Tuesday, June 30, 2026
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योगी सरकार का बड़ा फैसला: UP के इन 18 शहरों का बदलेगा ट्रांसपोर्ट सिस्टम, 1725 ई-बसों को हरी झंडी, जानें किसे मिलेगा फायदा

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में सकल लागत अनुबंध (GCC) मॉडल के तहत 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन किया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बीते बुधवार शाम को मंत्रिमंडल की हुई बैठक में मुहर लगाई गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है।

निजी ऑपरेटर संभालेंगे ई-बसों का पूरा जिम्मा
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 वातुनकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी संचालकों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 24 प्रस्तावों को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग अवसरंचना की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी संचालकों की होगी।

डिपो के लिए मुफ्त जमीन और सरकार तय करेगी किराया
खन्ना के मुताबिक निर्धारित मानकों के आधार पर बस संचालकों को संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा नौ मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

निजी निवेश से घटेगा सरकारी वित्तीय बोझ
बयान के मुताबिक इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। वर्तमान में राज्य के 15 नगर निगम क्षेत्रों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है।

आबादी की रफ्तार पर लगा ब्रेक: गिरा भारत का फर्टिलिटी रेट, जानें कहां सबसे कम बच्चे पैदा कर रहीं महिलाएं?

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India Total Fertility Rate Drop : भारत जो कभी अपनी बेकाबू आबादी और ‘जनसंख्या विस्फोट’ की चुनौतियों के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय रहता था अब जनसांख्यिकी (Demographic) के एक बिल्कुल नए और ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में जारी सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR – प्रति महिला औसतन बच्चों को जन्म देने की संख्या) घटकर 1.9 पर आ गई है। यह आंकड़ा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की आबादी को स्थिर रखने के लिए जरूरी आदर्श स्तर 2.1 माना जाता है और भारत अब इस रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे आ चुका है।

जानें क्यों छोटा हो रहा है भारतीय परिवार?

दशकों पहले तक जहां बड़े परिवार रखना भारतीय समाज और संस्कृति की पहचान हुआ करता था वहीं आज के दौर के युवाओं की सोच पूरी तरह बदल चुकी है। इसके पीछे कई ठोस सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। बता दें कि आज की युवा पीढ़ी बच्चों की संख्या के बजाय उनकी अच्छी परवरिश और लाइफ क्वालिटी को प्राथमिकता दे रही है।

बड़े शहरों में बढ़ता खर्च, प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतें और बच्चों की उच्च शिक्षा के भारी-भरकम बजट ने मिडिल क्लास परिवारों को परिवार का दायरा सीमित रखने पर मजबूर किया है। महिलाओं में उच्च शिक्षा का ग्राफ बढ़ना, कॉर्पोरेट जगत और नौकरियों में उनकी बढ़ती भागीदारी और शादी की उम्र का बढ़ना इसके सबसे बड़े सामाजिक कारण बनकर उभरे हैं।

फर्टिलिटी रेट में नॉर्थ-साउथ डिवाइड: राज्यों की स्थिति

सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करें तो देश के भीतर ही आबादी की रफ्तार को लेकर उत्तर और दक्षिण के राज्यों में एक बहुत बड़ी खाई (North-South Divide) साफ नजर आती है:

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राज्य / केंद्र शासित प्रदेश,                टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR),                  मौजूदा स्थिति
दिल्ली (Delhi),                                      1.2,                                                      पूरे देश में सबसे कम प्रजनन दर
तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल,                1.3,                                                     आबादी तेजी से स्थिरता और गिरावट की ओर
उत्तर प्रदेश,                                           2.6,                                                     राष्ट्रीय औसत से ऊपर
बिहार (Bihar),                                      2.9,                                                     देश में सबसे अधिक प्रजनन दर

दक्षिण राज्यों में बदलाव की मुख्य वजह: दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों में साक्षरता और महिला सशक्तिकरण का स्तर काफी ऊंचा है। यहां जागरूकता अधिक होने के कारण महिलाओं ने परिवार नियोजन (Family Planning) से जुड़े फैसले खुद अपने हाथों में लिए हैं।

क्या भविष्य में भारत भी बनेगा जापान या साउथ कोरिया?

टोटल फर्टिलिटी रेट का 2.1 के आदर्श स्तर से नीचे गिरना भविष्य के भारत के लिए एक नई और गंभीर चुनौती की घंटी है। यदि लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ दशकों में देश के सामने ये बड़े संकट होंगे:

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बुजुर्गों की बढ़ती आबादी: देश में वृद्ध लोगों की संख्या तेजी से बढ़ेगी जिससे देश के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और पेंशन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

कामकाजी युवाओं की कमी: देश को आगे ले जाने वाले कामकाजी युवाओं (Working-Age Population) की संख्या घटने लगेगी। वर्तमान में जापान, इटली और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देश इसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

Jagannath Rath Yatra 2026: जल्दी ही आ रहे हैं भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों से मिलने, जानिए कब से शुरू होगी रथ यात्रा?

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Jagannath Rath Yatra 2026: सनातन धर्म में जगन्नाथ पुरी धाम का विशेष महत्व है, जो चार धामों में से एक माना जाता है। हर साल की तरह, साल 2026 में भी भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस विश्व प्रसिद्ध ‘रथ यात्रा’ की तैयारियां अभी से चर्चा में हैं। आस्था और भक्ति का यह अनूठा उत्सव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।

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Jagannath Rath Yatra 2026: नोट कर लें तारीख
साल 2026 में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। यह यात्रा पुरी स्थित मुख्य मंदिर से शुरू होकर गुंडीचा मंदिर (भगवान की मौसी का घर) तक जाती है। लगभग 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 24 जुलाई 2026 को ‘बहुदा यात्रा’ यानी वापसी यात्रा के साथ होगा।

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बाहुड़ा यात्रा क्या है?
‘बाहुड़ा’ शब्द ओड़िया भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘वापसी’ होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने विशाल रथों पर गुंडिचा मंदिर से वापस अपने मुख्य मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भी रथ यात्रा की तरह ही भव्य और उत्साहपूर्ण होती है, बस इसकी दिशा विपरीत होती है। भगवान बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’और भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ हैं।

रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
भारतीय जनमानस की भक्ति के प्राणाधार श्री कृष्ण का सबसे दयालु स्वरूप भगवान जगन्नाथ है। भगवान जगन्नाथ अर्थात भक्त के नाथ, जगत के नाथ दयालु भगवान। इस स्वरूप में विशाल नेत्रों के साथ बांहें पसारे भगवान जगन्नाथ भक्त को अपने आलिंगन में लेने के लिए उसे पुकार रहे हैं। भगवान जगन्नाथ रथयात्राओं के आयोजन का वास्तविक अर्थ भक्त एवं भगवान का मिलन है।

तीनों रथों की अनोखी विशेषताएं
रथ यात्रा के लिए भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और जगन्नाथ जी के रथ अलग-अलग होते हैं, जिनका निर्माण धार्मिक विधि से अक्षय तृतीया के दिन से आरंभ होता है। वर्तमान समय में अभी इनका निर्माण चल रहा है।

नंदी घोष: भगवान जगन्नाथ का रथ नंदी घोष 45 फीट ऊंचा होता है, जिसमें 16 पहिये होते हैं। इसका रंग लाल और पीला होता है। इस रथ के रक्षक के रुप में महावीर बजरंगबली और भगवान नृसिंह के प्रतीक अंकित किए जाने का विधान है। रथ यात्रा में जगन्नाथ जी का रथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के पीछे रहता है।

तालध्वज: जगन्नाथ जी के बड़े भाई बलभद्र का रथ है तालध्वज। जो रथ यात्रा का नेतृत्व करते हुए सबसे आगे रहता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट रहती है, जिसमें 14 पहिये होते हैं। इसे पूर्ण रुप से नीले रंग से सजाया जाता है।

दर्पदलन: बहन सुभद्रा जी का रथ दोनों भाईयों के मध्य में चलता है। इसकी ऊंचाई 43 फीट है और इसमें 12 पहिये होते हैं

बलभद्र जी का रथ (तालध्वज): भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र जी का रथ सबसे आगे रहता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट है और इसमें 14 पहिये होते हैं। यह नीले रंग की सजावट के साथ अपनी भव्यता बिखेरता है। ये रथ काले रंग से सुसज्जित होता है।

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एक चिंगारी और सब खत्म…दिल्ली होटल अग्निकांड में उजड़ गया पूरा परिवार, गुरुग्राम के 7 लोगों की दर्दनाक मौत

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दिल्ली : दिल्ली में हुए भीषण होटल अग्निकांड ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में गुरुग्राम के सेक्टर-46 निवासी एक ही परिवार के सात सदस्यों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई। आग की चपेट में आने से सभी जिंदा जल गए, जिससे परिजनों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई है।

मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के सेक्टर-46 निवासी विवेक अग्रवाल अपने परिवार के साथ दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती अपने पिता का हालचाल जानने गए थे। अस्पताल में कुछ दिनों से उनके पिता का इलाज चल रहा था। इसी दौरान परिवार दिल्ली में एक होटल में ठहरा हुआ था, जहां अचानक भीषण आग लग गई।

इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान
विवेक अग्रवाल
तर्जनी अग्रवाल, पत्नी
प्रेमलता अग्रवाल, माँ (विवेक की)
एंजल अग्रवाल बड़ी बेटी
पर्ल (छोटी बेटी)
अशोक गोयल (मामा)
कमला (मौसी)

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

पटना में कल रात खान सर के कोचिंग पर हमला

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पटना में कल रात खान सर के कोचिंग पर हमला, 10 राउंड से ज्यादा फायरिंग, पत्थरबाजी हुई है !!*खान सर बोले– “लोगों को परेशानी है कि इतनी कम फीस में हम बच्चों को क्यों पढ़ाते हैं। यहां से छात्रों का सलेक्शन क्यों हो रहा है। इसी रंजिश में यह हमला हुआ है”पुलिस मान रही है कि कोचिंग सेंटरों की आपसी प्रतिस्पर्धा में यह हमला हुआ है।

यूपी के बेसिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों व रसोइयों को मिलेगा कैशलेस इलाज, 4 जून को होगा प्रशिक्षण

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यूपी के बेसिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों व रसोइयों को मिलेगा कैशलेस इलाज, 4 जून को होगा प्रशिक्षण

लखनऊ-उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। शिक्षा निदेशक बेसिक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने समस्त जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए हैं।

पत्र के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों और मान्यता प्राप्त अनुदानित/स्ववित्त पोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक CWCN अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डन, पूर्ण कालिक शिक्षक/शिक्षिका और प्रधानमंत्री पोषण योजना की रसोइयों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी।

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 4 जून 2026 को दोपहर 12 बजे शिविर कार्यालय, शिक्षा निदेशक बेसिक, लखनऊ में प्रशिक्षण आयोजित होगा। इसमें साचीज द्वारा संबंधित कार्मिकों को कैशलेस सुविधा देने की प्रक्रिया समझाई जाएगी।

सभी BSA को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिले से संबंधित कार्मिक को नोडल नामित करें और लैपटॉप सहित समय से प्रशिक्षण में भाग लेना सुनिश्चित कराएं। पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, महानिदेशक स्कूल शिक्षा और मध्याह्न भोजन प्राधिकरण समेत 7 अधिकारियों को भेजी गई है।

यह आदेश शासनादेश संख्या 1/1228587/2026 दिनांक 05.02.2026 के अनुपालन में जारी किया गया है।

मेरिट में छात्राओं का दबदबा देख CM योगी का तंज, बोले- लड़के शायद झाड़ू-पोछा में व्यस्त

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक एवं उच्च्तर माध्यमिक परीक्षाओं में छात्राओं के मुकाबले छात्रों की कम संख्या के मद्देनजर सोमवार को कहा कि छात्राएं घर के काम में सहयोग करने के बावजूद बेहतर अंक प्राप्त कर रही हैं लिहाजा छात्रों को उनका अनुसरण करना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग की परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्राओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने मेधा सूची में छात्राओं के मुकाबले छात्रों की कम संख्या होने का जिक्र किया।

223 छात्र-छात्राओं का सम्मान किया
उन्होंने कहा, “इस अवसर पर मैं देख रहा था कि इस समारोह मे 223 छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जा रहा है, जिनमे छात्रों की संख्या 85 है और छात्राओं की संख्या 138 है, यानी छात्राओं की संख्या मेधा सूची में अधिक है, छात्र कम हैं। प्रदेश स्तर पर हाईस्कूल की परीक्षा में 115 बच्चों में 34 छात्र हैं, 81 छात्राएं हैं। इंटरमीडिएट की टॉप की सूची में देखें तो छात्र नौ हैं, छात्राएं 14 हैं।

ये संख्या बता रही हैं कि छात्राएं ज्यादा मेहनत करती
आदित्यनाथ ने कहा, “यह संख्या बताती है कि छात्राएं ज्यादा मेहनत करती हैं और ज्यादा मेहनत करके ज्यादा अंक प्राप्त करने की सामर्थ्य भी रखती हैं। जबकि हम लोग यह मानते थे कि छात्राएं घर में अपनी माता का भी सहयोग करती हैं।” मुख्यमंत्री ने तंज भरे लहजे में कहा, “लेकिन लगता है कि अब परिवर्तन आ गया है और छात्र घर में झाड़ू-पोछा ज्यादा लगाने लग गए हैं… या लगता है कि मां-बाप उनसे ज्यादा काम ले रहे हैं, सब्जी लेने के लिए भेजते होंगे। घर और मोहल्ले में भी हो सकता है कि कुछ झाड़ू लगा रहे होंगे। इसीलिए छात्रों के अंक इतने कम हैं और छात्राएं मेहनत कर रही हैं और मेरिट स्थान में उन्होंने अच्छा स्थान प्राप्त किया है।

छात्रों को उनसे अनुसरण करना चाहिए 
आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि यह एक सुखद लक्षण है, लेकिन छात्रों के लिए भी एक प्रेरणा भी होनी चाहिए कि छात्राएं घर में परिवार का सहयोग करते हुए भी अच्छे अंक प्राप्त कर रही हैं और मेरिट में ज्यादा संख्या में स्थान प्राप्त कर रही हैं, तो छात्रों को कम से कम उनका ही अनुसरण कर लेना चाहिये। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बालिकाओं की शिक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, “मेरा मानना है कि बेटी पढ़ेगी तो आगे बढ़ेगी और देश और समाज को भी आगे बढ़ाएगी, यह इस रिजल्ट के माध्यम से एक संदेश बहुत स्पष्ट आ गया हम सबके सामने है।

बच्चे पहला गुरु अभिभावक
आदित्यनाथ ने कहा कि हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं की आयु ऐसी है कि इसी समय उन्हें सही दिशा प्रदान करनी चाहिए तभी उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का अभिभावक उसका पहला गुरु होता है लेकिन आज हो क्या रहा है हम लोग अक्सर देखते हैं कि बच्चा रो रहा है तो माता-पिता उसको संतुष्ट करने के लिए उसे अपना स्मार्टफोन दे देते हैं। आदित्यनाथ ने आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को ऐसे दूसरे कार्यों के साथ जोड़ा जाए जो उसका रचनात्मक विकास कर सकें। उन्होंने कहा, “दो-तीन वर्ष के बच्चे को आप स्मार्टफोन पकड़ा रहे हैं, वीडियो गेम के साथ जोड़ रहे हैं। उसके घातक परिणाम भी हम सबको देखने को मिल रहे हैं। हम सबको यह बातें याद रखनी होगी कि भारत में ज्ञान की कितनी समृद्धि परंपरा रही है। विद्या को भारत ने बहुत विस्तृत रूप से माना है।

चोरी के शक में दुकानदार ने हदें की पार: दलित किशोरी को पेड़ से बांधकर पीटा, वीडियो वायारल

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देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में चोरी के आरोप में 14 वर्षीय दलित किशोरी को पेड़ से बांधकर उसकी पिटाई किए जाने की घटना सामने आई है। पुलिस ने घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आरोपी दुकानदार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि तरकुलवा थाना क्षेत्र के मिश्रौली गांव निवासी हरिकेश गुप्ता (24) की किराने की दुकान है।

चोरी के शक में किशोरी को पकड़ा
आरोप है कि उसने दुकान में चोरी के संदेह में गांव की 14 वर्षीय किशोरी को पकड़ लिया। ग्रामीणों के मुताबिक, गुप्ता ने किशोरी के बाल पकड़कर उसे पहले पूरे गांव में घुमाया और फिर अपने मकान के बाहर नीम के पेड़ से बांधकर उसकी पिटाई की। एक राहगीर ने घटना का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया।

S/C एक्ट के तहत पुलिस ने दर्ज किया केस 
ग्रामीणों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर तरकुलवा पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और किशोरी को मुक्त कराया। पुलिस ने बताया कि पीड़िता दलित समुदाय से है। उसने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

मौके पर पीड़िता को पुलिस ने छुड़वाया 
पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सुनील कुमार रेड्डी ने बताया कि रविवार को सूचना मिली कि मिश्रौली गांव में किराने की दुकान में चोरी के संदेह में दुकानदार ने एक लकड़ी को पकड़ लिया है और उसकी पिटाई कर रहा है। उन्‍होंने बताया कि सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़ित लड़की को छुड़ाया और आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी।

₹18600 से घटकर ₹11000 हुआ वेतन, तो 4 परिचालकों ने उठाया आत्मघाती कदम… पुलिस ने समय रहते टाला बड़ा हादसा

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हाई-सिक्योरिटी वाले वीवीआईपी जोन में दुबग्गा डिपो के 4 संविदा सिटी बस परिचालकों ने मुख्यमंत्री आवास के निकट आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और गौतमपल्ली थाना पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर चारों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार सभी सुरक्षित हैं और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सामान्य है।

परिचालकों के मुताबिक दुबग्गा सिटी बस स्टेशन पर तैनात करीब 350 संविदा कर्मचारियों को प्रशासन सीधे संविदा से हटाकर एस नामक निजी कंपनी के अधीन कर रहा है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में वेतन 18,600 से घटाकर 11,000 कर दिया गया है। पिछले कई दिनों से वे अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार करीब 11 बजे मांगों पर सुनवाई न होने पर 4 परिचालक सीएम आवास की ओर बढ़े और ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया।

ITBP जवान की मां का कटा हाथ 10 दिन बाद जांच के लिए भेजा, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट खोलेगी अस्पतालों की पोल

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Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच करीब 10 दिन तक चले गतिरोध के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक जवान की मां का कटा हुआ दाहिना हाथ जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग को सौंप दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। चिकित्सकों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने में 20 दिन से एक माह तक का समय लग सकता है। जिम्मेदारी को लेकर भ्रम और बायोमेडिकल कचरा निपटान नियमों के कथित उल्लंघन के कारण कटा हुआ हाथ कई दिनों तक रेलबाजार थाने के मालखाने में रखा रहा, जिससे विवाद खड़ा हो गया।

महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में तकलीफ और हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण 13 मई को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति स्थिर हो गई लेकिन उनका दाहिना हाथ काला पड़ने लगा, जिसके बाद 17 मई को उन्हें पारस अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने गैंगरीन की आशंका जताते हुए आपात स्थिति में उनका हाथ काट दिया। विवाद तब शुरू हुआ, जब कटे हुए अंग को नष्ट करने या जांच के लिए सुरक्षित रखने के बजाय परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के हस्तक्षेप के बाद 25 मई को कृष्णा और पारस अस्पताल के खिलाफ कथित चिकित्सीय लापरवाही तथा उपचार में देरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पूर्वी क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि कटे हुए हाथ को रविवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि हिस्टोपैथोलॉजी जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. लुबना खान ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक पैथोलॉजी जांच की सुविधा नहीं है लेकिन हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए नमूना स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद संरक्षित अंग पुलिस को लौटा दिया जाएगा। पुलिस ने दोनों अस्पतालों से उपचार संबंधी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं तथा संबंधित चिकित्सकों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) हरिदत्त नेमी ने पारस अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर कटे हुए अंग को परिजनों को सौंपे जाने पर स्पष्टीकरण मांगा है। पारस अस्पताल के यूनिट प्रमुख (बिक्री एवं विपणन) नितिन सारस्वत ने बताया कि शल्यक्रिया परिजनों की लिखित सहमति और स्थापित चिकित्सा प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई थी। उन्होंने बताया कि निर्मला देवी की हालत स्थिर है और अस्पताल जांच में सहयोग कर रहा है।