नई दिल्ली। जापान की वॉटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशन कंपनी, डाइकी एक्सिस, भारत में सस्टेनेबल वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए कर्नाटक के तुमकुरु में अपना तीसरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। कंपनी इस प्रोजेक्ट में लगभग ₹200 करोड़ का निवेश करेगी।
कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि उसकी पूरी तरह से अपनी भारतीय सब्सिडियरी ‘डाइकी एक्सिस इंडिया’ के ज़रिए लगाए जाने वाले इस प्लांट में जापानी टेक्नोलॉजी ‘जोहकासो’ (Johkasou) पर आधारित सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम बनाए और असेंबल किए जाएंगे।
गंदे पानी को डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से ट्रीट करने करती है मदद
यह टेक्नोलॉजी वेस्टवॉटर (गंदे पानी) को डीसेंट्रलाइज़्ड तरीके से ट्रीट करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने में मदद करती है। डाइकी एक्सिस इंडिया के एडवाइज़र के.सी. पांडे ने PTI को बताया कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, इंडस्ट्रियल विस्तार और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत में एडवांस्ड वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़्यादा संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रस्तावित प्लांट से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और देश भर में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट समाधानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।
पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।
पांडे ने कहा, “भारत में 24,000 से ज़्यादा शहरी पार्कों के अलावा, साफ़ किए गए वेस्टवॉटर का इस्तेमाल हॉर्टिकल्चर, ग्रीन स्पेस के रखरखाव और हज़ारों रिहायशी कॉम्प्लेक्स, संस्थानों, होटलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पीने के अलावा दूसरी ज़रूरतों के लिए किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि डाइकी एक्सिस का विस्तार केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप है। इसका मकसद वर्ल्ड-क्लास शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, टिकाऊ जल प्रबंधन और बेहतर स्वच्छता प्रणालियां विकसित करना है।


