Saturday, October 10, 2026

अपने ही NDA को क्या बोल गए चिराग पासवान? BJP से लेकर JDU तक की चुप्पी पर उठे सवाल

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पटना। कॉकroach जनता पार्टी (सीजेपी) के 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ट्रेनों को रद्द किए जाने का मुद्दा गरमा गया है। रेलवे के इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने सवाल उठाए हैं।

हरियाणा के सोनीपत में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को रोका नहीं जा सकता। उनके इस बयान ने प्रदर्शन से पहले रेल सेवाओं पर लगी पाबंदियों को लेकर बहस तेज कर दी है।

ट्रेनों को रद्द करने के फैसले पर चिराग का सवाल

चिराग पासवान ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वालों को यह समझना चाहिए कि आखिर कितनी ट्रेनों को रोका जा सकता है और कितने रास्तों से संपर्क तोड़ा जा सकता है।

उन्होंने सड़कों को जाम करने और आवागमन बाधित करने जैसे कदमों पर भी सवाल उठाए। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि परिवहन सेवाओं को रोकने से युवाओं के हौसले को खत्म नहीं किया जा सकता।

‘भारत के युवा दुनिया को रास्ता दिखा सकते हैं’

केंद्रीय मंत्री ने युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत के युवाओं में दुनिया को रास्ता दिखाने की ताकत है। उन्होंने पिछली पीढ़ियों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि आज के युवा भी अपनी क्षमता साबित कर सकते हैं। चिराग के मुताबिक, किसी भी तरह की रुकावट युवाओं को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अन्य मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है।

प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। इसी बीच, दिल्ली जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द किए जाने की खबरों ने यात्रियों की आवाजाही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

बिहार-यूपी से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों पर असर

रेलवे ने बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से दिल्ली जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। इस कदम का असर उन यात्रियों पर पड़ सकता है, जो प्रदर्शन में शामिल होने या दूसरे कामों से दिल्ली जाने की योजना बना रहे थे।

हालांकि, यात्रियों को अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक जानकारी से करनी चाहिए, क्योंकि रद्द की गई ट्रेनों और उनके संचालन की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी सेवाओं को लेकर जताई चिंता

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से कहा है कि सेवाओं का नियमन इस तरह किया जाए कि आम लोगों को असुविधा न हो। ऐसे में प्रदर्शन की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और रेल सेवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

चिराग पासवान के बयान ने इस बहस में युवाओं की आवाजाही और उनकी क्षमता का मुद्दा भी जोड़ दिया है।

अब नजर रेलवे और प्रशासन के अगले कदम पर

सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सबसे अहम सवाल यह है कि सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।

जहां प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, वहीं यात्रियों के लिए परिवहन सेवाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। चिराग पासवान के बयान के बाद अब रेलवे के फैसले और प्रदर्शन के दिन की व्यवस्थाओं पर सबकी नजर रहेगी।

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