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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी मंदिर में प्रवेश करने से पहले ऐसे कई नियम होते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। इन नियमों में जूते-चप्पल को उतारने से लेकर हाथ पैर धोन और सिर को ढकना शामिल है। लेकिन इन सभी नियमों को मानने के बाद जब कोई व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करता है, तो अक्सर मंदिर की पहली सीढ़ी को स्पर्श करता है।
मंदिर में जाने से पहले सीढ़ियों को छूना सिर्फ एक परंपरा ही नहीं, बल्कि आस्था के नजरिए से भी बेहद खास है। आइए जानते हैं इस प्रथा को निभाने के पीछे का असल कारण और आध्यात्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म के अनुसार, मंदिर एक ऐसा स्थान है, जो पवित्र होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि, आपका शरीर, मन और भावना पूरी तरह से शुद्ध और भक्तिभाव से परिपूर्ण हो। जब कोई व्यक्ति मंदिर के अंदर जाने से पहले पहली सीढ़ी को छूता है, तो यह ईश्वरीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर में पहली सीढ़ी को प्रणाम करने का मतलब है कि, आप पूरी तरह से नकारात्मक ऊर्जा को पीछे छोड़कर मंदिर परिसर में जाने के लिए तैयार हैं। सीढ़ियों को झूककर छूना इस बात का प्रतीक है कि, वह ईश्वर के सामने अपना सारा अहंकार और गुस्सा त्याग कर जा रहा है। मंदिर में सीढ़ियों को छूना आत्मसमर्पण का भाव भी दर्शाता है। इसके साथ ही मंदिर की पहली सीढ़ी भगवान से जुड़ी होती है, जहां देवता वास करते हैं।
जयपुर। देशभर में आज रविवार, 21 जून को नीट-यूजी 2026 की परीक्षा (NEET-UG 2026) दोबारा कराई जा रही है। परीक्षा से पहले अजमेर में एक छात्रा को बुर्का पहनकर परीक्षा केंद्र में जाने से रोका गया।
छात्रा ने एएनआइ से बातचीत में कहा कि जब NTA ने बुर्का पहनकर जाने के लिए इजाजत दी है तो मुझे जाने क्यों नहीं दिया जा रहा। छात्रा ने आगे कहा, ‘परीक्षा मायने नहीं रखती, मेरा बुर्का और पहचान मायने रखती है।’
NEET छात्रा, जिसने अपनी पहचान कुलसुम बानो के तौर पर बताई, उस छात्रा ने कहा कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई थी और दावा किया कि उसने वही कपड़े पहने थे जो उसने पिछली बार परीक्षा देते समय पहने थे।
कुलसुम बानो ने कहा, ‘मैं NEET परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई हूं। जब मैंने 3 मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैंने वही कपड़े पहने थे जो अभी पहने हैं, बुर्का और दुपट्टा।’
बानो ने आरोप लगाया कि शुरू में उसे केंद्र में घुसने से पहले दुपट्टा हटाने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में अधिकारियों ने जोर दिया कि उसे बुर्का भी हटाना होगा।
बानो ने आगे कहा, ‘अगर NTA ने हमें इजाजत दी है तो ये लोग हमें रोक नहीं सकते। अगर मुझे परीक्षा देनी है और वे मुझे इन कपड़ों में अंदर नहीं आने देते, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी। यह शर्मनाक है कि वे 18 साल के युवाओं के साथ ऐसा कर रहे हैं।’
बानो ने कहा, ‘मेरे लिए परीक्षा मायने नहीं रखती; मेरे लिए मेरा ‘बुर्का’ और मेरी पहचान मायने रखती है।’