Friday, June 19, 2026

₹5 लाख लूटने में कमता चौकी प्रभारी का भी नाम:CRPF दरोगा के साथ फरार, अब थाना पुलिस ढूंढ़ रही; इनाम घोषित होगा

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लखनऊ में निवेश के नाम पर कारोबारियों को ठगने वाले गिरोह में शामिल कमता चौकी प्रभारी मोहित, CRPF दरोगा जय प्रकाश समेत अन्य आरोपियों पर जल्द इनाम घोषित किया जा सकता है। दो दिन पहले पुलिस ने मुकदमे में मोहित का नाम भी बढ़ाया था। 5 लाख लूट में गिरोह का खुलासा होने के बाद से दोनों फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस की 6 टीमें लगातार दूसरे जिलों में दबिश दे रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, आरोपी दरोगा मोहित मुजफ्फरनगर का रहने वाला है और साल 2019 बैच का उपनिरीक्षक है। एसीपी विभूतिखंड ने बताया पुलिस की 6 टीमें इनकी तलाश में दबिश दे रही हैं। दोनों के मोबाइल फोन बंद होने के कारण उनकी लोकेशन नहीं मिल सकी है। ये ठगी गिरोह में शामिल थे। जब कोई अपने पैसे वापस मांगता था तो पुलिस अधिकारी होने की धौंस दिखाकर चुप करा देते थे।

हर लूट की जानकारी चौकी प्रभारी को रहती थी

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य चौकी प्रभारी मोहित को पूरी जानकारी देकर वारदात को अंजाम देते थे। मोहित को सिपाही पूरन सिंह, सीआरपीएफ दरोगा जय प्रकाश, पीएसी के बर्खास्त जवान समेत अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी थी कि वे निवेश के नाम पर कारोबारियों को फंसाकर लूटपाट करते हैं।

गिरोह के सदस्य व्यवसायियों को निवेश का झांसा देकर रुपए लेकर बुलाते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी नंबर प्लेट लगी बोलेरो में बैठाकर कुछ दूर तक घुमाते और फिर बंधक बनाकर नकदी व अन्य सामान लूट लेते थे। कई बार आरोपी खुद को एसटीएफ का बताकर घटना को अंजाम देते थे।

पुलिस अब तक गोरखपुर के शहजनवा थाना क्षेत्र के कररिया निवासी जावेद हुसैन, उसके साथी आसिफ, संतकबीरनगर के बेल्डुआ झकहीचक निवासी प्रवेश त्रिपाठी और राजस्थान के अलवर जिले के मंडावा मैनपुर निवासी सिपाही पूरन सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

इस तरह से क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन में फंसाते

गिरोह के सभी सदस्यों की भूमिकाएं पहले से तय थीं। सबसे पहले ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी, जिनके पास बड़ी मात्रा में नकदी हो और जो निवेश के जरिए अपनी रकम बढ़ाना चाहते हों। इसके बाद उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का सपना दिखाया जाता था। भरोसा जीतने के लिए दो से तीन बार बैठकें की जाती थीं और फिर पीड़ित को बड़ी रकम लेकर बुलाया जाता था।

योजना के तहत पीड़ित को कार में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर घुमाया जाता था। इसी दौरान बिना नंबर की बोलेरो में सवार कथित छापेमारी टीम पहुंचती और खुद को एसटीएफ का अधिकारी बताकर वाहन रोक लेती। आरोपी नकदी को काले धन और अवैध लेनदेन से जुड़ा बताकर पीड़ित को जेल भेजने की धमकी देते थे। डर के माहौल में पूरी रकम लूट ली जाती थी।

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