Thursday, February 12, 2026

राजधानी लखनऊ पड़ताल में खुलासा : निजी एंबुलेंस वसूल रहीं फ्लाइट से महंगा किराया, मरीजों की दलाली का चल रहा सिंडिकेट

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राजधानी लखनऊ में निजी एंबुलेंस की सेवा हवाई जहाज से कम नहीं। सुविधाएं भले हवाई जहाज की न हों, किराया उससे भी ज्यादा है। लखनऊ से दिल्ली तक लगभग 550 किमी दूरी के लिए भले ही आपको आठ से 10 हजार रुपये में रिटर्न टिकट मिल जाएगा। इसी दूरी के लिए निजी एंबुलेंस को 14 से 22 हजार रुपये देने होंगे। साधारण से लेकर लाइफ सपोर्ट सुविधाओं वाली एंबुलेंस में ये रेट अलग-अलग हो सकते हैं।आपको शायद इस बात पर आसानी से यकीन न हो, लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में ये स्याह सच सामने आया है। मंगलवार को तीन सरकारी अस्पतालों के बाहर मौजूद निजी एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए रेट की बात की गई, जिसकी दास्तां हूबहू है।

निजी एंबुलेंस चालक चला रहे सिंडिकेट
सूत्र बताते हैं कि निजी एंबुलेंस चालकों ने मरीजों की दलाली का सिंडिकेट बना रखा है। सरकारी अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराने में इनकी सबसे अहम भूमिका होती है। इसके बदले निजी अस्पताल इन्हें मोटा कमीशन देते हैं। ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग यह सिंडिकेट तोड़ नहीं पा रहा है। अहम बात यह है कि जिम्मेदार सरकारी अस्पतालों के बाहर से इन निजी एंबुलेंसों को हटा भी नहीं पाते हैं।

कोविड के दौरान तय हुए थे रेट
कोविड के दौरान एंबुलेंसों की मनमानी बढ़ गई थी। उस दौर में ऑक्सीजन सिलेंडर का रेट बहुत अधिक था। तब स्वास्थ्य विभाग ने रेट का खाका तैयार किया था। जिलाधिकारी ने रेट पर मुहर लगाई थी। 10 किमी दायरे में एंबुलेंस के लिए 500 रुपये रेट तय हुआ था। कोविड के बाद से दोबारा एंबुलेंस के रेट तय नहीं किए गए। इसका फायदा निजी एंबुलेंस चालक उठा रहे हैं। 

रिपोर्टर की पड़ताल में सामने आया सच

स्थान : डफरिन अस्पताल का गेट
रिपोर्टर: एक बच्चे को एरा मेडिकल कॉलेज ले चलना है
चालक : एंबुलेंस ऑक्सीजन या बिना ऑक्सीजन चाहिए?
रिपोर्टर : भाई, बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।
चालक: ठीक है, बताओ कहां पर
लगानी है एंबुलेंस ?
रिपोर्टर : डफरिन गेट पर एंबुलेंस लेकर चलना होगा, वैसे कितना किराया लोगे? चालक : भैया, 1250 रुपये पड़ेगा। रिपोर्टर: एरा यहां से 8-10 किमी से ज्यादा दूर नहीं है।
चालक : बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है, लोकल में इतना ही किराया लगता है। रिपोर्टर: ठीक है। अभी रहने दो… बाद में आता हूं।

स्थान : बलरामपुर अस्पताल का गेट
रिपोर्टर : भाई, अंदर एक मरीज है, उसे सीतापुर ले चलना है।
चालक: सीतापुर में कहां पर जाना है?
रिपोर्टर : सीतापुर बस स्टैंड के पास मरीज को लेकर जाना है।
चालक : मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत तो नहीं है?
रिपोर्टर नहीं… ऑक्सीजन की जरूरत
नहीं है।
चालक: चार हजार रुपये लगेंगे। उधर से खाली लौटना पड़ेगा।
रिपोर्टर : ये तो बहुत ज्यादा है, ऐसे तो 40 रुपये प्रति किमी हुआ !
चालक: ठीक है आप 3800 ही दे देना,
इससे कम नहीं हो पाएगा।
रिपोर्टर : फिर भी बहुत ज्यादा है। रहने दो।

स्थान : लिंब सेंटर के सामने
रिपोर्टर: 
मरीज को दिल्ली के सफरदगंज अस्पताल ले चलना है।
चालक: मरीज अभी कहां पर भर्ती है?
रिपोर्टर : केजीएमयू ट्रॉमा में भर्ती है।
चालक: ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ेगी?
रिपोर्टर: हां, तभी तो बड़े अस्पताल जा रहे हैं। चालक: 14 हजार रुपये पड़ेंगे, ईको वैन एसी वाली देंगे।
रिपोर्टर : एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस कितने में जाएगी?
चालक : रुको पूछकर बताते हैं… उसमें खर्च बढ़ जाएगा।
रिपोर्टर : पूछ कर बताओ, कितना लगेगा।
चालक: (किसी से फोन पर बात करने के बाद) भैया 22 हजार रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर:  ठीक है, नंबर दो, कॉल करूंगा।

ऑक्सीजन छोड़ अन्य मानक पूरे नहीं करतीं एंबुलेंस

सीएमओ स्वीकार करते हैं कि अधिकतर निजी एंबुलेंस मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इन एंबुलेंस में सिर्फ ऑक्सीजन सिलिंडर होता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट के साधन भी नहीं होते हैं। एडवांस कहे जाने वाली एंबुलेंस में प्रशिक्षित आपातकालीन चिकित्सा टेक्नीशियन (ईएटी) या पैरामेडिक्स मौजूद होने चाहिए, जो आपात स्थिति में मरीज को सीपीआर, और ऑक्सीजन दे सके।

आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग काकोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है। – डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ कोविड के दौरान एंबुलेंस के रेट तय किए गए थे। इसके बाद वह व्यवस्था खत्म हो गई थी। अभी तक निजी एंबुलेंस की अधिक वसूली को लेकर कोई भी लिखित शिकायत नहीं मिली है। कोई भी मसला आता है तो उसे दिखवाया जाएगा।

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।

ऑक्सीजन छोड़ अन्य मानक पूरे नहीं करतीं एंबुलेंस
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।

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