UP Desk : एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के बावजूद इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर यूज़र्स की प्राइवेसी कई बार उनकी अपनी छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण खतरे में पड़ जाती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हाई-टेक हैकिंग से ज्यादा रोजमर्रा की गलतियां निजी चैट, बैंक ओटीपी और संवेदनशील जानकारी के लीक होने का कारण बनती हैं।
WhatsApp Web: लॉगआउट न करना बड़ा जोखिम
ऑफिस, लैपटॉप या साइबर कैफे में WhatsApp Web का उपयोग करने के बाद लॉगआउट भूल जाना आम है। ऐसे में सिस्टम पर बाद में बैठने वाला कोई भी व्यक्ति चैट एक्सेस कर सकता है।
क्या करें:
फोन में Settings > Linked Devices पर जाकर समय-समय पर जुड़े डिवाइस की जांच करें। संदिग्ध या पुराने डिवाइस को तुरंत Logout करें।
अनलॉक फोन और ‘Chat Lock’ की अनदेखी
फोन को अनलॉक छोड़ देना या किसी को बिना निगरानी के दे देना प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है। यदि ‘Chat Lock’ फीचर सक्रिय नहीं है, तो चैट हिस्ट्री आसानी से देखी जा सकती है।
क्या करें:
संवेदनशील चैट पर लंबा प्रेस कर Chat Lock सक्षम करें, ताकि बायोमेट्रिक/पासकोड के बिना चैट न खुले।
क्लाउड बैकअप की सुरक्षा में चूक
कई यूज़र्स चैट बैकअप को Google Drive या iCloud पर रखते हैं, लेकिन जुड़े ईमेल अकाउंट की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। ईमेल अकाउंट से छेड़छाड़ होने पर बैकअप डेटा भी जोखिम में पड़ सकता है।
क्या करें:
ईमेल अकाउंट पर Two-Step Verification (2FA) अनिवार्य रूप से ऑन रखें और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
लॉक स्क्रीन नोटिफिकेशन से लीक होती जानकारी
लॉक स्क्रीन पर मैसेज का पूरा प्रीव्यू दिखाई देना भी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा है। आसपास मौजूद व्यक्ति बिना फोन अनलॉक किए मैसेज पढ़ सकता है, जिससे ओटीपी चोरी की आशंका बढ़ जाती है।
क्या करें:
फोन की Notification Settings में जाकर Show Preview बंद करें, ताकि लॉक स्क्रीन पर केवल ऐप/सेंडर का नाम दिखे।
विशेषज्ञों की सलाह
साइबर सुरक्षा के लिए केवल एन्क्रिप्शन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। डिवाइस सुरक्षा, अकाउंट वेरिफिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग्स की नियमित जांच जरूरी है। छोटी सावधानियां आपकी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बना सकती हैं।


