नेशनल डेस्क: साउथ दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में बुधवार को ‘फ्लोरिश स्टे’ बेड-एंड-ब्रेकफ़ास्ट में आग लगने से एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत हो गई। गुरुग्राम के सेक्टर 46 के रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल अपने पिता से मिलने दिल्ली आए थे। उनके पिता इस समय दिल्ली के मैक्स अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी तरजनी अग्रवाल, दो बेटियां – जिविशा और वार्या – और चार अन्य रिश्तेदार भी आए थे।
विवेक ने ‘फ्लोरिश स्टे’ बेड-एंड-ब्रेकफ़ास्ट में दो कमरे बुक किए थे, जहां यह आग लगी, तब यह पूरा ग्रुप होटल के रेस्टोरेंट में नाश्ता कर रहा था। आग की चपेट में आने से इन सभी 7 लोगों की मौत हो गई। परिवार के 7 सदस्यों की मौत के बाद, अब इस परिवार में केवल विवेक के 80 वर्षीय पिता, राधे श्याम अग्रवाल ही जीवित बचे हैं।
पड़ोसियों के अनुसार, इस दुखद घटना में जान गंवाने वालों में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल, बेटिया एंजल अग्रवाल और पर्ल अग्रवाल, मामा अशोक गोयल और मामी कमला गोयल शामिल हैं। एक चाचा अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि चाचा किशनगंज से आए थे, जबकि मामा और मामी अजमेर से आए थे।
दिन में बाद में परिवार के अन्य सदस्य शवों को लेने के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि शवों को तभी सौंपा जाएगा, जब उनके DNA सैंपल ले लिए जाएंगे। उधर गुरुग्राम में, सेक्टर 46 स्थित परिवार का घर बुधवार को पूरी तरह से खाली पड़ा रहा। इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

दिल्ली के होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत
आग सुबह करीब 8:30 बजे लगी और पांच मंजिला इस संकरी इमारत में तेजी से फैल गई। इस घटना में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक भी शामिल थे, इसके अलावा दर्जनों अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि जब आग लगी, उस समय होटल में करीब 40 मेहमान मौजूद थे, जिनमें से ज़्यादातर लोग सो रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता (एंट्री और एग्जिट पॉइंट) था। खिड़कियां स्थायी रूप से बंद (सील्ड) थीं, और मुख्य दरवाज़ा सेंसर से संचालित होता था। एक बार आग फैलने के बाद, मेहमानों के पास बाहर निकलने के बहुत ही सीमित विकल्प बचे थे।
इस होटल को दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट’ योजना के तहत लाइसेंस दिया गया था। इस योजना के तहत किसी भी प्रॉपर्टी में छह से ज़्यादा कमरे संचालित करने की अनुमति नहीं होती है। जिस समय आग लगी, उस समय ‘फ्लोरिश स्टे’ में 25 कमरे संचालित हो रहे थे, जिनमें से कुछ कमरे बेसमेंट में भी बने हुए थे।


