Wednesday, August 12, 2026

पुतिन ने फिर जताया भारत पर भरोसा: पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ को सौंपी यूक्रेन विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी

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Moscow: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ अब एक बेहद अहम अंतरराष्ट्रीय विवाद में बड़ी कानूनी भूमिका निभाने जा रहे हैं। रूस ने भारत की दक्षता पर भरोसा जताते हुए उन्हें यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशाडबैंक के साथ चल रहे निवेश संधि विवाद में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है। मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल करेगा। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रचूड़ इससे पहले रूस से जुड़े कुछ मध्यस्थता प्रस्तावों को ठुकरा चुके थे।

 

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशाडबैंक और रूस के बीच है। मामला उस निवेश संधि से जुड़ा है जिसके तहत यूक्रेनी निवेशकों के रूस के खिलाफ दावे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में लाए गए हैं।  ओशाडबैंक का दावा है कि रूस के 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण सैन्य आक्रमण के बाद डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों ोऔर कारोबार को भारी नुकसान हुआ। बैंक ने इसी नुकसान के लिए रूस से मुआवजे की मांग की है। ओशाडबैंक और रूस से जुड़े निवेश विवाद का अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में पुराना इतिहास भी है। पहले के एक मामले में ओशाडबैंक को रूस के खिलाफ करीब एक अरब डॉलर का अवॉर्ड मिल चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए मामले के लिए तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल बनाया गया ह जिसमें डीवाई चंद्रचूड़ रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ, स्टावरोस ब्रेकौलाकिस  ओशाडबैंक की ओर से नियुक्त मध्यस्थ व ड्याला जिमेनेज  ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष को शामिल किया गया है।

पहले रूस का प्रस्ताव ठुकरा चुके  चंद्रचूड़
इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि रूस पहले भी जस्टिस चंद्रचूड़ से जुड़ी मध्यस्थता भूमिकाओं के लिए संपर्क कर चुका है। 2025 में उन्हें रूस के खिलाफ Wintershall Dea की निवेश मध्यस्थता में नियुक्ति प्राधिकारी की भूमिका दी गई थी। इस भूमिका में उनका काम ट्रिब्यूनल के गठन से जुड़े प्रक्रियात्मक मामलों में था। बाद में रूस की ओर से उन्हें मध्यस्थ बनाए जाने का प्रस्ताव भी आया था, जिसे उन्होंने उस समय स्वीकार नहीं किया था। अब ओशाडबैंक मामले में रूस की ओर से उनकी नियुक्ति सामने आई है।  रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। यूक्रेनी कंपनियों और निवेशकों ने रूस के खिलाफ अपनी संपत्तियों के नुकसान और कथित जब्ती को लेकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रियाएं शुरू की हैं। ओशाडबैंक भी ऐसे ही मामलों में शामिल रहा है। पुराने मामलों में अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल रूस को निवेश संधि के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं और कुछ मामलों में मुआवजे से जुड़े फैसले भी दिए गए हैं।

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