Saturday, February 14, 2026

Auraiya News: रील की लत बच्चों व महिलाओं को कर रही बीमार

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औरैया। सोशल मीडिया अब जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। वहीं, मोबाइल पर रील की लत बच्चों और महिलाओं के लिए परेशानी बनती जा रही है।इससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति में गिरावट आ रही है। याद रखने की क्षमता भी कमजोर हो रही है। स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ने से ऐसे लोग मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चिचौली के मनोरोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों रोजाना पांच से सात लोग ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें चिड़चिड़ापन, गुस्सा और मनोदशा को लेकर समस्या बढ़ रही है। इनमें सोचने-समझने का स्तर सामान्य से काफी कम पाया जा है। मनोरोग चिकित्सक के सवाल जवाब में मरीजों की मनोदशा उभरकर सामने आ रही है। खास बात तो यह है कि इन मरीजों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी आयु छह से 12 साल के बीच है।मनोचिकित्सक डॉ. अनामिका राजपूत बताती हैं कि अधिकांश मामलों में कारण मोबाइल की बढ़ती लत है। घंटों रील देखने से छोटे बच्चों में यह समस्या चिड़चिड़ेपन के तौर पर सामने देखी जा रही है। अक्सर बच्चे के रोने या परेशान करने पर अभिभावक उसे मोबाइल देकर बैठा देते हैं। महिलाएं खुद भी मोबाइल पर रील देखना और बनाना बहुत पसंद कर रही हैं। ऐसे में उनकी सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित हो रही है। महिलाओं में सिरदर्द की समस्या भी सामने आ रही है। नवंबर से अब तक करीब 130 ऐसे मरीज मानसिक रोग विभाग में पहुंचे।

डॉक्टर ने बताया कि ऐसे में लोगों की काउंसलिंग कर मोबाइल से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। साथ ही बच्चों के साथ अभिभावकों को अधिक समय बिताने के लिए कहा जा रहा है।

अभिभावक ये कर सकते हैं

– मोबाइल का सीमित प्रयोग करें और बच्चों को भी सचेत करते रहें।
– तीन साल की उम्र के बाद बच्चे को सिर्फ एक घंटे ही टीवी देखने दें।

-खाना खिलाते या दूध पिलाते समय बच्चे से बात करें, मोबाइल से दूर रखें।

– खाना खाते समय अभिभावक भी टीवी व मोबाइल न देखें।

– बच्चों के सामने मोबाइल का प्रयोग करने से बचें।

जिद्दीपन की प्रवृति बढ़ रही
मोबाइल का ज्यादा प्रयोग हमें मानसिक तौर पर कमजोर बनाता है। मोबाइल की वजह से बच्चों में कई समस्याएं बढ़ गई हैं। लोगों में सोचने व समझने की शक्ति कमजोर पाई जाती है। झगड़ा और जिद्दीपन की प्रवृति भी देखने को मिल रही है। ऐसे बच्चों-महिलाआें व अभिभावकों को काउंसलिंग की जरूरत है। मरीजों को उपचार के साथ ही रील की लत दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
-डॉ. अनामिका राजपूत, मनोचिकित्सक

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