औरैया में अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति ने किसानों के लिए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि विषय पर दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण का शुभारंभ समिति की सचिव रीना पाण्डेय ने प्रतिभागियों का स्वागत कर किया।
प्रशिक्षण में कानपुर से आए संदर्भ व्यक्ति जितेंद्र कुमार ने किसानों से परिचय प्राप्त किया और खेती से जुड़ी उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं तथा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेती को केवल उत्पादन के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति, संसाधन, लागत और आय के बीच संतुलन के रूप में देखा जाना चाहिए।
जितेंद्र कुमार ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि धरती, जल, जंगल, हवा, सूर्य का प्रकाश और बारिश जैसे संसाधन प्रकृति से हमें पहले से प्राप्त हैं, और किसान का मुख्य योगदान उसकी बुद्धि और श्रम है।

उन्होंने किसानों को खेती की लागत कम करने और आमदनी बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। इस दौरान रासायनिक खाद और बाहरी इनपुट पर निर्भरता से मिट्टी के स्वास्थ्य, खेती की लागत और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर भी चर्चा हुई। किसानों को स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण में फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने के विभिन्न उपाय बताए गए। उदाहरण के तौर पर, गन्ने से रस व गुड़ तैयार कर उसमें सोंठ, मूंगफली और मोरिंगा जैसे फ्लेवर जोड़कर उत्पाद का मूल्य बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके लिए गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ से प्रशिक्षण प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई।
किसानों को परवल, सेम, हल्दी, सूरन, सब्जियां और पपीते जैसी फसलें खेत की मेड़ या छोटे क्षेत्रों में लगाकर अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीके भी सिखाए गए। प्रशिक्षक ने कहा कि “मोटिवेशन नहीं, ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी है” और खेती में वास्तविक बदलाव छोटे-छोटे प्रयोगों तथा उनके परिणामों से ही आएगा। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को लागत घटाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों से जोड़ना है।


