यूपी बजट 2026-27 में महिलाओं को बड़ा तोहफा, ‘लखपति दीदी’ अभियान और उद्यमिता योजनाओं को बढ़ावा
UP Budget 2026-27 में महिला सशक्तिकरण को विकास के केंद्र में रखा गया है। ‘लखपति दीदी’ अभियान, महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना और उत्पाद विपणन पहल के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
‘लखपति दीदी’ अभियान को नई ऊर्जा
उत्पादों के विपणन के लिए नई पहल
UP Politics: मायावती पर आपत्तिजनक पोस्ट से मचा सियासी तूफान, लखनऊ पुलिस की कार्रवाई में श्रेया यादव फंसी
UP Politics Update: लखनऊ में बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कृष्णा नगर थाने में श्रेया यादव नामक महिला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
UP Politics Update Social Media Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और राजनीतिक दलों के बीच एक नया विवाद उभर गया है। कृष्णा नगर कोतवाली पुलिस स्टेशन में श्रेया यादव नामक एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिस पर आरोप है कि उसने फेसबुक पर मायावती के खिलाफ “आपत्तिजनक,” “अभद्र” और “अपमानजनक” भाषा का उपयोग किया था।

यह मामला सोमवार शाम आलमबाग स्थित दामोदर नगर इलाके में बसपा कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान सामने आया। कैंट विधानसभा प्रभारी देवेश कुमार गौतम के आवास पर आयोजित बैठक में बसपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता फेसबुक पर एक पोस्ट देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें श्रेया यादव नामक फेसबुक आईडी से बनाई गई एक टिप्पणी दिखाई दी, जिसमें पार्टी के मुताबिक मायावती के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा का उपयोग किया गया था।
क्या था विवादित कमेंट और क्या आपत्ति जताई गई
बैठक में मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उक्त टिप्पणी में न केवल राजनीतिक आलोचना थी, बल्कि भाषा इतनी “भद्दी” और “आपत्तिजनक” थी कि इससे बसपा सुप्रीमो आहत हुई हैं और समर्थकों की भावनाएँ भी ठेस पहुंची हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति इस प्रकार के शब्दों का उपयोग सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है तथा इससे राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता है।
बीएसपी कैंट विधानसभा अध्यक्ष गंगाराम वर्मा ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि 9 फरवरी की दोपहर लगभग 4 बजे यह कमेंट देखा गया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियाँ राजनीतिक माहौल को बिगाड़ सकती हैं और भलाई की बजाय नफरत और विभाजन फैला सकती हैं।
श्रेया यादव कौन हैं
श्रेया यादव की फेसबुक प्रोफाइल पर करीब 50,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं और वह स्वयं को समाजवादी पार्टी (SP) की सक्रिय सदस्य बताती हैं। बसपा समर्थकों का आरोप है कि एक जिम्मेदार दल की सदस्य द्वारा वरिष्ठ विपक्षी नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना अत्यंत निंदनीय है। इस बारे में उन्होंने मीडिया के सामने अपनी सफाई रखी है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच
कृष्णा नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी रूप से फेसबुक आईडी की सत्यता और कमेंट की वास्तविकता के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी अनुरोध किया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल
इस घटना ने राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर गर्मी ला दी है। BSP समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आक्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ रोकने के लिए सख्त कानूनी उदाहरण पेश किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वहीं, अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मामले पर प्रतिक्रियाएँ मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्तिगत मामले नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक गहमागहमी का विषय बन गया है।
पिछले कुछ वर्षों में मायावती पर दी गई टिप्पणियों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जहां विभिन्न दलों के नेताओं ने आलोचनात्मक बयान दिए थे और उनका असर राजनीति पर पड़ा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि मायावती जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति कही भी गई टिप्पणी न केवल राजनीति में महत्व रखती है बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राजनीतिक आचार-संहिता पर भी सवाल उठाती है।

सोशल मीडिया और राजनीतिक जिम्मेदारी
समय के साथ सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का एक मुख्य मंच बन गया है, जहां लाखों लोग अपनी राय साझा करते हैं। वहीं, इस मंच पर अभद्र या अपमानजनक टिप्पणियाँ कभी-कभी कानून की सीमा के भीतर नहीं आतीं। कानून के तहत भी धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक विभाजन फैलाने वाली टिप्पणियाँ अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं और उस पर कार्रवाई भी हो सकती है। इस मामले ने यही प्रश्न उठाया है कि क्या राजनीतिक मतभेद सोशल मीडिया पर इस हद तक बढ़ने चाहिए कि कानून को हस्तक्षेप करना पड़े।
UP Budget 2026-27: यूपी बजट पर मौर्य-शिवपाल में जुबानी जंग तेज, मायावती ने क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
UP Budget Controversy: उत्तर प्रदेश के बजट 2026-27 को लेकर सियासत तेज हो गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा नेता शिवपाल सिंह यादव के बीच सोशल मीडिया पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने बजट को लोकलुभावन बताते हुए ठोस क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया।
War of Words Erupts in UP Over Budget 2026-27 as Maurya, Shivpal Spar: उत्तर प्रदेश के बजट 2026-27 को लेकर सियासत तेज हो गई है। सदन से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) तक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर चल पड़ा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के बीच तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने भी बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को क्रियान्वयन पर ध्यान देने की सलाह दी है। राज्य का बजट, जो सामान्यतः विकास योजनाओं और वित्तीय प्रावधानों का दस्तावेज माना जाता है, इस बार राजनीतिक हमलों का प्रमुख मंच बन गया है।
मौर्य का हमला: ‘विकास का बजट, विपक्ष की साइकिल पंचर’
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बजट को “सबका साथ, सबका विकास” की सोच से तैयार बताया। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि यह बजट विकास का रोडमैप है, जिससे जनता को सीधा लाभ मिलेगा और विपक्ष की राजनीति कमजोर पड़ेगी। मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस बजट ने विपक्ष की “साइकिल पंचर” कर दी है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता विकास कार्यों से संतुष्ट है और आने वाले चुनावों में भी भाजपा को समर्थन मिलेगा। उनके अनुसार 2027 से लेकर 2047 तक प्रदेश की राजनीति में भाजपा की मजबूत भूमिका रहेगी।
शिवपाल का पलटवार: ‘जनता प्रचार नहीं, प्रदर्शन देखती है’
मौर्य के बयान के बाद सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्षी दलों की “साइकिल” की चिंता छोड़कर जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। शिवपाल ने आरोप लगाया कि बजट में बड़े-बड़े वादे किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बेरोजगारी, महंगाई और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जनता केवल घोषणाओं से प्रभावित नहीं होती, बल्कि असली काम देखती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब जनता जवाब देती है तो बड़े-बड़े सिंहासन भी पंचर हो जाते हैं। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
2022 के चुनाव और 2027 की आहट
दोनों नेताओं की बयानबाज़ी में 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों और 2027 के चुनावी परिदृश्य की झलक भी दिखाई दी। मौर्य ने 2022 की जीत को जनता के भरोसे का प्रमाण बताया, जबकि शिवपाल ने संकेत दिया कि आगामी चुनावों में जनता का फैसला अलग हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि बजट बहस के बहाने दल अपने-अपने समर्थकों को संदेश दे रहे हैं और चुनावी तैयारी की दिशा में राजनीतिक माहौल बना रहे हैं।
UP Budget 2026 LIVE : शिवपाल यादव का योगी सरकार पर हमला, बजट को बताया लूट का जरिया और भ्रष्टाचार का आरोप
UP Budget 2026 Hindi LIVE Updates: लखनऊ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक शिवपाल सिंह यादव ने योगी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बड़ा बजट विकास के बजाय लूट का जरिया बन गया है। साथ ही भाजपा पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
यूपी पंचायत चुनाव टलना तय! पहले बनेगा OBC आयोग, रैपिड सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगा आरक्षण
Uttar Pradesh Panchayat elections postponed : यूपी के पंचायत चुनाव का टलना लगभग तय हो गया है। योगी सरकार ने हाईकोर्ट में बताया कि OBC आयोग का गठन किया जाएगा, जिसके रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव में आरक्षण तय होगा।
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव के टलने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। चुनावी तैयारियों के बीच योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों पर आरक्षण तय होगा, जिसके बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही है। दरअसल, हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया था कि वर्तमान आयोग को स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि नया समर्पित आयोग गठित कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
रैपिड सर्वे के बाद तय होगा आरक्षण
सरकार ने कोर्ट को बताया कि नया आयोग पिछड़े वर्गों का ‘रैपिड सर्वे’ करेगा, जिससे उनकी वास्तविक आबादी का आकलन किया जा सके। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों का आरक्षण निर्धारित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले एक समर्पित आयोग का गठन अनिवार्य है, जिसका कार्यकाल तीन वर्ष का होना चाहिए।
जम्मू वासियों सावधान! ठगी के इस तरीके से जरा बचकर… चौंकाने वाला मामला आया सामने
आर.एस.पुरा (मुकेश): आर.एस.पुरा के वार्ड नंबर 13 में अंधविश्वास के नाम पर एक वृद्ध महिला से ठगी का मामला सामने आया है। पीड़िता की पहचान 70 वर्षीय रामप्यारी, पत्नी ताराचंद, के रूप में हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, रामप्यारी इलाज के लिए आर.एस.पुरा अस्पताल जा रही थीं। जब वह दलजीत चौक के पास पहुंचीं, तो एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें रोका और बातचीत शुरू की। महिला ने उसे बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उनके घुटनों में दर्द रहता है।
इस पर आरोपी ने कहा कि उनके घर पर किसी ने जादू-टोना कर दिया है, जिसके कारण वह बीमार रहती हैं। उसने दावा किया कि वह उन्हें ठीक कर सकता है। आरोपी के साथ एक महिला भी थी, जो रामप्यारी को हायर सेकेंडरी स्कूल, आर.एस.पुरा की ओर ले गई।
आरोपियों ने महिला से एक रुमाल और कुछ फूल लाने को कहा। साथ ही उनके कानों से सोने की बालियां उतरवाकर रुमाल में रखने को कहा। महिला उनकी बातों में आ गईं और वैसा ही किया। इसके बाद आरोपियों ने रुमाल में गांठ लगाकर महिला को दे दिया और कहा कि इसे घर जाकर खोलना।
घर पहुंचने पर जब महिला ने रुमाल खोला, तो उसमें से सोने की बालियां गायब थीं। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़िता ने पुलिस थाना आर.एस.पुरा में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
सैलून वालों सावधान! खराब हेयरकट का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, महिला को मिला ₹25 लाख का मुआवजा
नेशनल डेस्क: नई दिल्ली के एक प्रतिष्ठित होटल में हेयरकट को लेकर शुरू हुआ विवाद कई साल बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खत्म हुआ। शीर्ष अदालत ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन द्वारा दिए गए भारी मुआवजे को अत्यधिक बताते हुए कम कर दिया और अंतिम राशि 25 लाख रुपये तय की। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक महिला ने दावा किया कि उनकी इच्छा के खिलाफ बाल बहुत छोटे काट दिए गए, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी के साथ करियर से जुड़े नुकसान का सामना करना पड़ा।
सैलून विजिट से शुरू हुआ विवाद
यह घटना अप्रैल 2018 की है, जब मैनेजमेंट प्रोफेशनल और मॉडल आशना रॉय नई दिल्ली स्थित एक लक्जरी होटल के सैलून में गई थीं। उनका कहना था कि उन्होंने जिस तरह का हेयरकट चाहा था, वैसा न करते हुए स्टाइलिस्ट ने बाल काफी छोटे कर दिए। उनके अनुसार इस घटना से उन्हें मानसिक तनाव हुआ और मॉडलिंग से जुड़े अवसर भी प्रभावित हुए। इस शिकायत के बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने उन्हें भारी मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि दो बार तय की गई और हर बार लगभग 2 करोड़ रुपये देने की बात कही गई। होटल प्रबंधन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि सेवा में कमी साबित होने के बावजूद मुआवजे की राशि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए। अदालत ने पाया कि नुकसान के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेज केवल फोटोकॉपी के रूप में थे और इतने बड़े दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानसिक आघात के कारण मूल दस्तावेज खो जाने की दलील को मुआवजे का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के अनुसार उपभोक्ता विवादों में मुआवजा किसी अनुमान या भावनात्मक आधार पर तय नहीं किया जा सकता, बल्कि यह दिखाना जरूरी होता है कि वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ है।
अंतिम फैसला और संदेश
इन सभी तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की राशि घटाकर 25 लाख रुपये कर दी। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि ऐसे मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है ताकि सेवा प्रदाताओं पर अनुचित बोझ न पड़े और शिकायतकर्ता को भी उचित राहत मिल सके। यह फैसला उपभोक्ता मामलों में साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि न्यायिक प्रक्रिया में भावनाओं से ज्यादा महत्व प्रमाण और तथ्यों को दिया जाता है।
बांग्लादेश खूनी चुनाव में वोटिंग खत्म: मतगणना शुरू, असली मुकाबला BNP और जमात गठबंधन के बीच
Dhaka: बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय खूनी चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया और कई इलाकों में मतगणना शुरू कर दी गई है। यह चुनाव अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार की जगह नई सरकार चुनने के लिए कराया गया। मतदान के दौरान देश के कई हिस्सों से हिंसा की घटनाएं सामने आईं। यह चुनाव 84-सूत्रीय जटिल सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के साथ आयोजित किया गया। देश की 300 में से 299 संसदीय सीटों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मतदान हुआ। एक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार की मौत के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद के अनुसार, दोपहर 2 बजे तक करीब 48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। देशभर में 42,779 मतदान केंद्रों पर लगभग 12.7 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे।
अवामी लीग पर प्रतिबंध के कारण यह चुनाव बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने पिछले वर्ष अवामी लीग को भंग कर चुनाव लड़ने से रोक दिया था। BNP प्रमुख तारिक रहमान ने ढाका के गुलशन मॉडल स्कूल एंड कॉलेज में वोट डालने के बाद कहा कि यदि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण रहा तो उनकी पार्टी परिणाम स्वीकार करेगी। वहीं जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी निष्पक्ष चुनाव की स्थिति में नतीजे मानने की बात कही।
चुनाव के दौरान कई जगह हिंसा की घटनाएं सामने आईं। गोपालगंज में एक मतदान केंद्र पर कथित हैंड बम हमले में 13 वर्षीय लड़की समेत तीन लोग घायल हो गए। मुंशीगंज में एक अन्य मतदान केंद्र के बाहर कई हैंड बम विस्फोट हुए, जिससे करीब 15 मिनट तक वोटिंग रोकनी पड़ी। खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर BNP और जमात कार्यकर्ताओं की झड़प में BNP के एक नेता की मौत हो गई। सुरक्षा के लिए करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई जो देश के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी है। पहली बार ड्रोन और बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
राजधानी ढाका में बख्तरबंद वाहन और रैपिड एक्शन टीम भी तैनात रहीं। चुनाव की निगरानी के लिए 81 स्थानीय संगठनों के 55,000 से अधिक पर्यवेक्षक और 394 अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वर मौजूद रहे। कई जगह बैलेट स्टफिंग और वोट खरीदने के आरोप भी लगे, जिन पर पुलिस ने कुछ गिरफ्तारियां की हैं। चुनाव परिणाम 13 फरवरी को घोषित किए जाने की उम्मीद है। देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह चुनाव बांग्लादेश को राजनीतिक स्थिरता की ओर ले जा पाएगा।





