजह ये है कि राजधानी में नकली दवाओं की ज्यादातर आपूर्ति कूरियर के जरिये पहुंच रही है। जिले के अंदर और आसपास के जिलों में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ही वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।

अधिकारी भी मानते हैं कि दवा की दुकानों तक पहुंचने के बाद नकली-असली की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है। नकली दवाओं को पकड़ने के लिए गोपनीय सूचनाओं पर आश्रित रहना पड़ता है। बृहस्पतिवार रात विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े किए हैं कि आखिर इन दवाओं के निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है।

पिछले तीन वर्ष में कई बार कार्रवाई के बाद भी नकली दवाओं के धंधे पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी है। पुलिस और एफएसडीए के अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक नकली दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक इस धंधे को रोक पाना मुश्किल है। 

दूसरे राज्यों से आ रहीं नकली दवाएं

एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश ने बताया कि पकड़ी गई नकली दवाओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से हो रही है। विभाग एक-एक कड़ी जोड़कर उन फर्मों पर नकेल कसने की तैयारी में है, जो नकली दवाओं के कारोबार में लिप्त हैं। ब्रजेश के अनुसार, नकली दवाओं की खेप कूरियर के जरिये लखनऊ पहुंच रही है जिसे आसपास के जिलों में खपाया जा रहा है।

ज्यादा प्रचलित दवाओं की करते हैं नकल

अब तक की जांच में सामने आया है कि नकली दवा के सौदागर उन दवाओं नकल ज्यादा करते हैं जो बेहद प्रचलित हैं। जिनका सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दर्द, सूजन, सर्दी-जुकाम, बुखार के उपचार में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा एंटीबायोटिक, एंटीएलर्जिक और विटामिन सप्लीमेंट वाली नकली दवाएं भी खूब बनाई जाती हैं। बाजार में ऐसी दवाओं की मांग ज्यादा होती है तो इनकी बिक्री बेहद आसानी से हो जाती है।

जान भी ले सकती हैं नकली दवाएं

डॉक्टरों का कहना है नकली दवाओं में उपचार के लिए आवश्यक सक्रिय तत्व नहीं होते या उसकी मात्रा मानक से बेहद कम या ज्यादा होती है। इससे बीमारी नियंत्रित होने के बजाय बढ़ सकती है। एंटीबायोटिक के मामलों में दवा के प्रतिरोध का खतरा बढ़ जाता है, जबकि गंभीर मरीजों में नकली दवा जान भी ले सकती है।

गहन जांच करने की जरूरत

लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी ने बताया कि नकली दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की टीम अच्छा काम कर रही है। लखनऊ के मेडिसिन मार्केट में टीम ने 28 दुकानों का सर्वे किया था। जांच टीम में प्रदेश भर से बुलाए गए 17-18 ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे। किसी भी दुकान से नकली दवाएं बरामद नहीं हुईं। नकली दवाओं के मामले में काफी समय से आगरा का नाम आता रहा है। वहां पर गहन जांच करने की जरूरत है।

राजधानी में नकली दवाओं की बरामदगी के मामले

अगस्त 2023 : अमीनाबाद और बस स्टेशन क्षेत्र में पुलिस व ड्रग विभाग ने छापा मारकर दो करोड़ रुपये कीमत की 65 हजार से अधिक नकली गोलियां बरामद की थीं। रोडवेज बसों के जरिये इनकी सप्लाई दूसरे जिलों में की जा रही थी।

नवंबर-दिसंबर 2023 : अमीनाबाद स्थित वीडीएस फार्मा पर छापे में नामी कंपनियों की नकली दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाएं मिलीं। जांच के दौरान आगरा, चेन्नई और पुडुचेरी तक नेटवर्क फैला मिला।

जून 2025 : काकोरी में किराना स्टोर की आड़ में चल रही अवैध फैक्टरी से करीब 1.2 करोड़ रुपये की नकली ऑक्सीटोसिन दवाएं पकड़ी गईं।

31 अगस्त-1 सितंबर 2025 : पारा क्षेत्र में एसटीएफ और औषधि विभाग ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी। दो करोड़ का माल बरामद।

14 फरवरी 2026 : कोडिन कफ सिरप सिंडिकेट मामले में एसटीएफ ने गिरोह के एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया।

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