Saturday, June 6, 2026

अग्निवीरों के 25% कोटे का बढ़ेगा दायरा? रिटायरमेंट से पहले आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

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नई दिल्ली: इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल इस महीने के आखिर में पूरा हो रहा है। क्या उन्हें किसी चीज का मलाल है, क्या अग्निवीरों को परमानेंट करने का प्रतिशत 25 से ज्यादा होना चाहिए और क्या रिटायरमेंट के बाद वे राजनीति में आने की सोच रहे हैं, इन सब मसले पर आर्मी चीफ से बात की पूनम पाण्डे ने…

1) आर्मी चीफ के तौर पर अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानते हैं और किस चीज का मलाल है, जो आप करना चाहते थे पर हो नहीं पाया?

बतौर आर्मी चीफ मैंने अपने लिए कई उद्देश्य निर्धारित किए थे। मेरी कोशिश सिर्फ मौजूदा ऑपरेशनल चैलेंज से निपटना नहीं था बल्कि भारतीय सेना को भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार करना भी था। इसी सोच के साथ आधुनिक टेक्नॉलजी को शामिल करने, हर सैनिक को ड्रोन वॉरियर बनाने, आईबीजी, रूद ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नि प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई और घातक यूनिट को ऑपरेशनलाइज करने की दिशा में काम किया। जॉइंटनेस और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी काम किया। मेरा हमेशा मानना रहा है कि भविष्य का युद्ध किसी एक सर्विस से नहीं जीता जाएगा। जमीन, हवा, साइबर, स्पेस, इलैक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, इंफॉर्मेशन डोमेन सभी में मिलकर ऑपरेट करना ही भविष्य की आवश्यकता है। लेकिन अगर मुझे अपने कार्यकाल की एक सबसे बड़ी उपलब्धि बतानी हो तो मैं कहूंगा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय सेना और पूरी आर्म्ड फोर्सेस की संयुक्त, समन्वित और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार क्षमताओं का प्रमाण मिला।मेरे लिए यह ऑपरेशन इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें हमने दिखाया कि भारत सटीकता, संयम और निर्णायक कार्रवाई तीनों का संतुलन बनाए रख सकता है।
जहां तक मलाल की बात है, एक सैनिक को हमेशा लगता है कि अभी और किया जा सकता था। मुझे लगता है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीक के विकास, एआई आधारित सिस्टम, ड्रोन से निपटने की क्षमता और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों पर हमें और तेजी से काम करना चाहिए। हमने पारंपरिक सैन्य शक्ति और आधुनिक विशेष तकनीकों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया है। भारत की सुरक्षा परिस्थितियां ऐसी हैं कि टैंक, तोपखाना और पैदल सेना जैसी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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