Tuesday, March 3, 2026
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Kishtwar ऑपरेशन पर सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस: सिर्फ 2 दिन में ही नहीं मिली कामयाबी, सर्दियों में भी डटी रहीं Forces, देखें…

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किश्तवाड़  :  किश्तवाड़ पिछले कई दिनों से चल रहे ऑपरेशन व कल जैश के तीन आतंकियों को मार गिराने के बाद आज सेना ने मीडिया के समक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।  काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), मेजर जनरल ए पी एस बल ने कहा कि हाल ही में खत्म हुआ ऑपरेशन 16 महीने से ज़्यादा समय तक लगातार कोशिशों का नतीजा था, और इस सोच को खारिज कर दिया कि यह कामयाबी सिर्फ दो दिनों में मिली।

मीडिया से बात करते हुए, मेजर जनरल बल ने जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ़ “आइसबर्ग का सिरा” है, और इसका क्रेडिट उन कई साइलेंट वॉरियर्स को दिया जिन्होंने इसकी कामयाबी पक्की करने के लिए एक साल से ज़्यादा समय तक पर्दे के पीछे बिना थके काम किया। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी फोर्सेज ने टेररिस्ट मूवमेंट्स के बारे में हर इनपुट और इंटेलिजेंस टिप पर लगातार एक्शन लिया, और तुरंत सर्च और कॉन्टैक्ट ऑपरेशन शुरू किए।

GOC ने ऑपरेशन के दौरान ट्रैकिंग और कॉन्टैक्ट बनाने में आर्मी डॉग स्क्वॉड की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने सर्दियों में पहले कभी नहीं हुई तैनाती पर भी जोर दिया, और कहा कि पहली बार, सिक्योरिटी फोर्सेज कड़ाके की सर्दी के महीनों में भी, ऊंचाई वाले इलाकों में लगभग चार फीट बर्फ होने के बावजूद, सही जगह पर तैनात रहीं।

उन्होंने कहा, “यह इलाका बहुत मुश्किल है। सटीक इंटेलिजेंस इनपुट के बाद भी, लोकेशन तक पहुंचने में अक्सर छह से आठ घंटे लग जाते हैं। जब तक हमारी टीमें पहुंचती हैं, तब तक आतंकवादी कभी-कभी अपने ठिकाने खाली कर देते हैं।”

भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी: सीमा पार आतंक, साइबर और ड्रोन खतरे पर सख्त शिकंजा!

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नेशनल डेस्क: भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी और स्ट्रैटेजी ‘PRAHAAR’ जारी कर दी है। यह दस्तावेज 23 फरवरी 2026 को Ministry of Home Affairs (MHA) द्वारा सार्वजनिक किया गया और मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

करीब 8-9 पन्नों की इस नीति में आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट रूप से दोहराया गया है। साथ ही बदलते वैश्विक और तकनीकी खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित और बहु-आयामी ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ने की स्पष्ट नीति

PRAHAAR दस्तावेज में साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। यह नीति आतंकवाद को एक आपराधिक और सुरक्षा चुनौती के रूप में देखती है, न कि किसी समुदाय विशेष से जुड़ी पहचान के रूप में।

मुख्य खतरे जिन पर खास नजर

नई रणनीति में कई उभरते और पारंपरिक खतरों को रेखांकित किया गया है:

  • सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद, विशेष रूप से जिहादी संगठनों और उनके फ्रंटल नेटवर्क के जरिए।
  • वैश्विक आतंकी नेटवर्क जैसे Al-Qaeda और Islamic State (ISIS) की स्लीपर सेल गतिविधियां।
  • ड्रोन के माध्यम से हथियार, नशीले पदार्थ और भर्ती गतिविधियां।
  • साइबर हमले, जिनमें आपराधिक हैकर्स और राष्ट्र-प्रायोजित तत्व शामिल हैं।
  • सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल फंडिंग और कट्टरपंथ फैलाने के लिए।
  • CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) सामग्री का दुरुपयोग।
  • आतंकी संगठनों और संगठित अपराध गिरोहों के बीच बढ़ता गठजोड़।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर फोकस

नीति में ऊर्जा, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जमीन, समुद्र और वायु मार्ग से आने वाले खतरों के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर है।

काउंटर-टेरर स्ट्रैटेजी के 7 बड़े स्तंभ

1- रोकथाम (Prevention)

  • इंटेलिजेंस आधारित रणनीति
  • मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए रियल-टाइम सूचना साझा करना
  • आतंक फंडिंग और ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कार्रवाई
  • सीमाओं पर अत्याधुनिक निगरानी तकनीक

2. प्रतिक्रिया (Response)

  • स्थानीय पुलिस को ‘पहली प्रतिक्रिया’ बल के रूप में मजबूत करना
  • बड़ी घटनाओं में National Security Guard (NSG) की तैनाती
  • जांच में National Investigation Agency (NIA) की भूमिका और सजा दर बढ़ाने पर जोर
  • MHA के मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत समन्वित कार्रवाई

3. क्षमता निर्माण (Capacity Building)

  • सुरक्षा एजेंसियों का आधुनिकीकरण
  • नई टेक्नोलॉजी और हथियार
  • विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • राज्यों में एकसमान एंटी-टेरर ढांचा विकसित करना

4. कानून और मानवाधिकार संतुलन

  • Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) को प्रमुख कानूनी आधार
  • मानवाधिकारों की रक्षा और बहु-स्तरीय न्यायिक राहत

5.  रेडिकलाइजेशन पर रोक

  • डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम
  • जेलों में निगरानी और सुधारात्मक कदम
  • धार्मिक व सामुदायिक नेताओं की भागीदारी
  • युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार योजनाएं

6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग

MLAT और प्रत्यर्पण संधियां

संयुक्त राष्ट्र में आतंकी संगठनों की लिस्टिंग

द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी

7. समाज-आधारित रिकवरी

  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
  • प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास
  • समुदाय में विश्वास बहाली

आगे की रणनीति

PRAHAAR नीति में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, कानूनों में समय-समय पर संशोधन, राज्यों की ATS यूनिट्स को मजबूत करना, तकनीकी निवेश बढ़ाना और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह रणनीति भारत को पारंपरिक और आधुनिक—दोनों तरह के आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और सक्षम ढांचा प्रदान करती है।

Gold Rate: क्या 80,000 रुपये तक पहुंच जाएगा सोना? सोने की कीमतों को लेकर Bloomberg का बड़ा अनुमान

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नेशनल डेस्कः सोने की कीमतों को लेकर बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हालिया महीनों में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब गोल्ड रेट में संभावित गिरावट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भारत में सोने का भाव 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद प्रमुख कारण रहे हैं। खासतौर पर ब्रिक्स (BRICS) समूह के देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—ने पिछले छह महीनों में वैश्विक सोना खरीद का लगभग आधा हिस्सा अपने नाम किया है। इन देशों का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाना रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

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विश्लेषकों के अनुसार, बदलते भू-राजनीतिक समीकरण अब सोने के बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से जारी तनाव के चलते रूस ने अपने विदेशी व्यापार में डॉलर के उपयोग को सीमित किया और सोने के भंडार को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हालिया संकेत बताते हैं कि रूस अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर की हिस्सेदारी फिर बढ़ा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह सोने के बाजार के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि डॉलर की ओर झुकाव बढ़ने की स्थिति में रूस अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बाजार में उतार सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में अचानक वृद्धि होगी और कीमतों पर दबाव बन सकता है। बड़ी मात्रा में बिकवाली की स्थिति में सोने के दामों में उल्लेखनीय गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता।

कीमतों पर अतिरिक्त दबाव

सोने की संभावित गिरावट का एक अन्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता है। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि यह संघर्ष कूटनीतिक समझौते या व्यापारिक सहमति के माध्यम से समाप्त होता है, तो वैश्विक बाजार में स्थिरता लौट सकती है। ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और आर्थिक संतुलन कायम होता है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने से दूरी बनाते हैं, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आती है। इसी बीच, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख खरीदार देशों द्वारा हाल में की गई भारी खरीदारी के बाद अब मांग में कमी के संकेत मिल रहे हैं। यदि इन देशों की ओर से सोने की खरीद घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी Bloomberg ने अनुमान जताया है कि भारत में सोने के दाम आने वाले समय में 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं होगी, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों में क्रमिक बदलाव के साथ चरणबद्ध तरीके से देखने को मिल सकती है। उनका आकलन है कि वर्ष 2027 के अंत तक बाजार में स्थिरता आने की स्थिति में कीमतें लगभग 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ठहर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी आगाह करते हैं कि सोना वैश्विक संकटों के प्रति अत्यंत संवेदनशील धातु है। इसलिए खुदरा निवेशकों और आम खरीदारों को बाजार की दिशा समझकर ही निवेश या खरीदारी का निर्णय लेना चाहिए, ताकि ऊंचे स्तर पर खरीद कर नुकसान उठाने से बचा जा सके।

फिलहाल वैश्विक निवेशकों की नजरें रूस, अमेरिका और ब्रिक्स देशों की नीतियों पर टिकी हुई हैं। यदि डॉलर मजबूत होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान निकलता है, तो सोने की कीमतों में गिरावट संभव है। वहीं, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में चमक सकता है।

सावधान! शुगर के मरीज बिना प्लानिंग के न रखें रोजा, छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

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Diabetes and Ramadan Guide : रमजान का महीना शुरू होने वाला है और दुनिया भर के मुसलमान रोजे की तैयारी में हैं। हालांकि डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना जोखिम भरा हो सकता है। बिना सही प्लानिंग के रोजा रखने से ब्लड शुगर अचानक गिर सकती है (Hypoglycemia) या बढ़ सकती है (Hyperglycemia) जो सेहत के लिए गंभीर खतरा है।

किन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए? 

डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है। उन्होंने रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन यानी जोखिम के आकलन पर जोर दिया है:

  • किसे है मनाही: जिन्हें किडनी की बीमारी, हार्ट फेल्योर, गर्भावस्था, या हाल ही में कोई गंभीर इंफेक्शन हुआ हो उन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए।
  • टाइप-2 डायबिटीज: जिन मरीजों की शुगर कंट्रोल में है वे डॉक्टर की निगरानी और दवाओं में जरूरी बदलाव के साथ रोजा रख सकते हैं।

    डॉक्टर की 3 गोल्डन सलाह

    1. दवाओं का समय: इंसुलिन या शुगर की दवाओं की डोज़ को सहरी और इफ्तार के हिसाब से बदलना पड़ता है। आमतौर पर सुबह की डोज़ कम की जाती है ताकि दिन में शुगर लेवल अचानक न गिरे।
    2. नियमित जांच: डॉ. अंशुल सिंह बताते हैं कि दिन में कई बार ब्लड शुगर चेक करना चाहिए। याद रखें शुगर जांचने से रोजा नहीं टूटता।
    3. कब तोड़ें रोजा: यदि शुगर 70 mg/dL से कम या 300 mg/dL से ज्यादा हो जाए या फिर चक्कर और पसीना आने लगे तो जान बचाने के लिए तुरंत रोजा तोड़ देना चाहिए।

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    सहरी और इफ्तार की परफेक्ट डाइट

    सही पोषण ही आपको पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखेगा:

    समय क्या खाएं? क्या न खाएं?
    सहरी (Suhur) ओट्स, बेसन चीला, अंडा, फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन। ज्यादा मीठा और नमकीन खाना (इससे प्यास ज्यादा लगती है)।
    इफ्तार (Iftar) एक खजूर और पानी से शुरुआत करें। हल्का सूप, ग्रिल्ड चिकन, दाल और सब्जियां। तला-भुना (पकौड़े), कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा मिठाई।

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    हाइड्रेशन का रखें खास ख्याल

    इफ्तार से सहरी के बीच शरीर में पानी की कमी न होने दें। 8 से 10 गिलास तरल पदार्थ लें। सादे पानी के अलावा नींबू पानी, छाछ, सूप या हर्बल चाय बेहतर विकल्प हैं। चाय और कॉफी कम पिएं क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।

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लखनऊ- शगुन चंद्रा रियल एस्टेट कंपनी का फर्जीवाड़ा, BKT में सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध प्लॉटिंग, राममोहन लोधी के प्रोजेक्ट में निवेश भारी पड़ेगा, बिना मंजूरी सैकड़ों बीघा जमीन पर काटे प्लॉट, एलडीए, रेरा से पंजीकरण नहीं, LDA मूकदर्शक, नोटिस देकर खानापूर्ति, कार्रवाई अबतक नहीं की, साढ़ामऊ, रामपुर बेहटा, मदारीपुर में अवैध प्लॉटिंग, कल्याणपुर गांव व इटौंजा में अवैध प्लॉटिंग की