Monday, July 13, 2026

नेपाल सरकार का एक फैसला और फिर सुलगने लगा काठमांडू, आखिर क्यों बालेन शाह से रूठ गया नेपाल का ‘Gen-Z’?

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काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू एक बार फिर एक राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रही है। सड़कों पर उतरा युवाओं का सैलाब और हवा में गूंजते सरकार विरोधी नारे इस बात गवाही दे रहे हैं कि काठमांडू के हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि जिस ‘Gen-Z’ के दम पर प्रधानमंत्री बालेन शाह सत्ता की कुर्सी तक पहुंचे थे, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

शहरभर में इस भारी आक्रोश का कारण को ऐसे समझा जा सकता है कि नेपाल सरकार ने बिना किसी पुनर्वास योजना के गरीबों, झुग्गीवासियों और भूमिहीन लोगों को उनके आशियानों से बेदखल करना शुरू कर दिया है। नेपाल सरकार के इस फैसले के विरोध में लोग एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं और विरोध प्रदर्शन एक बार फिर बड़े आंदोलन की ओर इशारा कर रहा है।

समझिए क्यों गुस्से में है नेपाल की युवा पीढ़ी?

बता दें कि काठमांडू महानगर पुलिस द्वारा झुग्गियों को हटाए जाने के विरोध में यह प्रदर्शन पिछले कुछ दिनों से चल रहा था, लेकिन अब यह पूरी तरह सरकार विरोधी आंदोलन बन चुका है।

युवाओं का आरोप है कि सरकार बिना किसी ठोस योजना के गरीबों के आशियाने उजाड़ रही है और उन्हें जिन होल्डिंग सेंटरों में रखा जा रहा है, वहां इंसान के रहने लायक हालात नहीं हैं।

बाढ़ ने बदतर किए हालात

शुक्रवार को काठमांडू के एक ऐसे ही सेंटर में बाढ़ आ गई, जिससे वहां रह रहे 150 लोग फंस गए। अगले दिन जब Gen-Z कार्यकर्ता वहां की स्थिति देखने पहुंचे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें एक कार्यकर्ता का चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया। इसके बाद युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

आत्मदाह और गिरफ्तारियों से बढ़ा तनाव

ऐसे में इस आंदोलन में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिसने आग में घी का काम किया। कारण है कि इसी महीने काठमांडू में एक 25 साल के प्रदर्शनकारी गणेश नेपाली ने खुद को आग लगा ली थी, क्योंकि पुलिस ने कथित तौर पर उसकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगा दिया था।

दूसरी ओर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। राजधानी से 206 किलोमीटर दूर कोशी प्रांत में भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाने पर 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने भी इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है।

अब आंकड़ों में समझिए विरोध क्यों बढ़ा

ध्यान देने वाली बात यह है कि बीते अप्रैल 2026 से पूरे नेपाल में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ था। इस अभियान के तहत 2600 से अधिक परिवारों के आशियाने उजाड़े गए, जिससे करीब 15,000 लोग बेघर हो गए। इनमें से 325 परिवार अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में रह रहे थे।

इसके बाद सरकार ने 2 जुलाई को आदेश दिया कि सभी लोग 6 जुलाई तक इन सेंटरों को खाली कर दें। लेकिन कम से कम 60 परिवारों ने जाने से मना कर दिया, क्योंकि उनके पास सिर छुपाने की कोई और जगह नहीं है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए क्यों बड़ी मुसीबत?

इस बात को ऐसे समझिए कि यह विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। कारण है कि पिछले साल जब प्रचंड युवा प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंका था, तब बालेन शाह ने उस Gen-Z आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था। आज वही युवा वर्ग बालेन शाह की नीतियों के खिलाफ खड़ा है।

ऐसे में टाइम मैगजीन की ‘टॉप 100 उभरते नेताओं’ की सूची में शामिल रहे बालेन शाह काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी विकास और सौंदर्यीकरण नीतियों के लिए लोकप्रिय हुए थे। लेकिन गरीबों को बिना छत दिए बेदखल करने के इस ‘अमानवीय’ कदम ने युवाओं के बीच उनकी छवि को बड़ा झटका दिया है।

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