Thursday, February 12, 2026

अनदेखी : एक कमरे में ही चल रहीं पांच कक्षाएं, पठन-पाठन में दिक्कत

यह भी पढ़े

औरैया। परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के तहत बड़े पैमाने पर बजट खपाया जा रहा है लेकिन स्कूलों में भवनों की कमी से विभाग की नजर हटी हुई है। कई स्कूलों में स्थिति यह है कि एक ही कमरे में कक्षा एक से लेकर पांच तक की कक्षाओं के बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षक किसी तरह से एक ही कमरे में सभी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं, प्रधानाध्यापकों की ओर से लगातार अधिकारियों को भवन की समस्या से अवगत भी कराया जा रहा है। इसके बावजूद समस्या दूर नहीं हो रही है।

——————-
केस-01)
एक कमरे में पढ़ रहे सभी बच्चे
शहर के कन्या प्राथमिक विद्यालय भीखमपुर में कक्षा एक से पांच तक के बच्चे पढ़ते हैं। छात्र संख्या 45 है। विद्यालय में महज एक कमरे का भवन है। इसमें पांचों कक्षाओं के बच्चे एक साथ पढ़ रहे हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार ने बताया कि एक कमरे में ही मजबूरन सभी बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। उच्चाधिकारियों को नए भवन निर्माण के संबंध में पत्राचार किया गया है।

केस-02)
एक कमरे में पहली से पांचवीं के बच्चे
बिधूना क्षेत्र के ताजपुर के मजरा डहरियापुर के परिषदीय स्कूल में 32 बच्चे पंजीकृत हैं। यही नहीं, इसी एक कक्ष के स्कूल में दो आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में एक ही कमरे में छोटे बच्चों के साथ-साथ पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। डहरियापुर में तैनात शिक्षक दीप्ति ने बताया कि एकल भवन के साथ-साथ बाउंड्री न होने की भी समस्या है। अक्सर मवेशी कमरे तक आ जाते हैं।

——————–
केस-03)
बच्चों को हो रही दिक्कत
बिधूना क्षेत्र के कुसमरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में 23 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां पर एक ही कमरे में एक से पांच तक की कक्षाएं चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से ये स्कूल एकल कक्ष में ही संचालित है। जगह की कमी और भीड़भाड़ के चलते बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत होती है।

——————–
स्कूल भवन जर्जर, मैदान में लगती कक्षाएं

अजीतमल। क्षेत्र के ग्राम टढ़वा रंगिया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट का भवन जर्जर हो चुका है। इससे बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। इससे भयभीत शिक्षक बच्चों को मैदान में बैठाकर कक्षा लगाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस स्कूल की इमरात 2006-07 में बनी थी। पांच साल बाद ही इस भवन के कमरों का प्लास्टर उखड़ने लगा। छत का लिंटर भी टूटने लगा है। बारिश में लगातार पूरी कक्षाओं में छतों से पानी टपकता है। इसके भयग्रस्त अध्यापक खुले में कक्षा चलाने को मजबूर हैं। प्रधानाध्यापिका मधुबाला ने बताया कि 2017 से लगातार दस बार लिखित रूप से बीआरसी पर प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं। अब तक नया भवन निर्माण की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मौजूद सत्र में छात्रों की नामांकन संख्या 138 है लेकिन भय के चलते बाहर खुले में कक्षाएं लगाईं जा रही हैं। (संवाद)
——————
वर्जन
स्कूलों में नए भवन बनाए जाने को लेकर डिमांड तैयार की जा रही है। जल्द ही इस जरूरत को पूरा किया जाएगा।-संजीव कुमार, बीएसए

- Advertisement -
Ads

ट्रेंडिंग न्यूज़

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisement

अन्य खबरे