Saturday, October 10, 2026

‘अगर स्वास्थ्य सचिव ने दिए थे आरजी कर में मरम्मत के आदेश तो पद से हटा देंगे’, सबूत मिटाने के आरोपों पर शुभेंदु सख्त

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर इस बात के सबूत मिलते हैं कि स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार रूम से सटे टॉयलेट की मरम्मत या तोड़-फोड़ करने का आदेश दिया था, तो सरकार उन्हें फौरन पद से हटा देगी।

दरअसल, पूरा मामला यह है कि इसी सेमिनार रूम में 9 अगस्त 2024 को एक 31 वर्षीय महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की वारदात हुई थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी भयानक घटना के ठीक अगले ही दिन वहां गुपचुप तरीके से मरम्मत का काम शुरू करवा दिया गया था।जिससे लोगों और पीड़िता के परिवार में यह गंभीर शक पैदा हो गया कि कहीं इसके पीछे केस के अहम सबूतों को मिटाने या उनके साथ छेड़छाड़ करने की कोई गहरी साजिश तो नहीं थी। अब मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

पीड़िता की मां से बातचीत के बाद फैसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमारत के रख-रखाव का काम पीडब्ल्यूडी संभालता है। पीड़िता की मां और स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत के बाद इस बात की जांच की जाएगी कि क्या तत्कालीन और वर्तमान स्वास्थ्य सचिव ने मरम्मत का आदेश दिया था। यदि ऐसा पाया गया, तो उन्हें बदला जाएगा।

शुभेंदु अधिकारी आरजी कर अस्पताल में एबीवीपी के मेडिकल स्टूडेंट सेल मीडीविजन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। इस दौरान मंच पर पीड़िता की मां और पानीहाटी की विधायक रत्ना देबनाथ भी मौजूद थीं।

ममता पर हमला बोला

घटना को बेहद दर्दनाक, बर्बर और शर्मनाक बताते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी भाजपा सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों विनीत गोयल, इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को निलंबित कर दिया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य अधिकारियों और डॉक्टरों पर मुकदमा चलाने की फाइल पिछली मुख्यमंत्री के पास ढाई साल से लंबित थी, लेकिन उन्होंने पद संभालते ही एक दिन के भीतर इसके लिए आवश्यक अनापत्ति पत्र जारी कर दिया।

तोड़फोड़ का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि 14 अगस्त 2024 की रात तत्कालीन स्थानीय विधायक के समर्थन से उपद्रवियों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की थी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री का मौन समर्थन प्राप्त था।

वर्तमान में इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार कानूनी और संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर पीड़िता को न्याय दिलाएगी।

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