बिधूना। धान और मक्का की फसल खराब होने से आर्थिक तंगी झेल रहे एक किसान ने कर्ज के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली थी।रविवार को हुई इस घटना को लेकर तहसील प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच में घर में आपसी विवाद होने की बात सामने आ रही है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव बरका पुरवा निवासी किसान मुकेश चंद्र ने वर्ष 2017 में रुरुगंज स्थित बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अपनी मां के साथ संयुक्त खाते पर 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। परिजन के अनुसार फसल लगातार खराब होने से वह ऋण की अदायगी नहीं कर सके। ब्याज सहित यह रकम बढ़कर करीब चार लाख रुपये तक पहुंच गई थी। ऐसे में बैंक द्वारा डिफाल्टर घोषित करते हुए बाहर लगाए गए बोर्ड पर 3,48,753 रुपये बकाया दर्शाया गया।
परिजन का आरोप है कि 25 फरवरी से 28 फरवरी तक बैंक कर्मचारियों द्वारा लगातार रुपये जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। 25 फरवरी को बैंक की टीम घर पहुंची थी। 28 फरवरी को प्रबंधक ने फोन कर रकम जमा करने को कहा। इससे मुकेश मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए थे। एक वर्ष पूर्व ऋण वसूली के लिए आरसी भी काटी जा चुकी थी।
बेटे प्रशांत ने बताया कि वर्ष 2011 में भी केसीसी का ऋण लिया गया था, जिसे सरकार के माफ करने पर बचा हुआ रुपया जमा कर दिया गया था।
बेटे ने बताया कि वर्ष 2017 में दोबारा ऋण लिया गया था। वर्ष 2020 में खातेदार दादी का निधन हो गया, इसके बाद पूरा दबाव पिता पर आ गया। इस वर्ष करीब 20 बीघा में धान की फसल खराब हो गई। बाद में मक्का बोई गई, उसमें भी नुकसान हुआ। पिता कहते थे कि गेहूं की फसल अच्छी होगी तो कुछ रकम जमा कर देंगे, लेकिन बैंक का रुपया जमा न होने पर रविवार को किसान ने बिशनपुर पुलिया के पास फंदे से लटक कर जान दे दी थी।
मंगलवार को तहसील बिधूना के नायब तहसीलदार हरि किशोर व लेखपाल सचिन यादव मृतक किसान के घर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। लेखपाल ने प्रारंभिक जांच में बैंक ऋण का मामला सामने आया है। एसडीएम गारिमा सोनकिया ने बताया कि जांच में किसान पर बैंक का कर्ज करीब चार लाख होना बताया गया हैं। वह लोक अदालत में जाने की बात भी कह रहे थे।
एसडीएम ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि किसान का घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ जिससे यह कदम उठाया है। उधर, मामले की जांच हो रही है।


