Friday, August 21, 2026
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Leopard Alert! बारामूला में एक महीने से घूम रहा तेंदुआ, लोगों के लिए जारी हुई Advisory

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बारामूला(रिजवान मीर): बारामूला के कनलीबाग इलाके में तेंदुए की लगातार हो रही गतिविधियों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। पिछले करीब एक महीने से इलाके में तेंदुआ कई बार दिखाई दे चुका है और अब यह रिहायशी मकानों के आंगनों में भी नजर आने लगा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार तेंदुए को पकड़ने के लिए वन्यजीव विभाग की ओर से क्षेत्र में सी.सी.टी.वी. कैमरे और पिंजरे लगाए गए हैं, लेकिन करीब एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद तेंदुआ अब तक पकड़ में नहीं आया है।

तेंदुए की लगातार मौजूदगी के चलते स्थानीय लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में भय बना हुआ है। लोगों ने वन्यजीव विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने और इलाके में निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

स्थानीय लोगों के लिए सलाह:

सूरत: रेस्टोरेंट से मंगवाया खाना खाने के बाद 5 साल की बच्ची की मौत, परिवार के 4 लोग अस्पताल में भर्ती

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सूरत: गुजरात के सूरत में एक रेस्टोरेंट से खाना मंगवाना एक परिवार के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। परिवार का आरोप है कि स्थानीय रेस्टोरेंट से काजू-पनीर करी खाने के बाद वे बीमार पड़ गए। परिवार के पांच सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज के दौरान पांच साल की आर्या की मौत हो गई।यह परिवार सूरत शहर की रनुजाधाम सोसाइटी में रहता है। उन्होंने शीतल रेस्टोरेंट से यह डिश मंगवाई थी। परिवार के मुताबिक, 16 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे अशोकभाई कलसरिया और उनकी एक बेटी को पेट में तेज़ दर्द की शिकायत हुई। सुबह करीब 9 बजे उन्होंने एक स्थानीय क्लिनिक में इलाज कराया, लेकिन उनकी हालत और बिगड़ गई। जल्द ही परिवार के बाकी सदस्यों की तबीयत भी खराब हो गई। परिवार के सभी बीमार सदस्यों को शहर के सदविचार अस्पताल ले जाया गया। परिवार ने बताया कि अस्पताल के इमरजेंसी रूम में पहुंचने के 15 से 20 मिनट के भीतर ही आर्या की मौत हो गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए कार्रवाई के आदेश 
वहीं इस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने स्थिति का जायज़ा लेने के लिए ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल पटेल और सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारी डॉ. उमरीगर के साथ एक ज़रूरी वीडियो कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह जांच करें कि अस्पताल बचे हुए परिवार के सदस्यों को बेहतर से बेहतर इलाज दे। मंत्री ने शीतल रेस्टोरेंट को तुरंत सील करने का आदेश भी दिया है और स्थानीय म्युनिसिपल व ज़िला स्वास्थ्य अधिकारियों को ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

Raksha Bandhan 2026: क्या चंद्र ग्रहण के साए में मनेगा रक्षाबंधन? जानें सूतक काल का प्रभाव और राखी बांधने के नियम

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handra Grahan on Raksha Bandhan: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर इस बार चंद्र ग्रहण का साया मंडरा रहा है। ऐसे में भाई-बहन के इस अटूट प्रेम के त्योहार पर राखी बांधने की विधि और समय को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने के कारण शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस ग्रहण का रक्षाबंधन पर क्या प्रभाव पड़ेगा और राखी बांधने का सही नियम क्या है।

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वर्ष 2026 में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व है। जो हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व शुभता नहीं बल्कि अपने साथ लेकर आ रहा है ग्रहण का काला साया। इस रोज वर्ष 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में बढ़ौतरी होती है। भाई-बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिए राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। ग्रहण के कारण क्या राखी बांधने के शुभ मुहूर्त में आएगी कोई बाधा?  सूतक काल मान्य होगा या नहीं?

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चंद्र ग्रहण की तारीख और समय
2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27 और 28 अगस्त की रात को लगेगा। वैश्विक समय के अनुसार ग्रहण 01:23 पर शुरू होगा। इसका सबसे शानदार दृश्य 04:41 पर दिखेगा। ग्रहण की समाप्ति 07:02 पर होगी। भारत में समयानुसार ग्रहण सुबह 06:53 से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा।

भारत में नहीं दिखाई देगा

हालांकि यह चंद्र ग्रहण आकाश में एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। इसका कारण यह है कि ग्रहण के समय भारत में दिन होगा और सूरज की रोशनी चांद को ढक देगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल भी लागू नहीं होता।

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सूतक काल और राखी का मुहूर्त
धार्मिक नियमों के अनुसार, सूतक काल केवल वहीं प्रभावी होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण प्रशांत महासागर, अटलांटिक, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में ही नजर आएगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
इसका अर्थ यह है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बहनें हमेशा की तरह शुभ मुहूर्त देखकर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।

ग्रहण के बाद शुद्धि और स्नान-दान
ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले पूरे घर और मंदिर की शुद्धि की जाती है। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराया जाता है। इसके बाद स्वयं स्नान करके और दान-पुण्य करने के बाद ही शुभ मुहूर्त में भाई को रक्षासूत्र बांधा जाता है।

शास्त्रों के इन नियमों का सही तरीके से पालन करने से पूजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भाई-बहन दोनों के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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राखी बांधने के नियम
जिस जगह आप राखी बांधते हैं, वहां स्वच्छता और सात्विकता होना आवश्यक है। लकड़ी के पाट या चौकी पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर भाई को बिठाएं। अगर घर में तुलसी का पौधा या पूजा स्थान हो तो उसके समीप राखी बांधना बहुत शुभ होता है।

वास्तु के अनुसार रक्षा सूत्र बांधने से पहले बहन को उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। भाई को बहन के ठीक सामने यानी दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा को दैवीय ऊर्जा का स्थान माना गया है। यहां से सकारात्मक तरंगें आती हैं, जो पूजा-पाठ और शुभ संस्कारों के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं। भाई का मुख पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम की ओर होने से उसे संरक्षण और स्थिरता प्राप्त होती है। जो रक्षा बंधन के भावार्थ से मेल खाता है।

ल भी लागू नहीं होता।

अमेरिका में धार्मिक आजादी की जीत, गुरुद्वारों पर इमिग्रेशन कार्रवाई पर रोक बरकरार

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वाशिंगटन (सरबजीत सिंह बनूर): एक अमेरिकी संघीय अपील अदालत ने सिख, क्वेकर और बैपटिस्ट समुदायों से संबंधित धार्मिक स्थलों पर या उसके आसपास अधिकारियों द्वारा आव्रजन संबंधी गिरफ्तारियों पर प्रतिबंध को बरकरार रखा है।

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई के डर से प्रवासी तीर्थयात्रियों की उपस्थिति कम हो गई है, जिससे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। यह मामला कैलिफोर्निया के गुरुद्वारा साहिब वेस्ट सैक्रामेंटो, एक बैपटिस्ट फेलोशिप और छह क्वेकर संगठनों द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। अदालत ने आदेश दिया है कि मामले में अंतिम निर्णय आने तक इन धार्मिक स्थलों पर पुराने सुरक्षा दिशानिर्देश लागू रहेंगे। इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक बड़ी जीत बताया गया।

जीते जी तरसे, मरने के बाद भी न आए अपने, नौसेना के पूर्व डॉक्टर और व्यापारी की दुखद कहानी… अपनों के इंतजार में टूट गईं सांसें

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डेस्क:  जिंदगी भर दूसरों की धड़कनें बचाने वाले एक डॉक्टर की अपनी जिंदगी की आखिरी धड़कन इतनी खामोशी में थमी कि खबर देने के लिए भी कोई अपना पास नहीं था। 70 वर्षीय अरविंद नाथ पाठक नौसेना में डॉक्टर रह चुके थे। वह कालकाजी के एन ब्लॉक में अकेले रहते थे। मौत के बाद पुलिस ने अमेरिका में रह रही उनकी पत्नी और उनके बेटे को सूचना दी, लेकिन दोनों अंतिम विदाई के लिए दिल्ली नहीं आए। जिस बेटे के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी सपने बुने, वह पिता के आखिरी सफर में साथ नहीं था।

गौर रहे कि ऐसे ही एक मामले कुछ दिन पहले हरियाणा के सोनीपत में भी घटित हो चुका है, जहां मशहूर कपड़ा व्यापारी भी अपने बच्चों को मिलने के लिए अंतिम समय पर तरसता रहा। उनकी तीन बेटियों ने एक बार भी उनका हाल न जाना। मरने के बाद भी वो पिता के अंतिम दर्शन के लिए नहीं आई, बल्कि बहाने बनाती रहै। उनमें से एक ने वीडियो काल पर पिता का संस्कार देखा तो एक बेटी ने 5100 रूपए भेज कर अपने जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।

 नशे की गिरफ्त में चले गए थे अरविंद 
अरविंद नौसेना में डॉक्टर थे। बाद में कालकाजी में अपना क्लिनिक खोला। पर जिंदगी के किसी मोड़ पर वह नशे की गिरफ्त में चले गए। पुलिस के मुताबिक, उनकी इसी लत ने धीरे-धीरे उन्हें अपनों से दूर कर दिया। पत्नी और बेटा अमेरिका चले गए। पीछे रह गए अरविंद और उनका अकेलापन। डायबिटीज और अन्य बीमारियों से घिरे अरविंद की देखभाल के लिए भाई महेंद्र कभी-कभार आते थे।

घर से निकले, फिर लौट नहीं सके
12 अगस्त को महेंद्र ने कालकाजी थाने में भाई के लापता होने की शिकायत दी। पुलिस ने तलाश शुरू की। अगले दिन शाम अरविंद अपने ही इलाके में कूड़े के ढेर के पास अचेत मिले। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने अमेरिका में रह रही पत्नी और बेटे से संपर्क किया। बेटे ने ई-मेल पर कहा कि शव उनके चाचा और चचेरे भाई को सौंप दिया जाए। पुलिस ने परिवार को अंतिम संस्कार के लिए भारत आने के लिए काफी मनाया, पर उन्होंने असमर्थता जताई। बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की जानकारी लेने के अलावा कोई प्रतिक्रिया नहीं आई

Sawan Purnima 2026: 27 या 28 अगस्त? जानें कब है सावन पूर्णिमा 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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Sawan Purnima 2026: भक्ति और आस्था का सावन माह विश्राम की तरफ बढ़ रहा है। सावन पूर्णिमा के साथ ही इस माह का समापन हो जाएगा। श्रावण माह में पड़ने के कारण इसे श्रावण पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ महादेव की पूजा करने का भी विधान है। सावन पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जाता है लेकिन इस बार काफी लोगों के मन में पूर्णिमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ये 27 को मनाई जाएगी या फिर 28 को। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार दूर करें अपना भ्रम:

Sawan Purnima 2026 Date & Muhurat सावन पूर्णिमा मुहूर्त

पंचांग की गणना के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से होगा। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर होगा। शास्त्रों में उदया तिथि का विशेष महत्व माना गया है। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए सावन पूर्णिमा का व्रत, स्नान और पूजा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को ही मान्य होगा।

सावन पूर्णिमा स्नान और दान का धार्मिक महत्व
श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन विधि-विधान के साथ मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश हो जाता है। कुशाग्र बुद्धि, अच्छी सेहत और लंबी आयु की प्राप्ति के लिए भी ये व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परम्परा है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से व्यक्ति की मनचाही मनोकामना पूर्ण हो जाती है और पाप नष्ट हो जाते हैं। पूर्णिमा तिथि का स्नान 28 अगस्त 2026 को किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति नदी में स्नान करने नहीं जा सकता तो घर में ही नहाने के पानी में किसी भी पवित्र नदी का जल डालकर स्नान कर लें। पूर्णिमा पर दान का ‘अक्षय फल’ प्राप्त होता है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फलों का दान करें।

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टेकऑफ दौरान अचानक विमान के फट गए टायर व टेल स्ट्राइक, सवार 287 लोगों पर मंडराने लगी मौत (Video)

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Munich: जर्मनी के म्यूनिख एयरपोर्ट पर वियतनाम एयरलाइंस के Boeing 787-9 विमान के साथ ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने यात्रियों की सांसें रोक दीं। हनोई जा रहे विमान की टेकऑफ के दौरान रफ्तार दो बार अचानक कम हुई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विमान के हवा में उठने तक रनवे का सिर्फ करीब 91 मीटर हिस्सा बचा था। विमान में 271 यात्री और 16 क्रू सदस्य, यानी कुल 287 लोग सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी लोग सुरक्षित बच गए। घटना 15 अगस्त को हुई, जब वियतनाम एयरलाइंस की फ्लाइट VN34 म्यूनिख से हनोई के लिए रवाना हो रही थी।  वियतनाम के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, टेकऑफ के दौरान विमान की रफ्तार बढ़ना करीब दो सेकंड के लिए रुक गया। इसके बाद विमान ने दोबारा तेजी पकड़ी और जरूरी V1 स्पीड तक पहुंच गया। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद विमान की रफ्तार फिर कम हो गई।

दूसरी बार स्पीड गिरने तक विमान काफी दूर रनवे पर पहुंच चुका था। पायलटों ने आकलन किया कि अब टेकऑफ रोकने के लिए पर्याप्त रनवे बाकी नहीं है।  ऐसे में विमान को रोकने के बजाय पायलटों ने टेकऑफ जारी रखने का फैसला किया और इंजनों को अधिकतम थ्रस्ट पर ले गए।  इसके बाद Boeing 787 रनवे के लगभग अंतिम हिस्से से हवा में उठा। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय विमान के पीछे सिर्फ करीब 91 मीटर रनवे बचा था। टेकऑफ के कुछ ही समय बाद चालक दल को विमान के टेल स्ट्राइक और टायरों में असामान्य दबाव से जुड़ी चेतावनियां मिलीं। पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को स्थिति की जानकारी दी और विमान को दोबारा म्यूनिख लाने का फैसला किया।  विमान तुरंत वापस नहीं उतरा। वह करीब दो घंटे तक हवा में रहा और लगभग 9,000 फीट की ऊंचाई पर चक्कर लगाता रहा।

इस दौरान विमान का वजन कम करने के लिए ईंधन कम किया गया, ताकि वह सुरक्षित तरीके से लैंड कर सके। इसके बाद विमान म्यूनिख एयरपोर्ट पर वापस उतरा।  विमान की जांच के दौरान पता चला कि उसे काफी नुकसान हुआ था। इसमें टेल स्ट्राइक के निशान मिले और चार टायर फटे हुए पाए गए। लैंडिंग के दौरान विमान के लैंडिंग गियर के आसपास धुआं दिखाई देने की बात भी सामने आई। इसके बावजूद विमान सुरक्षित रूप से रनवे पर उतर गया और किसी यात्री या क्रू सदस्य को चोट नहीं आई।  हादसे की असली वजह अभी साफ नहीं हुई है। जर्मनी और वियतनाम के विमानन अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।

UP से दुनियाभर में ‘कालीन की उड़ान’! 56 देशों से आएंगे 400 खरीदार, अक्टूबर में होगा बड़ा एक्सपो

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भदोही : कालीन नगरी भदोही में ‘इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026’ की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयोजकों ने इसके लिए 56 देशों के करीब 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है। साथ ही ब्रिक्स देशों के साथ कारोबारी संबंध मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अनुसार, एशिया के सबसे बड़े कालीन मेले एवं प्रदर्शनी के रूप में पेश किए जा रहे इस एक्सपो का आयोजन चार से सात अक्टूबर तक भदोही में होगा। सीईपीसी केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है।

सीईपीसी के चेयरमैन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि परिषद के पदाधिकारियों, प्रशासनिक समिति के सदस्यों और मेला आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए लंबी बैठक की। गोम्बर ने मीडिया से कहा, ”हमने कालीन मेले एवं प्रदर्शनी के लिए 56 देशों के 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है। इनके अलावा, विभिन्न कालीन विनिर्माण कंपनियों के करीब 350 प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि इन प्रतिनिधियों के आने से भारत में कालीन निर्माण एवं निर्यातक कंपनियों को उनसे सीधे तौर पर जुड़ने और नए संसाधन तलाश करने में मदद मिलेगी। गोम्बर ने बताया कि ‘इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026’ एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा और इसे लेकर विदेशी आयातकों में भी खासा उत्साह है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के करीब 300 कालीन विनिर्माताओं तथा निर्यातकों के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है। वे अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे और ऑर्डर हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिससे भारत के निर्यात को बढ़ाने में योगदान मिलेगा। सीईपीसी के वाइस-चेयरमैन असलम महबूब ने बताया कि इसी साल अक्टूबर में भारत ब्रिक्स देशों की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स देशों के एक प्रतिनिधिमंडल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी आने की सूचना है।

महबूब ने कहा कि सीईपीसी के प्रतिनिधि इन प्रतिनिधिमंडलों से मिलने और भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों तथा फर्श पर बिछाए जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के साथ-साथ वाणिज्यिक साझेदारी के अवसर तलाशने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से कालीन आदि उत्पादों के लिए विश्वसनीय वैश्विक स्रोत के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

J&K Top-6 : Punjab-Jammu सहित कई राज्यों को रेलवे की सौगात तो वहीं श्रीनगर पहुंचे US दूत सर्जियो गोर, पढ़ें…

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सांबा ( अजय )  :  मौसम विज्ञान केंद्र, श्रीनगर के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 19 से 22 अगस्त के दौरान हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। साथ ही, कुछ जगहों पर कुछ समय के लिए जोरदार बारिश भी हो सकती है।

निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें, निचले और जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचें और आधिकारिक सलाह का पालन करें। आपातकालीन स्थिति में, DEOC सांबा से संपर्क करें: 01923-241004 / 01923-246001 | ERSS: 112 | पुलिस कंट्रोल रूम: 95416-49001

Maa Vaishno Devi यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई, शाम को फिर खुले पंजीकरण काउंटर

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कटरा ( अमित शर्मा ) :  खराब मौसम के चलते बुधवार को श्री माता वैष्णो देवी जी की यात्रा को एहतियातन कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। दोपहर में मौसम बिगड़ने के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा पर रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, सूत्रों के अनुसार यात्रा पंजीकरण कक्ष को कुछ समय के लिए बंद रखा गया था।

बाद में शाम 5:25 बजे सभी यात्रा पंजीकरण पर्ची काउंटर दोबारा खोल दिए गए, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए यात्रा प्रक्रिया फिर शुरू होने की जानकारी सामने आई है। खराब मौसम को देखते हुए यात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।