यूपी में सरकारी दवा और उपकरण सप्लाई में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच शुरू हो गई है।
प्रवर्तन निदेशालय ने यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से सात साल के रिकॉर्ड मांगे हैं। दस्तावेज पर ‘अति आवश्यक’ लिखा होने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सप्लाइज कॉर्पोरेशन ने अभी तक रिकॉर्ड नहीं दिया है, बल्कि प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) से इसके लिए अनुमति मांगी है। ईडी अफसरों का आरोप है कि विभाग जानबूझकर जानकारी देने में देरी कर रहा है ताकि सबूत मिटाए जा सकें।इस मामले में प्रदेश के तीन जिलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें मुख्य आरोपी कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव को बनाया गया है। आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों जैसे आरपी ग्रुप के नाम पर फर्जी-बेनामी फर्म और निर्माण कंपनियां बनाईं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिना वैध टेंडर के करोड़ों रुपये के ठेके हासिल किए।


