पूनम 29 जनवरी की शाम परिवार के लिए भोजन पका रही थीं। उनकी पांच वर्ष की बेटी अनुष्का जिद कर रही थी कि तेज भूख लग रही है। जल्दी कुछ खाने को दो। पूनम का पूरा ध्यान भोजन पकाने पर था। इसी बीच टटिया तोड़कर घर में तेंदुआ घुस आया। अनुष्का की गर्दन जबड़े में दबाई और ले भागा। शोर मचाकर लोगों को बुलाने तक का मौका मां को नहीं मिला। जिस बेटी को निवाले का इंतजार था, वो खुद तेंदुए का निवाला बन गई।यह एक गांव या एक परिवार का दर्द नहीं है। बहराइच में कतर्निया के जंगलों के किनारे बसे कई गांवों और मांओं की पीड़ा है। ऊपर सुनाई गई व्यथा बहराइच के गांव रम्पुरवा की है। पूनम सदमे में हैं। न कुछ बोल पा रही हैं और न खाना खा पा रही हैं। हम जब उन तक पहुंचे तो पूनम की मां बिजली देवी ने घटना का पूरा ब्योरा दिया। इस क्षेत्र में पिछले 10-12 दिनों में ही तेंदुओं के हमलों में तीन बच्चों की मौत हुई है।
जंगल बनाम गांव की जंग: न दिन में चैन, न रात को नींद… सामने ही निवाला बन रहे दिल के टुकड़े, ग्राउंड रिपोर्ट


