डेस्क: जिंदगी भर दूसरों की धड़कनें बचाने वाले एक डॉक्टर की अपनी जिंदगी की आखिरी धड़कन इतनी खामोशी में थमी कि खबर देने के लिए भी कोई अपना पास नहीं था। 70 वर्षीय अरविंद नाथ पाठक नौसेना में डॉक्टर रह चुके थे। वह कालकाजी के एन ब्लॉक में अकेले रहते थे। मौत के बाद पुलिस ने अमेरिका में रह रही उनकी पत्नी और उनके बेटे को सूचना दी, लेकिन दोनों अंतिम विदाई के लिए दिल्ली नहीं आए। जिस बेटे के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी सपने बुने, वह पिता के आखिरी सफर में साथ नहीं था।
गौर रहे कि ऐसे ही एक मामले कुछ दिन पहले हरियाणा के सोनीपत में भी घटित हो चुका है, जहां मशहूर कपड़ा व्यापारी भी अपने बच्चों को मिलने के लिए अंतिम समय पर तरसता रहा। उनकी तीन बेटियों ने एक बार भी उनका हाल न जाना। मरने के बाद भी वो पिता के अंतिम दर्शन के लिए नहीं आई, बल्कि बहाने बनाती रहै। उनमें से एक ने वीडियो काल पर पिता का संस्कार देखा तो एक बेटी ने 5100 रूपए भेज कर अपने जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।
नशे की गिरफ्त में चले गए थे अरविंद
अरविंद नौसेना में डॉक्टर थे। बाद में कालकाजी में अपना क्लिनिक खोला। पर जिंदगी के किसी मोड़ पर वह नशे की गिरफ्त में चले गए। पुलिस के मुताबिक, उनकी इसी लत ने धीरे-धीरे उन्हें अपनों से दूर कर दिया। पत्नी और बेटा अमेरिका चले गए। पीछे रह गए अरविंद और उनका अकेलापन। डायबिटीज और अन्य बीमारियों से घिरे अरविंद की देखभाल के लिए भाई महेंद्र कभी-कभार आते थे।
घर से निकले, फिर लौट नहीं सके
12 अगस्त को महेंद्र ने कालकाजी थाने में भाई के लापता होने की शिकायत दी। पुलिस ने तलाश शुरू की। अगले दिन शाम अरविंद अपने ही इलाके में कूड़े के ढेर के पास अचेत मिले। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने अमेरिका में रह रही पत्नी और बेटे से संपर्क किया। बेटे ने ई-मेल पर कहा कि शव उनके चाचा और चचेरे भाई को सौंप दिया जाए। पुलिस ने परिवार को अंतिम संस्कार के लिए भारत आने के लिए काफी मनाया, पर उन्होंने असमर्थता जताई। बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की जानकारी लेने के अलावा कोई प्रतिक्रिया नहीं आई


