Sunday, February 15, 2026

UP: गोंडा के यूपी कोऑपरेटिव बैंक में 21 करोड़ रुपये का घोटाला, 16 पर रिपोर्ट दर्ज

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यूपी कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के बड़े घोटाले का राजफाश हुआ है। स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल, अजय कुमार और सुशील कुमार, कैशियर पवन कुमार के अलावा खाताधारक शामिल हैं।स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऋण वितरण से पहले न तो आवेदकों की पात्रता की जांच की गई और न ही आय प्रमाणपत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन हुआ। कई मामलों में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों के आधार पर ऋण स्वीकृत कर दिए गए। शाखा स्तर पर बैंक नीति और आरबीआई के दिशानिर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

2021 से जून 2025 के बीच का मामला, शाखा प्रबंधकों ने अपने घर वालों के खातों में भेजी राशि
जांच में यह भी उजागर हुआ कि तत्कालीन शाखा प्रबंधकों ने स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के खातों का भी प्रयोग किया। ऋण वितरण के नाम पर निकाली गई धनराशि को माता, पत्नी और पुत्र के खातों में भेजा गया। यह गड़बड़ी दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच विभिन्न चरणों में हुईं। इस अवधि में अलग-अलग समय पर तैनात रहे शाखा प्रबंधकों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में पाई गई है। 

ऋण खाते में नौ की जगह 31 लाख दर्शाने में फंसे तत्कालीन प्रबंधक

कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा में सामने आ रहे घोटालों की कड़ी में एक और गंभीर मामला उजागर हुआ है। एक खाताधारक ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और उनके सहयोगियों पर कूटरचना, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। न्यायालय के आदेश से कोतवाली नगर में एफआईआर दर्ज की गई है।

एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता शिवेंद्र द्विवेदी निवासी बहराइच रोड ने बताया कि उन्होंने यूपी कोऑपरेटिव बैंक गोंडा शाखा से मात्र नौ लाख रुपये का होम लोन लिया था। वे नियमित रूप से ऋण की किश्तें भी जमा करते रहे, लेकिन जब कुछ समय बाद उन्होंने अपने ऋण खाते का विवरण निकलवाया, तो वे यह देखकर स्तब्ध रह गए कि उनके खाते में 31 लाख रुपये का ऋण बकाया दर्शाया जा रहा है।

आरोप है कि जब उन्होंने इस भारी अंतर को लेकर बैंक अधिकारियों से आपत्ति दर्ज कराई तो पहले इसे तकनीकी गलती चताते हुए सुधार का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में कथित रूप से बैंक का रवैया बदल गया। शिवेंद्र ने आरोप लगाया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह और उनके सहयोगियों ने जान-बूझकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर ऋण खाते में अतिरिक्त राशि जोड़ दी। आरोप है कि शिकायत करने पर धमकी भी दी गई।

शिवेंद्र द्विवेदी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत पहले पुलिस से की थी, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर ली गबन की रकम

घोटाले की जांच में पाया गया कि बैंक के पांच आंतरिक खातों से अवैध रूप से 46.13 लाख रुपये डेबिट करके विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए गए और बाद में इस धनराशि को निकालकर गबन कर लिया गया। साथ ही खाताधारकों की 2,101.65 लाख रुपये की धनराशि को विभिन्न बैंकिंग चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित कर दुरुपयोग किया गया। इस प्रकार कुल 2147.78 लाख रुपये, यानी 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के गबन की पुष्टि ऑडिट रिपोर्ट में हुई है।

उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के सहायक महाप्रबंधक भुवनचंद्र सती ने एसपी को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। इसके आधार पर नगर कोतवाली में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सहायक/कैशियर सहित 16 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना, विश्वासघात और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई

इनके खिलाफ हुई कार्रवाई
तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल, अजय कुमार, सुशील गौतम, कैशियर पवन कुमार के अलावा खाताधारक सुमित्रा पाल, संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघव राम, शिवाकांत वर्मा, रितेंद्र पाल सिंह, गीता देवी वर्मा, दुष्यन्त प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह।

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