रायबरेली- 25 साल का युवक बना संन्यासी , युवक ने डेढ़ करोड़ की संपत्ति छोड़ी, युवक ने चुना संन्यासी का जीवन, करोड़ों की संपत्ति वारिस है युवक, मजराजगंज का रहने वाला है युवक
देवरिया – अवैध मजार पर बुलडोजर एक्शन मामला, तत्कालीन मजार कमेटी के सदर पर FIR, सदर शहाबुद्दीन सजक के खिलाफ FIR दर्ज, तत्कालीन नायब सदर इरशाद अहमद पर FIR , तत्कालीन नाजिम मुबारक अली पर केस दर्ज, तत्कालीन नायब नाजिर अख्तर वारसी पर केस , तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय पर केस , तत्कालीन लेखपाल रामानुज सिंह पर केस दर्ज, छेड़छाड़ कर के मजार का नाम दर्ज किया गया, सदर तहसील के लेखपाल ने दर्ज कराया मुकदमा, FIR दर्ज होने में हैरान कर देने वाली बात , तत्कालीन नाजिम मुबारक अली की हो चुकी मौत, तत्कालीन नायब नजीर अख्तर वारसी का हो चुका निधन
प्रयागराज: महाकुंभ 2025 के सबसे चर्चित शिविरों में से एक मुलायम सिंह यादव सेवा स्मृति शिविर इस बार विवादों में घिर गया है।सपा नेता संदीप यादव ने पंजाब केसरी से खास बातचीत में मेला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने इस बार शिविर में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति लगाने की अनुमति नहीं दी। जिससे शिविर की परंपरागत पहचान प्रभावित हुई है।
संदीप यादव ने बताया कि प्रशासन द्वारा कल्पवासियों को बांटे जाने वाले दूध तक को मेटल डिटेक्टर से चेक कराया जा रहा है। जिससे व्यवस्थाओं में अनावश्यक कठिनाई पैदा हो रही है। उनका आरोप है कि सपा द्वारा मेला क्षेत्र में किए जा रहे सामाजिक और सेवा कार्यों को भी प्रशासन रोक रहा है।
उन्होंने बताया कि इस बार मुलायम सिंह यादव की मूर्ति की जगह कृष्ण और राधा की मूर्ति स्थापित की गई है। सपा नेता संदीप यादव ने इसे प्रशासन की जानबूझकर की गई सियासी कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि इससे न केवल शिविर की परंपरा प्रभावित हुई है, बल्कि सामाजिक कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। आगे संदीप यादव ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल समाज सेवा और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना है, लेकिन प्रशासन की वर्तमान नीति से यह मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था, अनुमति और सुविधाओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। जिससे कल्पवासियों और शिविर कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। फिलहाल इस विवाद से यह भी स्पष्ट होता है कि महाकुंभ 2025 केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है,,,बल्कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप और सियासी जद्दोजहद भी देखने को मिल रही है।
Widow Property Rights: देश की सर्वोच्च अदालत ने विधवा महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों और आधुनिक कानून का मेल करते हुए स्पष्ट किया है कि एक विधवा बहू का अपने ससुर की संपत्ति पर भरण-पोषण (Maintenance) का कानूनी अधिकार है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने फैसले के दौरान ‘मनुस्मृति’ के नैतिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए समाज को कड़ा संदेश दिया है।
अदालत ने फैसले के दौरान प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट है कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। जो व्यक्ति समर्थ होने के बावजूद अपनों को बेसहारा छोड़ता है वह दंड का पात्र है। कोर्ट ने इसी सिद्धांत को हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के साथ जोड़कर देखा। पीठ ने कहा कि ससुर की यह नैतिक और धार्मिक जिम्मेदारी है कि वह अपने पुत्र की मृत्यु के बाद विधवा बहू का ख्याल रखे।
इस मामले में एक अजीबोगरीब कानूनी पेच फंसाया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यदि बहू ससुर के जिंदा रहते विधवा होती है, तभी उसे गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। यदि ससुर की मृत्यु के बाद पति की मौत होती है, तो बहू हकदार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा:
सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम की धारा 22 की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि मृतक व्यक्ति की संपत्ति जो भी वारिस प्राप्त करता है उस पर यह कानूनी दायित्व (Liability) है कि वह मृतक पर निर्भर व्यक्तियों (जैसे विधवा बहू) का भरण-पोषण करे। यदि विधवा बहू के पास अपनी आय का कोई साधन नहीं है या उसके मृत पति ने उसके लिए कोई संपत्ति नहीं छोड़ी है तो उसे ससुर की संपत्ति से हिस्सा मिलना अनिवार्य है।
महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि
अदालत ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कानून की संकीर्ण व्याख्या करके विधवा बहुओं को हक से वंचित किया गया तो वे गरीबी और सामाजिक हाशिए पर धकेल दी जाएंगी। यह महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए गंभीर खतरा होगा। इस फैसले से अब देशभर की उन विधवा महिलाओं को बल मिलेगा जो ससुराल में संपत्ति विवाद या उपेक्षा का सामना कर रही हैं।
यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी डॉ. रमीज के खाते में संदिग्ध खातों से लाखों के लेनदेन की बात सामने आई है। रमीज के खाते में दिल्ली, आगरा, उत्तराखंड और पीलीभीत समेत कई शहरों से रकम भेजी गई है। आरोपी का पूर्वांचल कनेक्शन भी सामने आया है। जिन खातों से रमीज को रकम भेजी गई थी, उनका ब्योरा पुलिस जुटा रही है।
मौसम में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। मंगलवार को कई जिलों में शीत लहर चली। मुजफ्फरनगर में न्यूनतम तापमान 2.1 डिग्री दर्ज किया गया। यह प्रदेश में सबसे ठंडा जिला रहा। दूसरे नंबर पर 2.9 डिग्री तापमान के साथ मेरठ रहा। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद हवा की दिशा पुनः परिवर्तित होकर उत्तरी पश्चिमी हो गई है। इससे बीते 48 घंटों के दौरान प्रदेश के ज्यादातर भागों में दिन और रात के तापमान में 2-4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी लखनऊ में इस सीजन का सबसे कम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया।
यूपी कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के बड़े घोटाले का राजफाश हुआ है। स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल, अजय कुमार और सुशील कुमार, कैशियर पवन कुमार के अलावा खाताधारक शामिल हैं।स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऋण वितरण से पहले न तो आवेदकों की पात्रता की जांच की गई और न ही आय प्रमाणपत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन हुआ। कई मामलों में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों के आधार पर ऋण स्वीकृत कर दिए गए। शाखा स्तर पर बैंक नीति और आरबीआई के दिशानिर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।