अयोध्या के रामकुमार गुप्ता को मौत ने दो-दो बार चेतने का मौका दिया, लेकिन उसने सबक नहीं लिया। लिहाजा इस बार उसका पूरा परिवार स्वाहा हो गया। उसकी चिता को अग्नि देने वाला परिवार में कोई नहीं बचा तो साले ने अंतिम संस्कार किया। वहीं, नम आंखों से तीनों मासूम बच्चों को सरयू तट पर दफनाया गया। मूलरूप से बस्ती के रहने वाले लाल बहादुर लगभग पांच दशक पूर्व पूराकलंदर के पगलाभारी में रहने लगे थे। ग्रामीणों के अनुसार वह सीधे और सरल थे। लगभग छह साल पहले उनकी मौत हो गई थी। उनका इकलौता बेटा रामकुमार आटा चक्की चलाता था और आतिशबाजी का सामान बेचता था।वर्ष 2023 में दीपावली पर संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में आग लगी थी, जिसमें उसकी मां शिवपता लगभग 60 फीसदी जल गई थीं। परिवार के अन्य लोग बच गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय भी पटाखा बनाते समय हादसा हुआ था। इस घटना से उसने सबक नहीं लिया। इसके बाद 13 अप्रैल, 2024 को हुए धमाके में पूरा मकान गिर गया था। हादसे में चक्की पर आटा लेने आई गांव के रामकुमार कोरी की बेटी प्रियंका (19) की मौके पर मौत हो गई। धमाके में घायल मां शिवपता (65) की अगले दिन और छठवें दिन उसकी पत्नी बिंदु की मौत हो गई थी। इस घटना में गंभीर रूप से झुलसा रामकुमार लंबे इलाज के बाद अपने तीनों बच्चों को लेकर वापस लौटा तो अपनी रिश्तेदारी में चला गया।
Ayodhya Blast: नहीं चेता रामकुमार और स्वाहा हो गया परिवार… धरा रह गया शादी का सपना; दफनाए गए तीनों मासूम


