Saturday, June 6, 2026

‘कब्रिस्तान बना आशियाना’: जीना मुश्किल था उनके बिना, कब्रों के बीच थमीं सांसें, बोले थे- फातिहा पढ़ आता हूं, और

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जब तक रजिया जीवित थी। सुभान अहमद को अपने पैरों पर खड़े होने और चलने के लिए पत्नी के सहारे की जरूरत थी लेकिन 11 दिन पहले जब पत्नी व बेटे की मौत हुई तो सुभान बिना किसी मदद के खड़े होने लगे और अकेले ही चलकर उनकी कब्र पर पहुंच रहे थे। पत्नी व बेटे को खोने के गम में वह टूटे हुए थे।

चुपचाप कब्रिस्तान की ओर निकल जाते थे
उनको उठाने-बैठाने, नहलाने व अन्य कार्यों में पत्नी मदद करती थी। बच्चे भी उनकी मदद के लिए रहते थे। बिना मदद सुभान कहीं आते-जाते नहीं थे, लेकिन जब से पत्नी व बेटे का साथ छूटा था] तो वह बिना किसी मदद के खड़े होने लगे थे और चुपचाप कब्रिस्तान की ओर निकल जाते थे।

शव पत्नी व बेटे की कब्र के बीच में मिला
पत्नी व बेटे के गम में डूबे सुभान को देखकर कोई कुछ नहीं कहता था। शुक्रवार की सुबह चार बजे जब वह निकले तो परिजनों ने कुछ नहीं बोला। उन्हें यकीन था कि एक-दो घंटे में वह रोजाना की तरह लौट आएंगे] लेकिन घंटों बीत जाने के बाद तलाश करने पर उनका शव पत्नी व बेटे की कब्र के बीच में मिला। 11 दिन के अंदर सैफ, रोशनी व आलिया अनाथ हो गए हैं।

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