नेशनल डेस्कः ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की आग ने एक निर्दोष भारतीय की जान ले ली है, जिससे मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में कोहराम मच गया है। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर हुए भीषण ड्रोन हमले में नागदा निवासी 55 वर्षीय मंजूर अहमद की दर्दनाक मौत हो गई। मंजूर अहमद पिछले 30 सालों से अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए कुवैत में दर्जी का काम कर रहे थे और एक लंबे अरसे के बाद खुशी-खुशी घर लौट रहे थे।
मंजूर अहमद बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे कुवैत से मुंबई के लिए उड़ान भरने वाले थे, जहां से उन्हें ट्रेन द्वारा अपने गृह नगर पहुंचना था। उनके परिवार ने उनके स्वागत की भव्य तैयारियां कर रखी थीं और रेलवे स्टेशन पर फूल-मालाओं के साथ उनका इंतजार करने की योजना बनाई थी। मंजूर 8 जून को पड़ोसी जिले रतलाम में होने वाली अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए आ रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी मौत की खबर मिलते ही शादी वाले घर की खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं।
बेटे से हुई आखिरी बात, फिर मिली मौत की खबर
मंजूर के 18 वर्षीय बेटे अनस अहमद ने रुंधे गले से बताया कि मंगलवार को ही उनकी पिता से बात हुई थी, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। कुवैती सेना और गृह मंत्रालय के अनुसार, टर्मिनल-1 को कई ड्रोनों से निशाना बनाया गया, जिसमें मंजूर अहमद की जान चली गई और कई अन्य कर्मचारी व यात्री घायल हो गए।
प्रशासन और दूतावास हुआ सक्रिय
उज्जैन के जिलाधिकारी रौशन सिंह ने पुष्टि की है कि मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर विमान से अहमदाबाद लाया जाएगा और वहां से सड़क मार्ग द्वारा उज्जैन के नागदा पहुंचाया जाएगा। वहीं, कुवैत में भारत की राजदूत परमिता त्रिपाठी ने केंद्रीय शवगृह का दौरा किया और घायल भारतीयों से अस्पतालों में मुलाकात कर उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। भारतीय दूतावास लगातार कुवैती अधिकारियों के संपर्क में है ताकि पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजा जा सके।
क्षेत्रीय तनाव की भेंट चढ़ी मासूम जान
यह दुखद घटना ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का परिणाम बताई जा रही है। कुवैत के रक्षा और गृह मंत्रालय ने इस हमले में मृत भारतीय नागरिक के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। फिलहाल, पूरे नागदा क्षेत्र में शोक की लहर है और हर कोई मंजूर अहमद के बेसहारा हुए परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति जता रहा है।


