Hamirpur News: हमीरपुर में नाव पलटने के बाद अपने पांच साल के बेटे को बचाने की कोशिश में मां बृजरानी की भी डूबने से मौत हो गई। तैरना जानने के बाद भी उन्होंने बेटे के लिए बलिदान दे दिया, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा है।
हमीरपुर यमुना की लहरों में मां की ममता डूब गई। तैरना जानते हुए भी बृजरानी ने स्वयं को बचाने का प्रयास नहीं किया। वह अपने पांच साल के बेटे को ढूंढते-ढूंढते डूब गई। गुरुवार को दोनों के शव नदी में अलग-अलग स्थानों पर मिले। ग्रामीणों और परिजनों की आंखें नम रहीं। पूरे गांव में शोक की लहर है।
मां और बेटे के शव अलग-अलग क्षेत्र में मिले
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी और स्थानीय गोताखोरों ने रातभर सर्च अभियान चलाया। लोगों का कहना है कि अगर घटना के समय शोरगुल जल्दी सुनाई दे जाता तो शायद कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। घटना के समय दूसरी शादी का डीजे बजने से चीख पुकार दब गई।
हादसे के समय नाव चालक विष्णु दो बच्चों को नदी से बचाकर किनारे तक लाया और वह खुद थक गया। इसी दौरान उस पार मौजूद धीरू (14) ने बहादुरी दिखाते हुए दो किशोरों को डूबने से बचाने में मदद की। साथ ही ग्रामीणों के साथ डूब रहे लोगों को बाहर निकालने में जुट गया।
पुलिस और गोताखोरों ने नदी में कई स्थानों पर जाल डलवाए। एनडीआरएफ की चार, एसडीआरएफ की दो और फ्लड पीएसी की एक टीम ने करीब 22 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया।
थाना क्षेत्र कुरारा के भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया के सामने बह रही यमुना में मंगलवार देर शाम नाव पलटने से नदी में समाए छह लोगों के शव गुरुवार को मिल गए। नाव पर नाविक समेत नौ लोग सवार थे। इनमें नाविक विष्णु ने खुद को तो बचाया ही था, डूब रहे दो अन्य लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।
नदी किनारे खड़े एक साहसी किशोर ने भी नदी में कूदकर विष्णु की मदद की थी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें रातभर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं। रेस्क्यू अभियान 22 घंटे चला। मरने वालों में मां-बेटा भी हैं। ये सभी लोग यहां एक शादी समारोह में आए थे।
भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया निवासी गयाप्रसाद उर्फ राजू की बेटी अंजली की शादी सोमवार को हुई थी। बरात कानपुर देहात के सिरसा, क्योटरा गांव से आई थी। मंगलवार को विदाई के बाद परिवार और रिश्तेदार शाम करीब चार बजे यमुना पार कानपुर देहात सीमा स्थित नदी किनारे बारी पर खरबूजा, तरबूज, खीरा और ककड़ी लेने व खाने गए थे।

