अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं की कीमत को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल परिसर या भर्ती मरीजों के लिए संचालित फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवाओं की खरीद और मरीज को बिक्री कीमत की जानकारी देनी होगी। मरीज या उनके परिजन क्यूआर कोड स्कैन कर यह जानकारी मोबाइल पर देख सकेंगे।अस्पताल फार्मेसियों को वेबसाइट पर दवा के निर्माता, ब्रांड, जेनरिक नाम, प्राइस टू रिटेल (पीटीआर) और प्राइस टू कंज्यूमर (पीटीसी) बताना होगा। पीटीआर वह कीमत है जिस पर फार्मेसी ने निर्माता या मार्केटर से दवा खरीदी है, जबकि पीटीसी वह कीमत है जिस पर मरीज को दवा दी जा रही है। यह व्यवस्था दवाओं के साथ मेडिकल डिवाइस और न्यूट्रास्युटिकल्स पर भी लागू होगी।
हर रिटेल फार्मेसी को बनानी होगी वेबसाइट
एफएसडीए के निर्देश के मुताबिक सभी रिटेल फार्मेसियों को पब्लिक वेबसाइट बनानी होगी। इसमें फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और परिसर का पता देना होगा। फार्मेसी या अस्पताल के फार्मासिस्ट का नाम, पंजीकरण नंबर और फोटो भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना होगा। स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपडेट करनी होगी। वेबसाइट का यूआरएल और क्यूआर कोड फार्मेसी काउंटर पर प्रमुखता से लगाना होगा।
इसलिए व्यवस्था बदलने की कवायदएफएसडीए की हालिया जांच में अस्पतालों की 214 फार्मेसियों से मिले आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। इनमें 36 दवाओं की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से ज्यादा थी। कुछ मामलों में अंतर 67 गुना तक मिला। मसलन, पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन की खरीद कीमत 74.09 रुपये और एमआरपी 4,980.94 रुपये मिली।
विभाग के मुताबिक, कई मामलों में निर्माता, मार्केटिंग फर्म और स्टॉकिस्ट अस्पतालों को एमआरपी से काफी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन मरीजों तक इस छूट का पूरा लाभ पहुंचने पर सवाल उठे। इसी वजह से खरीद और बिक्री कीमत सार्वजनिक करने की व्यवस्था की जा रही है।


