औरैया। अक्तूबर माह में लगातार संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलेगा। गांव-गांव सफाई के साथ फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव कराया जाएगा, लेकिन कूड़ा निस्तारण की कवायद महज कागजों तक सीमित है। जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) पर ताले जड़े हैं। गांवों में न तो कूड़े का उठान और न ही उसका निस्तारण हो रहा है। गलियों में गंदगी बजबजा रही है। ऐसे में संचारी रोग नियंत्रण अभियान की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वर्ष 2023 में गांवों में कूड़ा निस्तारण की मुहिम शुरू हुई थी, जो अब ठंडे बस्ते में है। जिले की कुल 477 ग्राम पंचायतों में जमीन तलाशने के बाद करीब 470 पंचायतों में आरआर सेंटरों का स्ट्रक्चर तैयार कराया जा चुका है। इन सेंटरों पर 32 मीट्रिक टन कूड़ा डंप होना था, लेकिन निस्तारण की व्यवस्था न होने से गांवों में गंदगी बढ़ती जा रही है। सेंटरों के निर्माण पर 12.69 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों को स्वच्छ बनाने की कोशिश अधिकारियों की मेजों के बीच ही घूम रही है।एरवाकटरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामपुर खास में आरआरसी की टिनशेड गिर चुकी है। वहीं, जगतपुर में तीन साल पहले बनाया गया सेंटर जर्जर होने की कगार पर है। देखरेख के अभाव में ज्यादातर सेंटर बदहाल हैं। बिधूना ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में तो सेंटर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।पंचायत स्तर से कूड़ा उठाने के लिए दो-दो लाख रुपये से वाहन भी खरीदे गए थे, लेकिन ये वाहन भी अब जंग खा रहे हैं। इसके पीछे सरकार की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिए जरूरी फंड उपलब्ध न करा पाना बताया जा रहा है। इसमें कूड़ा कलेक्शन करने वाले कर्मचारियों के वेतन की व्यवस्था भी शामिल है। वहीं, कूड़ा निस्तारण के बाद पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए होने वाली मॉनीटरिंग भी नहीं हो रही है।
Auraiya News: 12.69 करोड़ साफ, कूड़ा जस का तस, जंग खाने लगे वाहन


