नेशनल डेस्कः सोने की कीमतों को लेकर बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हालिया महीनों में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब गोल्ड रेट में संभावित गिरावट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भारत में सोने का भाव 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद प्रमुख कारण रहे हैं। खासतौर पर ब्रिक्स (BRICS) समूह के देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—ने पिछले छह महीनों में वैश्विक सोना खरीद का लगभग आधा हिस्सा अपने नाम किया है। इन देशों का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाना रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

विश्लेषकों के अनुसार, बदलते भू-राजनीतिक समीकरण अब सोने के बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से जारी तनाव के चलते रूस ने अपने विदेशी व्यापार में डॉलर के उपयोग को सीमित किया और सोने के भंडार को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हालिया संकेत बताते हैं कि रूस अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर की हिस्सेदारी फिर बढ़ा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह सोने के बाजार के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि डॉलर की ओर झुकाव बढ़ने की स्थिति में रूस अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बाजार में उतार सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में अचानक वृद्धि होगी और कीमतों पर दबाव बन सकता है। बड़ी मात्रा में बिकवाली की स्थिति में सोने के दामों में उल्लेखनीय गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता।
कीमतों पर अतिरिक्त दबाव
सोने की संभावित गिरावट का एक अन्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता है। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि यह संघर्ष कूटनीतिक समझौते या व्यापारिक सहमति के माध्यम से समाप्त होता है, तो वैश्विक बाजार में स्थिरता लौट सकती है। ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और आर्थिक संतुलन कायम होता है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने से दूरी बनाते हैं, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आती है। इसी बीच, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख खरीदार देशों द्वारा हाल में की गई भारी खरीदारी के बाद अब मांग में कमी के संकेत मिल रहे हैं। यदि इन देशों की ओर से सोने की खरीद घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी Bloomberg ने अनुमान जताया है कि भारत में सोने के दाम आने वाले समय में 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं होगी, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों में क्रमिक बदलाव के साथ चरणबद्ध तरीके से देखने को मिल सकती है। उनका आकलन है कि वर्ष 2027 के अंत तक बाजार में स्थिरता आने की स्थिति में कीमतें लगभग 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ठहर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी आगाह करते हैं कि सोना वैश्विक संकटों के प्रति अत्यंत संवेदनशील धातु है। इसलिए खुदरा निवेशकों और आम खरीदारों को बाजार की दिशा समझकर ही निवेश या खरीदारी का निर्णय लेना चाहिए, ताकि ऊंचे स्तर पर खरीद कर नुकसान उठाने से बचा जा सके।
फिलहाल वैश्विक निवेशकों की नजरें रूस, अमेरिका और ब्रिक्स देशों की नीतियों पर टिकी हुई हैं। यदि डॉलर मजबूत होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान निकलता है, तो सोने की कीमतों में गिरावट संभव है। वहीं, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में चमक सकता है।


