बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र के ज्योरी गांव में रविवार की रात खुशियों की जगह मातम पसरा नजर आया। जिस घर से दुल्हन की डोली उठनी थी वहां सन्नाटा और सिसकियों की गूंज थी। यहां राजेश की बेटी पूजा की शादी बदोसराय थाना क्षेत्र के तूलीपुर गांव निवासी सूरज पुत्र राजू से तय थी। परिवार महीनों से इस दिन की तैयारी में जुटा था लेकिन किस्मत ने ऐसी करवट ली कि शादी की दहलीज पर खड़े होकर परिवार की दुनिया ही बिखर गई।
शादी के एक दिन पहले चचेरे भाई की मौत
दरअसल, रविवार को घर में मेहमानों की चहल-पहल थी। मंडप सजा था रिश्तेदार जुटे थे और दुल्हन लाल जोड़े में सजी बैठी थी। लेकिन उसी माहौल में शोक की परछाई पहले से मंडरा रही थी। कुछ दिन पहले ही पूजा की दादी प्रेमा देवी (50) का निधन हुआ था। परिवार ने तय किया कि शादी की तारीख नहीं टाली जाएगी बस रस्में सादगी से पूरी होंगी। इसी बीच शादी के दिन ही पूजा के चचेरे भाई प्रदीप (13) की अचानक मौत हो गई।
जयमाला के बाद विवाद ने पकड़ा तूल
ग़म से भरे माहौल में भी पिता राजेश ने हिम्मत जुटाई और बारातियों से कहा कि घर में मौत हुई है आज डीजे मत बजवाना बस शांति से शादी की रस्म अदा हो जाएं। लेकिन यह विनती भी विवाद का कारण बन गई। डीजे पर गाना बजाने को लेकर कहासुनी शुरू हुई और बात इतनी बढ़ गई कि माहौल बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि इस समय तक दूल्हे दुल्हन ने एक दूसरे को जयमाला पहना दिया था और जयमाला की सारी रस्म अदा हो गई थी, जयमाला के बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया और बारात बिना विवाह संपन्न किए ही लौट गई।
सदमे में पूरा परिवार
घटना के बाद पिता राजेश का दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से रिश्ता तय हुआ था बेटी की मुस्कान देखने की तमन्ना थी पर अब सब खत्म हो गया। दहेज का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि परिवार पहले से ही सदमे में था, मां का साया बचपन में ही बेटी के सर से छिन गया, फिर दादी और चचेरे भाई की मौत ने परिवार को तोड़ दिया। अब बेटी की शादी टूटने के बाद पूरा परिवार गहरे दुख में डूब गया है।
घटना से रिश्तेदारों और ग्रामीणों की आंखें हुई नम
दुल्हन की चाची ने बताया की बारात आई थी बढ़िया जयमाला हो गया उसके बाद डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ और बारात लौट गई। घर में मातम और बारात लौटने से भाई संदीप और संजू का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की आंखें भी नम हैं। हर कोई कह रहा है कि अगर थोड़ी संवेदना दिखाई जाती तो एक लड़की की ज़िंदगी उजड़ने से बच सकती थी।


