Friday, July 17, 2026
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भारत के इस शहर में जापान की कंपनी बनाएगी बड़ा प्लांट, 200 करोड़ खर्च करने का बनाया प्लान

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नई दिल्ली। जापान की वॉटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशन कंपनी, डाइकी एक्सिस, भारत में सस्टेनेबल वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए कर्नाटक के तुमकुरु में अपना तीसरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। कंपनी इस प्रोजेक्ट में लगभग ₹200 करोड़ का निवेश करेगी।

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि उसकी पूरी तरह से अपनी भारतीय सब्सिडियरी ‘डाइकी एक्सिस इंडिया’ के ज़रिए लगाए जाने वाले इस प्लांट में जापानी टेक्नोलॉजी ‘जोहकासो’ (Johkasou) पर आधारित सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम बनाए और असेंबल किए जाएंगे।

गंदे पानी को डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से ट्रीट करने करती है मदद

यह टेक्नोलॉजी वेस्टवॉटर (गंदे पानी) को डीसेंट्रलाइज़्ड तरीके से ट्रीट करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने में मदद करती है। डाइकी एक्सिस इंडिया के एडवाइज़र के.सी. पांडे ने PTI को बताया कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, इंडस्ट्रियल विस्तार और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत में एडवांस्ड वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़्यादा संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रस्तावित प्लांट से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और देश भर में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट समाधानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।

पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।

पांडे ने कहा, “भारत में 24,000 से ज़्यादा शहरी पार्कों के अलावा, साफ़ किए गए वेस्टवॉटर का इस्तेमाल हॉर्टिकल्चर, ग्रीन स्पेस के रखरखाव और हज़ारों रिहायशी कॉम्प्लेक्स, संस्थानों, होटलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पीने के अलावा दूसरी ज़रूरतों के लिए किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि डाइकी एक्सिस का विस्तार केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप है। इसका मकसद वर्ल्ड-क्लास शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, टिकाऊ जल प्रबंधन और बेहतर स्वच्छता प्रणालियां विकसित करना है।

त्विषा शर्मा केस में बड़ा खुलासा: बेल्ट से बनाया था फंदा, AIIMS ने CBI को सौंपी फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट

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भोपाल। मॉडल और एक्टर त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बहुचर्चित मामले में दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों ने अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। इसमें शव की गर्दन पर पाए गए घाव की स्थिति थोड़ी स्पष्ट हुई है। बताया जा रहा है कि यह घाव घटनास्थल पर मिले जिम्नास्टिक बेल्ट के पैटर्न से मेल खा रहा है। बेल्ट पर मृतका के त्वचा के ऊतक भी पाए गए हैं। इसमें साफ हुआ है कि जिम्नास्टिक बेल्ट ही त्विषा की गर्दन का फंदा बना था।

सीलबंद लिफाफे में सौंपी रिपोर्ट

दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने शुक्रवार को सीबीआई को एक सीलबंद लिफाफे में 11 पन्नों की अंतिम फारेंसिक रिपोर्ट सौंपी। इसकी एक प्रति न्यायालय को भी भेजी गई है। यह रिपोर्ट त्विषा की रहस्य बनी मौत का सच सामने लाने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।

एक माह तक हर पहलू की वैज्ञानिक जांच

एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. सुधीर गुप्ता ने न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए रिपोर्ट पर सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर बताया कि मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक हर एंगल से तथ्यों की बारीकी से जांच की है, जो सीबीआई को इस मौत की गुत्थी सुलझाने में मदद करेगी।

पहली पीएम रिपोर्ट में नहीं जुड़ पाया था बेल्ट का संबंध

बताया जा रहा है कि भोपाल एम्स में हुए पहले पोस्टमार्टम में इस बेल्ट और गर्दन की चोटों के बीच संबंध स्थापित नहीं हो पाया था, क्योंकि तब कटारा हिल्स थाने के जांच अधिकारी मेडिकल बोर्ड के सामने वह बेल्ट ही पेश नहीं कर पाए थे। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि त्विषा को फंदे पर लटका कर मारा गया था, या उसने आत्महत्या की थी?

आरोपित सास व पति जेल में

बता दें कि गत 12 मई को शहर के बागमुगालिया एक्सटेंसन स्थित अपनी ससुराल में त्विषा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। मामले में मृतका की सास भोपाल की सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और पति अधिवक्ता समर्थ सिंह जेल में हैं। दिल्ली एम्स की अंतिम फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा लगभग तय हो गई है। सीबीआई जुलाई के आखिरी सप्ताह में आरोपपत्र कोर्ट में पेश करने की तैयारी में है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ था पोस्टमार्टम

शुरुआती जांच से असंतुष्ट मृतका के पिता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय के आदेश पर 22 मई को शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। उसके बाद 24 मई को दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने भोपाल आकर दूसरा पोस्टमार्टम किया। फोरेंसिक साक्ष्यों को पुख्ता करने के लिए एम्स की टीम ने उस जगह का भी बारीकी से मुआयना किया था, जहां त्विषा शर्मा का शव मिला था।

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी आपकी बेसिक सैलरी? 2.28, 2.57 और 2.86 फिटमेंट फैक्टर का पूरा कैलकुलेशन

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नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है। अगर सरकार 8वें वेतन आयोग को लागू करती है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बंपर इजाफा होना तय है। सैलरी में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) पर निर्भर करेगी।

अगर सरकार 2.28, 2.57 या 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो Level 1 से लेकर Level 18 तक के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिलेगा। आइए समझते हैं कि फिटमेंट फैक्टर क्या है और आपके पे-ग्रेड के हिसाब से आपकी नई बेसिक सैलरी कितनी हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) क्या होता है?

फिटमेंट फैक्टर एक तरह का मल्टीप्लायर (Multiplier) या फॉर्मूला है, जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदलने के लिए किया जाता है। इसे आसान भाषा में समझें तो सरकार पुराने वेतन को एक तय गुणांक से बढ़ाकर नई सैलरी फिक्स करती है। जैसे अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 है, तो 20,000 रुपये की बेसिक सैलरी सीधे 51,400 रुपये के आसपास हो जाएगी।

EPFO का नया फैसला, प्राइवेट नौकरी करने वालों के PF फंड पर माफी योजना शुरू; सिर्फ 6 महीने का समय

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नई दिल्ली। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा के मद्देनजर ईपीएफओ ने मान्यता प्राप्त गैर सरकारी भविष्य निधि ट्रस्टों को सरकारी नियमन के दायरे में लाने के लिए एमनेस्टी स्कीम (माफी योजना) की शुरूआत की है। ईपीएफओ ने कर्मचारियों के बकाए फंड समेत अन्य नियमों के पालन के लिए शुरू की गई इस माफी स्कीम के तहत निजी पीएफ ट्रस्टों से आवेदन मांगे है। श्रम मंत्रालय के अनुसार अगले छह महीने के दौरान योजना में शामिल होने का आवेदन करने वाले ट्रस्टों के खिलाफ पुराने लंबित मामलों से लेकर वित्तीय दंड जैसी कार्यवाही से छूट दे दी जाएगी। ईपीएफओ के दायरे से बाहर चलने वाले निजी पीएफ ट्रस्टों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है।

ईपीएफओ माफी योजना 2026 उन प्रतिष्ठानों पर लागू होती है जो आयकर अधिनियम 1961 के तहत मान्यता प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन जिनके पास संबंधित सरकार – केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, से औपचारिक छूट अधिसूचना नहीं है। संसद से पारित वित्त विधेयक 2026 ने मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्टों को नियंत्रित करने वाले आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 के वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रविधानों के अनुरूप कर दिया है।

सिर्फ इनको मिलेगी मान्यता

आयकर अधिनियम 2025 के अंतर्गत मान्यता केवल उन्हीं भविष्य निधियों को प्राप्त होगी जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 की धारा 17 के अंतर्गत छूट प्राप्त की है। ऐसे प्रतिष्ठानों को अधिनियम की धारा 17 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 143 के अंतर्गत माफी का लाभ मिल सकेगा। माफी योजना की अधिसूचना 29 जून को जारी की गई और जो संस्थाएं अपने पीएफ ट्रस्ट को पूर्व की तारीख से नियमित कराना चाहती हैं।साथ ही जिन्होंने पहले ही ””नॉन-एग्जेम्प्टेड”” (छूट-रहित) संस्थान के तौर पर नियमों का पालन शुरू कर दिया है या जो भविष्य में इसके पालन का विकल्प चुन रही हैं वे इस स्कीम के लिए पात्र हैं।

श्रम मंत्रालय के अनुसार जो संस्थान पीएफ ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराना चाहते हैं और सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 के तहत छूट-प्राप्त संस्थान के तौर पर काम जारी रखना चुनते हैं वे भी इस योजना के लिए पात्र होंगे। स्कीम के तहत मिलने वाले मुख्य फायदों में पूर्व की तारीख से रेगुलर होना, छूट का दर्जा और ट्रस्ट की शुरुआत से लेकर तय कट-ऑफ तारीख तक ट्रस्ट की मान्यता शामिल है।

पात्र संस्थाओं को सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 के तहत कुछ जरूरी शर्तों जैसे कर्मचारियों की कम-से-कम संख्या और कॉर्पस (फंड) के आकार से जुड़े नियमों से भी छूट मिलेगी। तीन साल तक नियमों के पालन की शर्त को पूरा माना जाएगा। बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए लंबित मामलों को वापस ले लिया जाएगा और वे खत्म माने जाएंगे। बशर्ते कर्मचारी सदस्य के पीएफ खातों में कानूनी दरों के बराबर या उससे बेहतर दर पर ब्याज और योगदान मिला हो।

साफ है कि माफी योजना के तहत कर्मचारियों के बकाए पीएफ को लेकर किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी बल्कि इसका लाभ लेने के लिए उनके पीएफ के बकाए पुराने रकम को भी जमा कराना होगा।

नेपाल सरकार का एक फैसला और फिर सुलगने लगा काठमांडू, आखिर क्यों बालेन शाह से रूठ गया नेपाल का ‘Gen-Z’?

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काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू एक बार फिर एक राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रही है। सड़कों पर उतरा युवाओं का सैलाब और हवा में गूंजते सरकार विरोधी नारे इस बात गवाही दे रहे हैं कि काठमांडू के हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि जिस ‘Gen-Z’ के दम पर प्रधानमंत्री बालेन शाह सत्ता की कुर्सी तक पहुंचे थे, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

शहरभर में इस भारी आक्रोश का कारण को ऐसे समझा जा सकता है कि नेपाल सरकार ने बिना किसी पुनर्वास योजना के गरीबों, झुग्गीवासियों और भूमिहीन लोगों को उनके आशियानों से बेदखल करना शुरू कर दिया है। नेपाल सरकार के इस फैसले के विरोध में लोग एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं और विरोध प्रदर्शन एक बार फिर बड़े आंदोलन की ओर इशारा कर रहा है।

समझिए क्यों गुस्से में है नेपाल की युवा पीढ़ी?

बता दें कि काठमांडू महानगर पुलिस द्वारा झुग्गियों को हटाए जाने के विरोध में यह प्रदर्शन पिछले कुछ दिनों से चल रहा था, लेकिन अब यह पूरी तरह सरकार विरोधी आंदोलन बन चुका है।

युवाओं का आरोप है कि सरकार बिना किसी ठोस योजना के गरीबों के आशियाने उजाड़ रही है और उन्हें जिन होल्डिंग सेंटरों में रखा जा रहा है, वहां इंसान के रहने लायक हालात नहीं हैं।

बाढ़ ने बदतर किए हालात

शुक्रवार को काठमांडू के एक ऐसे ही सेंटर में बाढ़ आ गई, जिससे वहां रह रहे 150 लोग फंस गए। अगले दिन जब Gen-Z कार्यकर्ता वहां की स्थिति देखने पहुंचे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें एक कार्यकर्ता का चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया। इसके बाद युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

आत्मदाह और गिरफ्तारियों से बढ़ा तनाव

ऐसे में इस आंदोलन में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिसने आग में घी का काम किया। कारण है कि इसी महीने काठमांडू में एक 25 साल के प्रदर्शनकारी गणेश नेपाली ने खुद को आग लगा ली थी, क्योंकि पुलिस ने कथित तौर पर उसकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगा दिया था।

दूसरी ओर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। राजधानी से 206 किलोमीटर दूर कोशी प्रांत में भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाने पर 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने भी इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है।

अब आंकड़ों में समझिए विरोध क्यों बढ़ा

ध्यान देने वाली बात यह है कि बीते अप्रैल 2026 से पूरे नेपाल में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ था। इस अभियान के तहत 2600 से अधिक परिवारों के आशियाने उजाड़े गए, जिससे करीब 15,000 लोग बेघर हो गए। इनमें से 325 परिवार अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में रह रहे थे।

इसके बाद सरकार ने 2 जुलाई को आदेश दिया कि सभी लोग 6 जुलाई तक इन सेंटरों को खाली कर दें। लेकिन कम से कम 60 परिवारों ने जाने से मना कर दिया, क्योंकि उनके पास सिर छुपाने की कोई और जगह नहीं है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए क्यों बड़ी मुसीबत?

इस बात को ऐसे समझिए कि यह विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। कारण है कि पिछले साल जब प्रचंड युवा प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंका था, तब बालेन शाह ने उस Gen-Z आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था। आज वही युवा वर्ग बालेन शाह की नीतियों के खिलाफ खड़ा है।

ऐसे में टाइम मैगजीन की ‘टॉप 100 उभरते नेताओं’ की सूची में शामिल रहे बालेन शाह काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी विकास और सौंदर्यीकरण नीतियों के लिए लोकप्रिय हुए थे। लेकिन गरीबों को बिना छत दिए बेदखल करने के इस ‘अमानवीय’ कदम ने युवाओं के बीच उनकी छवि को बड़ा झटका दिया है।

Auraiya News: चेक बाउंस के मामले में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि दोषमुक्त

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औरैया। जिले के बिधूना थाना क्षेत्र से जुड़े चेक बाउंस के एक पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ने अपीलार्थी ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि आदर्श सेंगर को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर यह निर्णय सुनाया है।

मामला वर्ष 2022 का है, जब गांव पसुआ निवासी रजनी ने आदर्श सेंगर के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया था। आरोप था कि आदर्श सेंगर ने उनसे उधार लिए 2.5 लाख रुपये रुपये के बदले जो चेक दिया था, वह बैंक से हस्ताक्षर मिसमैच होने के कारण बाउंस हो गया। निचली अदालत ने सुनवाई के बाद आदर्श सेंगर को दोषी मानते हुए तीन माह का कारावास की सजा दी थी। इसके साथ ही 3.5 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आदर्श सेंगर ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील के दौरान दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गई। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों दलीलों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने निचली अदालत की ओर से 30 अक्तूबर 2025 को सुनाया गया सजा का फैसला निरस्त कर दिया। बाद में आदर्श सेंगर को एनआई एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है।

एनडीपीएस में जब्त वाहन होगा रिहा

औरैया। जिले के बिधूना थाना क्षेत्र में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक पुराने मामले में जब्त किए गए वाहन व मोबाइल फोन को न्यायालय ने सशर्त सुपुर्द करने के आदेश हैं। बिधूना थाने में दर्ज मुकदमा में पुलिस ने एक वाहन को 40 किलोग्राम गांजे के साथ पकड़ा था। वाहन स्वामी लोकेश पांडेय ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर वाहन को रिलीज करने की मांग की थी।

न्यायाधीश ने वाहन स्वामी को चार लाख रुपये की जमानत और इतनी ही धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र जमा करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वाहन व मोबाइल फोन किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो पहचान सुनिश्चित करने के बाद इसे मालिक को सुपुर्द कर दिया जाए।(संवाद)

किशोरी को ले जाने के आरोपी की जमानत

औरैया। फफूंद थाना क्षेत्र में किशोरी को ले जाने के मामले में जेल में बंद एक युवक को प्रभारी सत्र न्यायाधीश पारुल जैन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामला 10 अप्रैल 2026 का है,
फफूंद थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण ने पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री को खानपुर निवासी राजकुमार उर्फ राहुल ले गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को 17 अप्रैल को जेल भेज दिया था। शुक्रवार को मामले की सुनवाई की गई। इस दौरान पीड़िता ने बयानों में स्पष्ट कहा कि वह अपनी मर्जी से घर से निकली थी।
इस पर कोर्ट ने आरोपी राजकुमार का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उसे 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की जमानत राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। (संवाद)

मासूम से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज

औरैया। कुदरकोट थाना क्षेत्र में पांच वर्षीय मासूम के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) की अदालत ने आरोपी अजय बाथम की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
घटना 22 फरवरी 2026 की है। वादी के अनुसार, उसकी पत्नी खेतों में काम कर रही थी, तभी बाइक सवार एक व्यक्ति ने उनके पांच वर्षीय नाती को 10 रुपये का लालच देकर बाइक पर बैठाया और पेड़ों की तरफ ले गया। वहां आरोपी ने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
पीठासीन अधिकारी अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जमानत दिए जाने का कोई समुचित आधार नहीं है। अदालत ने अजय बाथम की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। (संवाद)

गैंगस्टर के आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
औरैया। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में के आरोपी की प्रभारी सत्र न्यायाधीश पारुल जैन की अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दी। मोहल्ला गोविंद नगर निवासी शनि चौहान को सदर कोतवाली पुलिस ने उसके साथियों के साथ नकली खाद के साथ गिरफ्तार किया था।
इसके बाद पुलिस ने 28 मार्च को शनि सहित पांच आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। गैंगस्टर के मामले की सुनवाई के लिए 10 जुलाई को पत्रावली पेश की गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र पर बल न देना माना। प्रभारी सत्र न्यायाधीश पारुल जैन ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त करने का आदेश दिया।(संवाद)

मारपीट में दो युवकों की जमानत
औरैया। थाना कुदरकोट क्षेत्र में दर्ज मारपीट और एससी-एसटी अधिनियम के मामले में जेल में बंद दो आरोपियों की विशेष न्यायाधीश ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। वादी वीरेंद्र कठेरिया ने थाना कुदरकोट में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया था कि 18 जुलाई 2025 की शाम को राहुल शाक्य, सचिन, नीलेश कुमार और कल्लू ने उसके साथ मारपीट की, जातिसूचक शब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी। शुक्रवार को मामले की सुनवाई की गई।
विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने आरोपी राहुल शाक्य और सचिन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही अभियुक्तों को 25-25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की एक-एक जमानतदार दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिए हैं। (संवाद)

मारपीट व लूट के मामले में पुलिस की रिपोर्ट खारिज
औरैया। फफूंद थाना क्षेत्र के गांव चडरौआ में रंजिश के चलते एक महिला के घर में घुसकर मारपीट, जानलेवा हमले और लूटपाट का मामला सामने आया है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि पूर्व में पुलिस से शिकायत करने की खुन्नस में आरोपियों ने उस पर तमंचे से फायर झोंका और सोने के बाले लूट लिए। मामले में विशेष न्यायाधीश महेश कुमार ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

गांव चडरौआ निवासी गीता पत्नी राजकुमार ने अदालत में प्रार्थना-पत्र देकर बताया कि 28 मई 2026 को गांव के ही देवेंद्र, सीटू और घनश्याम पुत्रगण जवाहरलाल ने उनके घर में घुसकर मारपीट की और उनकी बाइक तोड़ दी।
पीड़िता के अनुसार, इस मामले में पुलिस अधीक्षक को शिकायत करने पर कार्रवाई हुई थी, जिससे नाराज होकर आरोपियों ने 31 मई की रात तीन अज्ञात साथियों के साथ फिर उनके घर में घुस आए। तमंचे से फायर किया। आरोप है कि इस दौरान देवेंद्र ने उनके कान के सोने के बाले छीन लिए और सीटू ने घर में रखे 20 हजार रुपये लूट लिए।

घटना के बाद पीड़िता ने फफूंद थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा। शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई की। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि फायर किए जाने, कान के बाले छीने जाने के दौरान चोट लगने और मेडिकल रिपोर्ट का अभाव जैसे बिंदुओं पर पुलिस विवेचना का पर्याप्त आधार नहीं मिल रहा है।

इन तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए पीड़िता के प्रार्थना-पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। (संवाद)

पंजाब के फाजिल्का में पानी की डिग्गी में डूबने से चचेरे भाई-बहन की मौत, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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अबोहर। गांव मौजगढ़ में पानी की डिग्गी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, दोनों चचेरे भाई-बहन थे, जोकि शनिवार से ही लापता था।
गांव मौजगढ़ में रहने दीपक और उसके भाई रंजीत ने बताया कि वह गांव में ही खेतीबाड़ी का कार्य करते हैं।

दीपक का एक बेटा और एक बेटी, जबकि रंजीत के चार बेटियां हैं। शनिवार सुबह करीब 11 बजे दीपक का बेटा सिद्धांत (6) अपनी चचेरी बहन लवप्रीत (8) पुत्री रंजीत के साथ खेल-खेल में घर से बाहर निकल गए।

दोपहर तक दोनों घर नहीं आए तो उनकी तलाश शुरू की गई, लेकिन शाम तक जब बच्चे नहीं मिले तो पूरे गांव के लोगों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। रात्रि करीब दो बजे गांव से काफी दूर एक फैक्ट्री के पास बनी पानी वाली डिग्गी में लवप्रीत का शव मिला, जबकि रविवार सुबह करीब पांच बजे सिद्धांत का शव भी डिग्गी से मिला।

पांच बहनों का इकलौता भाई था सिद्धांत

मृतक सिद्धांत परिवार की पांच बहनों का इकलौता भाई था। हालांकि, परिवार व गांव के लोगों का कहना है कि यह डिग्गी तक कैसे पहुंच गए। डिग्गी के आसपास तारबंदी भी की हुई है।

सोलर पैनल लगवाने के बाद भी नहीं छूटेगा स्मार्ट मीटर से पीछा, एक्सईएन बोले- शुरूआत में दिक्कत आती है

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बलरामपुर। सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को बढ़ावा देने के लिए लोगों को अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने को प्रेरित कर रही है। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली उपभोक्ताओं को रुला रही है।

पूर्व में शहर और गांव में लगे स्मार्ट मीटर अचानक अपग्रेड हो जाने के कारण प्री-पेड होने से उपभोक्ता हलकान हुए थे। वहीं, अब सोलर पैनल लगाने पर नेट मीटर के बजाय स्मार्ट मीटर की बाध्यता कर दिए जाने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति है।

कारण, नेट मीटर में लोगों को तुरंत उपभोग एवं उत्पाद की गई बिजली की रीडिंग आसानी से मिल जाती है। वहीं, स्मार्ट मीटर में उत्पाद की गई बिजली की गणना में तकनीकी दिक्कतें होती हैं।

ऐसे में जब आवेदक को यह पता चलता है कि सोलर पैनल लगवाने पर स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य होगा, तो वह अपने हाथ पीछे खींच लेता है। अब तक 1690 घरों में पैनल लग सके हैं।

नेट मीटर और स्मार्ट मीटर में अंतर

नेट मीटर एक द्विदिश मीटर होता है, जो सोलर सिस्टम से ग्रिड (बिजली विभाग) को भेजी गई (एक्सपोर्ट) और ग्रिड से ली गई (इंपोर्ट) बिजली का हिसाब रखता है। इसके माध्यम से उपभोक्ता अतिरिक्त सौर ऊर्जा बेचकर बिल में छूट प्राप्त करते हैं।

वहीं, सोलर पैनल लगवाने पर सामान्य स्मार्ट मीटर द्वि-दिशात्मक मोड में न होने पर सोलर से उत्पादित और ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त बिजली का सही क्रेडिट नहीं मिल पाता है।

अगर स्मार्ट मीटर प्रीपेड है, तो सोलर द्वारा ग्रिड में भेजी गई बिजली का हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है और रिचार्ज बार-बार खत्म हो सकता है।

सोलर सिस्टम लगने के बाद, डिस्काम (विद्युत विभाग) को स्मार्ट मीटर में नेट मीटरिंग या ”सोलर एक्सपोर्ट” की सेटिंग करनी पड़ती है, जिसमें कई बार तकनीकी देरी या त्रुटियां होने पर उपभोक्ताओं को उत्पादित बिजली का हिसाब नहीं मिल पाता है।

उपभोक्ताओं का छलका दर्द

नगर के खलवा मुहल्ला निवासी अनुराग तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाया। सिस्टम लगने के बाद उन्हें पता चला कि अब पुराने मीटर को हटाकर इसमें स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा।

उन्होंने उलाहना दिया कि पहले नेट मीटर लगाने की बात हुई थी, जिस पर वेंडर ने विभाग से स्मार्ट मीटर अनिवार्य रूप से लगाने की बात कही। बिजली विभाग के कई चक्कर काटने पर लगभग 10 दिन बाद उन्हें नेट मीटर मिल सका।

इसी तरह छोटा धुसाह निवासी आलोक मिश्र ने भी सोलर सिस्टम के लिए बैंक से ऋण लिया। छत पर सिस्टम लगने के बाद उन्हें बताया गया कि स्मार्ट मीटर लगेगा। इस पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम जाने और सिस्टम निकाल कर वापस ले जाने की बात कही। काफी नोकझोंक के बाद उनके यहां नेट मीटर लगाया गया।

अब शासन से सोलर पैनल के साथ स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। शुरुआत में 15-20 दिन दिक्कत होती है। इसके बाद सेटिंग कर दी जाती है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर से रीडिंग में त्रुटि की आशंका है, तो वह चेक मीटर लगवा सकते हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद BCCI में मची ‘अफरा-तफरी’, कोचिंग स्टाफ से होगी 3 कोचों की छुट्टी!

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नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में शर्मनाक हार के बाद भारत के कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव हो सकता है। गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया को कई शर्मनाक हार का सामना पड़ा है। टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम अब तक कोई भी टी20 मैच नहीं जीत सकी है। अब कोचिंग स्टाफ में बदलाव होने वाला है।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में मेन इन ब्लू को लगातार 6 मैचों में हार मिली। अय्यर कप्तान के तौर पर अब तक एक भी मैच नहीं जीत सके हैं। गंभीर के अगुवाई वाले कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव हो सकता है। असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल अपने पद से हटना का विचार कर रहे हैं।

रयान टेन डोशेट और मोर्ने मोर्कल अपने पद से हट सकते हैं

असिस्टेंट कोच टेन डोशेट और गेंदबाजी कोच मोर्कल का कॉन्ट्रैक्ट इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के बाद समाप्त हो रहा है। ऐसे में दोनों ही अपने पद को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक डोशेट भारत की कोचिंग करने के लिए बहुत अधिक इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने भारतीय टीम के साथ पूरे यात्रा करने को लेकर अपनी दिक्कतें बताई हैं। इसके अलावा मोर्कल भी अलग होने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, क्रिकेट बोर्ड इन सभी चीजों का हल निकालने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोशेट आईपीएल फ्रेंचाइजियों से बात कर सकते हैं। दूसरी तरफ मोर्कल ने अब तक ज्यादा कुछ नहीं कहा है। बता दें कि दोनों को गौतम गंभीर के 2024 में हेड कोच बनने के बाद कोचिंग स्टाफ में शामिल किया गया था।

BCCI पहले भी कर चुका है बदलाव

बीसीसीआई इससे पहले भी भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ में बदलाव कर चुका है। असिस्टेंट कोच अभिषेक नायर को पहले भी हटाया जा चुका है। उनकी जगह बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में कोचिंग करने वाले सितांशु कोटक को बल्लेबाजी कोच बनाया गया था। इसके अलाव खबरें सामने आ रही हैं कि फील्डिंग कोच टी दिलीप को भी हटाया जा सकता है। उनकी भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ भारत की फील्डिंग बेहद खराब रही थी, जिसके बाद अब उनके कार्यकाल को बढ़ाया नहीं जाएगा।

पत्नी की हत्या के दोषी पिता को उम्रकैद, साकेत कोर्ट में 6 साल की बेटी की खामोशी ने झकझोरा

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दक्षिणी दिल्ली। पारिवारिक कलह से लेकर हत्या और मारपीट से जुड़े न जाने कितने मामले रोजाना कोर्ट में आते हैं, पर कुछ विरले ऐसे भी होते हैं, जो इंसान होने के नाते हमें भीतर तक झकझोर देते हैं। ऐसा ही एक मामले साकेत कोर्ट में भी शनिवार को आया। मां के हत्यारे पिता के सामने बेबस खड़ी छह वर्षीय मासूम की खामोश निगाहें हर न्यायप्रिय लोगों के दिलों को चीर रही थीं। उस खामोशी में यही सवाल था कि ”भला मेरा क्या कसूर?”।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने सजा के आदेश में लिखा कि उस खामोश मुलाकात में ही इस मामले की असली त्रासदी छिपी थी। एक बच्ची जो अपनी मां से वंचित हो गई और आज से कानून के आदेश के कारण अपने पिता से भी अलग हो गई।

पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद शक के कारण उसकी हत्या

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपित सुभाष बेरा को अपनी पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद शक के कारण उसकी हत्या करने के लिए उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उन्होंने दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (दक्षिण-पूर्व) को निर्देश दिया कि वे दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना के तहत बच्ची के लिए मुआवजे और पुनर्वास के मामले पर विचार करे। यह मामला 14 नवंबर, 2022 को दोषी की पत्नी की हत्या से जुड़ा है।

कोर्ट ने पाया कि दंपती नौकरी की तलाश में घटना से दो महीने पहले ही बंगाल से दिल्ली पहुंचा था। घटना से कुछ समय पहले उनके बीच झगड़ा हुआ था, जिसमें आरोपित ने मृतका के चरित्र पर शक जताया था। धमकी दी थी कि अगर उसने अपना कथित अफेयर खत्म नहीं किया तो वह उसे मार डालेगा।

महिला की मौत गला घोंटने से हुई

पोस्टमार्टम रिपोर्ट व फोरेंसिक सबूतों से साबित हुआ कि महिला की मौत गला घोंटने से हुई थी। तीन जुलाई को अदालत ने बचाव पक्ष के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि दंपती को आखिरी बार एक साथ देखे जाने और शव मिलने के बीच का समय बहुत कम था।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि कमरे में किसी तीसरे व्यक्ति की पहुंच थी या मौत आरोपित के अलावा किसी और के कारण हो सकती थी।