Tuesday, February 17, 2026
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16 बच्चों की मौत का सच: जहरघर में बन रहा था ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

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नेशनल डेस्क: मध्यप्रदेश में 16 मासूम बच्चों की मौत का कारण बना ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप किसी दवा फैक्ट्री में नहीं, बल्कि एक जहरघर जैसी अवैध इकाई में तैयार किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि वहां घरेलू गैस चूल्हों पर केमिकल उबाले जा रहे थे, प्लास्टिक पाइपों से जहरीला तरल टपक रहा था, और मजदूर बिना दस्ताने और मास्क के मौत का सिरप तैयार कर रहे थे।

 

तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने इस सिरप को बनाने के लिए इंडस्ट्रियल ग्रेड केमिकल चेन्नई के स्थानीय डीलरों से नकद और जीपे के जरिए खरीदे थे- बिना किसी जांच या अनुमति के। यानी बच्चों की दवा में इस्तेमाल हुआ प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल किसी प्रमाणित दवा सप्लायर से नहीं, बल्कि पेंट और केमिकल कारोबारियों से लिया गया था।

 

तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल डायरेक्टरेट की 3 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप में 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल मिला था- वही इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट जो पेंट और एंटीफ्रीज में इस्तेमाल होता है। यही रासायनिक जहर छिंदवाड़ा में बच्चों को दवा बनकर दिया गया और किडनी फेल होने से उनकी मौत हो गई।

 

1 और 2 अक्टूबर को तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग ने जब फैक्ट्री पर छापा मारा, तो वहां का दृश्य भयावह था- जंग लगे उपकरण, गंदगी, खुली नालियां, दीवारों पर फफूंदी, और कोई लैब या सुरक्षा सिस्टम नहीं। जांच में 39 गंभीर और 325 बड़ी खामियां दर्ज की गईं।

 

चौंकाने वाली बात यह है कि कोल्ड्रिफ सिरप बैच SR-13 में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा तय सीमा से 500 गुना ज्यादा थी। यह सिरप मई 2025 में बना था और अप्रैल 2027 तक वैध घोषित किया गया था। महीनों तक यह सिरप बाजार में बिकता रहा, जबकि फैक्ट्री में ना शुद्ध पानी का सिस्टम था, ना कोई फिल्टर या गुणवत्ता जांच।

 

इसी जहरीले सिरप को छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में डॉक्टरों ने बच्चों को दिया, जिससे अगस्त-सितंबर के बीच 16 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। ज्यादातर पीड़ित पांच साल से छोटे थे।

 

एक जांच अधिकारी के शब्दों में, यह “दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता” थी- चेन्नई में घटिया केमिकल की खरीद से लेकर कांचीपुरम में जहरीला उत्पादन और मध्यप्रदेश में निर्बाध वितरण तक, हर स्तर पर निगरानी तंत्र नाकाम रहा।

 

अब श्रीसन फार्मा का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है, उत्पादन पर रोक लगा दी गई है और सभी स्टॉक फ्रीज कर दिए गए हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को “बेहद दुखद” बताया और मुआवजे की घोषणा की। लेकिन उन माता-पिता के लिए कोई राहत नहीं, जिनके बच्चों की जान इलाज के नाम पर दिए गए जहर ने छीन ली।

Diwali 2025: कब मनाई जाएगी दिवाली 20 या 21 अक्टूबर? जानिए लक्ष्मी पूजा का सही मुहूर्त

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नेशनल डेस्कः इस साल दिवाली कब मनाई जाएगी, इसको लेकर कंफ्यूजन बना हुआ है। 2024 में दो दिन तक दिवाली मनाई गई थी, लेकिन इस बार पंचांग की गणनाओं के कारण विवाद छाया हुआ है। दरअसल, कार्तिक अमावस्या तिथि और प्रदोष काल 20 अक्टूबर को पड़ रहे हैं, जबकि कुछ पंचांग 21 अक्टूबर को दिवाली मान रहे हैं।

 

दिवाली की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। इसी कारण दिवाली की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उदया तिथि को मानने वाले 21 अक्टूबर को दिवाली मनाने की बात कह रहे हैं, जबकि कई ज्योतिषियों और काशी नि परिषद ने 20 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना उचित बताया है।

 

महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा

 

विशेषज्ञों के अनुसार, दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में होती है, जो इस वर्ष 20 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 46 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इसी दिन कार्तिक अमावस्या का प्रदोष काल भी है। इसलिए इस दिन महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी का पूजन स्थायी समृद्धि का आधार होता है।

 

काशी विद्वत परिषद की बैठक में भी 20 अक्टूबर को दिवाली मनाने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि 21 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है जो शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगी।

पैदल यात्रियों के लिए दायां या बायां? सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, क्या भारत में बदलने वाला है सड़क नियम?

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नेशनल डेस्क: देश में पैदल यात्री सड़क पर बाईं ओर चलने का नियम लंबे समय से लागू है, लेकिन हाल ही में इस नियम को बदलने की मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। जबलपुर निवासी ज्ञान प्रकाश ने याचिका दाखिल कर केंद्र और नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से जवाब मांगा है कि क्या विदेशों की तरह पैदल यात्रियों के लिए दाईं ओर चलने का नियम बनाया जा सकता है।

 

याचिका में दावा किया गया है कि साल 2022 में हुए करीब 50 हजार सड़क हादसों में 18 हजार मौतें पैदल चलने वालों की हुईं। याचिकाकर्ता का कहना है कि दाईं ओर चलने पर सामने से आने वाले वाहन साफ दिखाई देंगे, जिससे एक्सीडेंट और मौतों की संख्या कम हो सकती है।

 

भारत में बाईं ओर चलने का नियम क्यों?

भारत में Road Regulations, 1989 के तहत पैदल यात्रियों को बाईं ओर चलना अनिवार्य है। इसका तर्क है कि बाईं ओर चलने पर यात्री पीछे से आने वाले वाहनों को देख सकते हैं और टकराव का खतरा कम होता है। साथ ही, सड़क पार करना, मुड़ना और वाहनों के साथ तालमेल बिठाना आसान होता है। देश में बस स्टॉप, फुटपाथ, क्रॉसवॉक और ट्रैफिक लाइट भी इसी नियम के अनुसार बनाए गए हैं।

 

 

याचिकाकर्ता का तर्क

ज्ञान प्रकाश का कहना है कि दाईं ओर चलने से सामने से आने वाले वाहन स्पष्ट दिखाई देंगे और पैदल यात्री तुरंत बचाव कर सकते हैं। उनका मानना है कि वर्तमान बाईं ओर चलने का नियम ब्रिटिश ट्रैफिक सिस्टम से अपनाया गया है और इस कारण पैदल यात्रियों के लिए खतरा बढ़ गया है।

 

दुनिया में नियम

अमेरिका, कनाडा और यूरोप के ज्यादातर देशों में दाईं ओर चलने का नियम है। वहीं, ब्रिटेन, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बाईं ओर चलने की परंपरा जारी है। दाईं ओर चलने से पैदल यात्री ड्राइवर की नजर में आते हैं और हादसों की संभावना कम होती है।

 

इतिहास की बात

फ्रांसीसी क्रांति से पहले अभिजात वर्ग सड़क के बाईं ओर चलता था और किसान दाईं ओर। नेपोलियन ने अपने शासन वाले यूरोपीय देशों में दाईं ओर चलने का नियम लागू किया, जिसे बाद में अमेरिका ने अपनाया। धीरे-धीरे दाईं ओर चलने का नियम दुनिया के कई देशों में मानक बन गया।

 

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से 10 नवंबर तक आंकड़ों के साथ जवाब मांगा है। अब यह देखना बाकी है कि क्या भारत में पैदल यात्रियों के लिए दाईं ओर चलने का नियम लागू किया जाएगा या नहीं।

बुर्का या घूंघट पहनी महिला मतदाताओं की भी होगी जांच? चुनाव आयोग ने दिया स्पष्ट निर्देश

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नेशनल डेस्क : निर्वाचन आयोग ने रविवार को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया। सभी 243 सीटों पर होने वाले इस चुनाव को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को, जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। इस घोषणा के दौरान बुर्का या घूंघट पहनकर आने वाली महिला मतदाताओं की पहचान को लेकर उठे सवाल पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों पर आंगनवाड़ी सेविकाओं की तैनाती की जाएगी, जो आवश्यकता पड़ने पर पहचान सत्यापन में सहायता करेंगी।

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त का जवाब

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवाल पर ज्ञानेश कुमार ने कहा, “जहां तक बुर्कानशीं या पर्दानशीं मतदाताओं की बात है, तो पहचान के लिए हमारी आंगनवाड़ी सेविकाएं उपलब्ध रहेंगी। जरूरत पड़ने पर जांच होगी। निर्वाचन आयोग का स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि मतदान केंद्र पर पहचान का सत्यापन होगा और उनका कड़ाई से पालन होगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, ताकि केवल वास्तविक मतदाता ही वोट डाल सकें।

 

यह मुद्दा चुनावी माहौल में जोर-शोर से उठा है, क्योंकि विपक्षी दल इसे सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास बता रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि पहचान सत्यापन के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा, जिसमें महिला अधिकारी ही शामिल होंगी।

 

बीजेपी की ये थी मांग

इससे पहले शनिवार को बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। जायसवाल ने कहा था, “हमने आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव एक या दो चरणों में कराए जाएं। साथ ही, मतदान करने आने वाले मतदाताओं, खासकर बुर्का पहनने वाली महिलाओं की पहचान, उनके चेहरे का मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) से मिलान करके सत्यापित की जाए, ताकि केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान कर सकें।”

 

उनकी इस मांग पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने तीखा प्रहार किया। आरजेडी ने इसे “घृणा की राजनीति” करार देते हुए कहा कि यह बीजेपी का सांप्रदायिक एजेंडा चलाने का प्रयास है। आरजेडी प्रवक्ता अभय कुषवाहा ने कहा, “विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के बाद सभी मतदाताओं को नई ईपीआईसी कार्ड जारी हो चुकी हैं। पहचान का कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन बीजेपी अपनी रणनीति के तहत विवाद खड़ी कर रही है।” वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने समर्थन देते हुए कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए चाहे बुर्का हो या घूंघट।

ChatGPT ने भारत को दिया बड़ा बूस्ट! इस सेक्टर के एक्सपोर्ट में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी

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नेशनल डेस्क: चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद भारत के कंप्यूटर सर्विसेज सेक्टर के एक्सपोर्ट में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। विश्व बैंक की साउथ एशिया चीफ इकोनॉमिस्ट फ्रांजिस्का ओह्नसोर्गे के अनुसार, चैटजीपीटी ने भारतीय सर्विस सेक्टर को मजबूती दी है और इसके एक्सपोर्ट को बूस्ट किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2025 तिमाही में सॉफ्टवेयर सर्विसेज का एक्सपोर्ट 47.32 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही से 13% अधिक है।

 

चैटजीपीटी से पहले के आंकड़े

जुलाई-सितंबर 2022 में भारत के सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट 36.23 बिलियन डॉलर थे। ओह्नसोर्गे का कहना है कि भारत AI टेक्नोलॉजी अपनाने के मामले में अच्छी स्थिति में है, खासकर बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) इंडस्ट्री में, जो AI स्किल्स को तेजी से अपना रही है।

 

AI स्किल्स की मांग बढ़ी

चैटजीपीटी के आने के बाद BPO सेक्टर में AI स्किल्स की मांग 12% बढ़ गई है, जो पहले की तुलना में दोगुनी है और दूसरे सेक्टर्स की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। ऑक्सफोर्ड इनसाइट्स के गवर्नमेंट AI रेडीनेस इंडेक्स में भारत 46वें स्थान पर है, जो अन्य उभरते बाजारों से बेहतर और विकसित देशों के स्तर के करीब है।

 

सर्विसेज एक्सपोर्ट का महत्व

सर्विसेज का एक्सपोर्ट भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरप्लस मिलता है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के अप्रैल-अगस्त में भारत का गुड्स ट्रेड डेफिसिट 122 बिलियन डॉलर रहा, जबकि सर्विस ट्रेड सरप्लस 81 बिलियन डॉलर था। पिछले साल 2024-25 में गुड्स ट्रेड डेफिसिट 121 बिलियन डॉलर और सर्विस ट्रेड सरप्लस 68 बिलियन डॉलर रहा था।

 

निजी निवेश और FDI की स्थिति

ओह्नसोर्गे ने कहा कि AI से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन कुल निवेश में वृद्धि के लिए यह पर्याप्त नहीं हो सकता। कोरोना महामारी के बाद प्राइवेट कैपिटल खर्च धीमा रहा है। पब्लिक निवेश में वृद्धि हुई है, लेकिन नेट FDI अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर से कमजोर है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 में भारत का ग्रॉस FDI 50 महीने के हाई 11.11 बिलियन डॉलर तक पहुंचा, लेकिन नेट FDI सिर्फ 5.05 बिलियन डॉलर रही। 2024-25 में नेट FDI में भारी गिरावट आई, जो 2023-24 में 10.15 बिलियन डॉलर से घटकर 959 मिलियन डॉलर रह गई। ग्रॉस निवेश बढ़कर 80.62 बिलियन डॉलर तक पहुंचा।

 

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि AI टेक्नोलॉजी और चैटजीपीटी ने भारतीय कंप्यूटर सर्विसेज सेक्टर को नई दिशा दी है, लेकिन निवेश और FDI में सुधार अभी भी जरूरी है।

OnePlus सबसे बड़ी बैटरी वाला फ्लैगशिप फोन करने वाला है लॉन्च, भारत में जल्द देगा दस्तक

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नेशनल डेस्क : स्मार्टफोन मार्केट में धमाल मचाने को तैयार वनप्लस 15 को लेकर फैंस में उत्साह चरम पर है। कंपनी का यह लेटेस्ट फ्लैगशिप मॉडल 27 अक्टूबर को चीन में लॉन्च होने वाला है, जबकि भारत समेत ग्लोबल मार्केट में यह नवंबर के मध्य तक उपलब्ध हो सकता है। हाल ही में सामने आई नई लीक से खुलासा हुआ है कि वनप्लस 15 कंपनी का अब तक का सबसे बड़ी बैटरी वाला स्मार्टफोन होगा। इसके अलावा, 16 अक्टूबर को वनप्लस ऑक्सीजनओएस 16 को रिलीज किया जाएगा, जो कम्पैटिबल डिवाइसेज पर जल्द रोलआउट होगा।

 

दमदार बैटरी

चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर शेयर की गई जानकारी के अनुसार, वनप्लस 15 में 7,300mAh की पावरफुल बैटरी दी जाएगी, जो पिछले मॉडल वनप्लस 13 की 6,000mAh बैटरी से काफी बड़ी है। यह बैटरी सिलिकॉन-कार्बन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी, जो लंबी बैटरी लाइफ सुनिश्चित करेगी। चार्जिंग के मामले में भी कोई कमी नहीं है। फोन में 120W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। इन स्पेसिफिकेशन्स से वनप्लस 15 2025 के सबसे लंबे बैटरी लाइफ वाले फ्लैगशिप्स में शुमार हो सकता है।

 

 

डिजाइन और लुक

लीक इमेजेस से पता चलता है कि वनप्लस 15 का डिजाइन वनप्लस 13 से मिलता-जुलता होगा, लेकिन बैक पैनल पर सर्कुलर कैमरा मॉड्यूल की जगह नया रेक्टेंगुलर सेटअप देखने को मिलेगा। कंपनी ने हाल ही में फोन का फर्स्ट लुक टीज किया है, जिसमें ‘सैंड स्टॉर्म’ फिनिश के साथ एयरोस्पेस-ग्रेड नैनो-सेरामिक मेटल मटेरियल का इस्तेमाल दिखाया गया है। यह मटेरियल टाइटेनियम से 134% ज्यादा मजबूत और स्टेनलेस स्टील से 223% ज्यादा टिकाऊ बताया जा रहा है। कलर ऑप्शन्स में पर्पल, टाइटेनियम और ब्लैक शामिल हो सकते हैं।

 

संभावित स्पेसिफिकेशन्स

वनप्लस 15 में प्रीमियम फीचर्स का खजाना होगा। यहां प्रमुख हाइलाइट्स:

 

डिस्प्ले: 6.78 इंच का 1.5K BOE X3 AMOLED स्क्रीन, 120Hz LTPO डायनैमिक रिफ्रेश रेट (कुछ लीक में 165Hz का जिक्र), डॉल्बी विजन और HDR10+ सपोर्ट।

 

प्रोसेसर और मेमोरी: क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 चिपसेट, 16GB तक LPDDR5X रैम और 1TB UFS 4.1 स्टोरेज।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम: चीन में एंड्रॉयड 16 बेस्ड कलरओएस 16, जबकि ग्लोबल वर्जन में ऑक्सीजनओएस 16।

 

कैमरा सेटअप: ट्रिपल 50MP रियर कैमरा—मेन सेंसर सोनी LYT-700 (OIS के साथ), अल्ट्रा-वाइड और 3.5x ऑप्टिकल जूम वाला टेलीफोटो (दोनों Samsung ISOCELL JN5)। फ्रंट में 32MP सेल्फी कैमरा की उम्मीद।

 

अन्य फीचर्स: IP69 रेटिंग, USB 3.2, NFC, डुअल स्पीकर्स, एडवांस्ड हैप्टिक्स और इन-हाउस इमेज प्रोसेसिंग इंजन (हैसलblad पार्टनरशिप खत्म होने के बाद)।

 

लॉन्च टाइमलाइन: चीन से भारत तक जल्द पहुंच

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वनप्लस 15 का चीन लॉन्च 27 अक्टूबर को होगा, जबकि ग्लोबल (भारत सहित) डेब्यू 13 नवंबर को संभव है। भारत में यह दिसंबर के अंत तक उपलब्ध हो सकता है। वनप्लस 13 की तरह, इस बार भी ग्लोबल रिलीज पिछले मॉडल से काफी तेज होगी।

 

कीमत का अंदाजा

हालांकि आधिकारिक कीमत की घोषणा बाकी है, लेकिन लीक्स से संकेत मिलता है कि बेस वेरिएंट (12GB/256GB) की कीमत लगभग 70,000 रुपये से शुरू हो सकती है, जबकि टॉप मॉडल (16GB/1TB) 90,000 रुपये तक जा सकती है। वनप्लस 15 के साथ कंपनी न केवल बैटरी और परफॉर्मेंस में आगे बढ़ रही है, बल्कि डिजाइन और कैमरा में भी इनोवेशन ला रही है। लॉन्च के करीब पहुंचते ही और डिटेल्स सामने आने की उम्मीद है। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।

चेहरे पर बार-बार दाने क्यों निकलते हैं? ये हो सकते हैं कारण, तुरंत करें ये 5 उपाय

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नेशनल डेस्क : चेहरे पर गालों और नाक के आसपास दाने निकलना आम समस्या बन गई है, जो न केवल सौंदर्य पर असर डालती है बल्कि आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकती है। यह समस्या अधिकतर युवाओं में देखने को मिलती है, लेकिन कभी-कभी यह बड़ी उम्र के लोगों को भी परेशान करती है। हालांकि यह आम तौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन अगर दाने लगातार बढ़ते जाएँ या उनमें असामान्यता दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

मुख्य कारण

गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सौम्या सचदेवा के अनुसार, चेहरे पर दाने निकलने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें हार्मोनल असंतुलन, शरीर की तासीर, और स्किन केयर की गलतियां प्रमुख हैं। गालों पर बार-बार दाने निकलने का एक बड़ा कारण चेहरे को गंदे हाथों से छूना भी हो सकता है। इसके अलावा फोन की स्क्रीन, तकिए के कवर या मेकअप ब्रश पर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस भी दानों का कारण बन सकते हैं।

 

महिला और पुरुषों में कारण अलग

महिलाओं में पीरियड्स के दौरान या हार्मोनल बदलाव के कारण त्वचा की ऑयल ग्रंथियाँ ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे पोर बंद होकर दाने निकल सकते हैं। वहीं पुरुषों में ऑयल ज्यादा निकलना, स्किन केयर की अनदेखी और चेहरे को बार-बार छूना दानों का प्रमुख कारण बनता है।

 

लाइफस्टाइल और खानपान

जंक फूड, तला-भुना, ज्यादा मीठा या डेयरी प्रोडक्ट्स का अधिक सेवन, धूम्रपान और शराब का इस्तेमाल भी चेहरे पर दाने निकलने का कारण बन सकते हैं।

 

बचाव के उपाय

फोन स्क्रीन, तकिए का कवर, मेकअप ब्रश और तौलिए नियमित रूप से साफ करें।

 

दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरे को धोएं।

 

गंदे हाथों से चेहरे को बार-बार न छुएँ।

 

जंक फूड, तला-भुना और अधिक मीठी चीजों से बचें।

 

पर्याप्त पानी पिएँ और हरी सब्ज़ियाँ, फल तथा विटामिन-ए युक्त आहार लें।

लापरवाही: मासूम को स्कूल में बंद कर चले गए शिक्षक, दो घंटे तक बंद कमरे में रोती रही बच्ची

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मासूम भाई संग गई थी। दो घंटे तक बंद कमरे में रोती रही। परिजनों के बताने पर शिक्षक ने ताला खोलकर बच्ची को बाहर निकाला।

एक गांव स्थित एक कंपोजिट विद्यालय में सोमवार को एक मासूम को छुट्टी में शिक्षक स्कूल में ताला लगाकर चले गए। वो अपने भाई के संग स्कूल आई थी। बंद कमरे मेंं वो रोते हुए खिड़की के पास बैठ गई। गनीमत यह रही कि वहां से गुजरे बच्चों की उस पर नजर पड़ी तो परिजनों को खबर दी, हालांकि जानकारी पाकर पहुंचे शिक्षक ने ताला खोलकर उसे बाहर निकाला। ऐसे में वो करीब दो घंटे तक बंद कमरे में रोती रही। इसी बीच किसी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वायरल वीडियो से शिक्षा विभाग में खलबली है।

गांव कन्हो में कंपोजिट विद्यालय है। सोमवार शाम गांव के कुछ बच्चे स्कूल की ओर खेलने गए तो वहां स्कूल के कमरे की खिड़की में बैठी एक चार वर्षीय बालिका को रोते देखा। पूछताछ में उसने अपना नाम तन्नू बताया। बच्चों ने इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। इस पर बालिका के पिता शिवरतन सिंह, देव सिंह, भोले सिंह, गौरव व मनोज गुप्ता के साथ स्कूल पहुंचे। उन्होंने शिक्षक रामचंद्र को फोन कर बालिका के स्कूल में बंद होने की सूचना दी। तब पहुंचे शिक्षक ने ताला खोलकर बालिका को बाहर निकाला। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

कक्षा चार का छात्र प्रियांशु अपनी छोटी बहन तन्नू को स्कूल लेकर आया था बच्ची खेलते-खेलते सो गई। प्रियांशु छुट्टी के समय उसे भूल गया। बालिका लगभग दो घंटे तक स्कूल में बंद रही। विद्यालय स्टाफ की लापरवाही से ग्रामीणों में गुस्सा था। उन्होंने जिला प्रशासन से लापरवाही की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में कंपोजिट विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापक ऊषा ने बताया कि बालिका का स्कूल में नाम नहीं लिखा है। वह स्कूल में पढ़ने वाले अपने घर के बच्चों के साथ आई होगी। उसके सो जाने के कारण स्टाफ नहीं देख पाया और वह स्कूल में रह गई। खंड शिक्षा अधिकारी अछल्दा प्रवीन कुमार ने बताया कि इसकी जानकारी की जा रही है। लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

कोल्डरिफ सिरप को लेकर लखनऊ में छापेमारी,

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लखनऊ- कोल्डरिफ सिरप को लेकर लखनऊ में छापेमारी, कई अस्पतालों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की रेड, लोहिया अस्पताल में टीम पहुंची, जांच में जुटी, लोहिया अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर में छापा, सन फार्मा की कोल्डरिफ उत्तर प्रदेश में बैन, राजस्थान, MP में सिरप पीने से बच्चों की मौत

फोन छिनैती करने वाले 2 शातिरों से मुठभेड़,

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हरदोई- फोन छिनैती करने वाले 2 शातिरों से मुठभेड़, पुलिस से मुठभेड़ में एक के पैर में लगी गोली, शाहाबाद क्षेत्र कई लोगों से छीने थे मोबाइल, दोनों पर घोषित हुआ था 25 हजार इनाम, रामलखन, अंकित को पुलिस ने किया अरेस्ट, 3 साथियों को पुलिस पहले भेज चुकी जेल