Wednesday, July 15, 2026
Home Blog Page 3

UP Police पर 25 लाख की लूट का दाग! झांसी से आई टीम ने जालौन के तीन सिपाहियों को किया गिरफ्तार, तीनों निलंबित

0

उरई। झांसी से आई पुलिस की टीम ने जालौन पुलिस लाइन में तैनात तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके विरुद्ध झांसी में सूरत के ड्राई फ्रूट कारोबारी के मुंशी से 24.90 लाख रुपये की लूट का मुकदमा दर्ज है। तीनों सिपाही पुलिस लाइन में ही ड्यूटी पर तैनात थे और छुट्टी लेकर लूट की घटना को अंजाम दिया। पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने बताया कि तीनों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए भी संस्तुति कर दी गई है। तीनों सिपाही 2023 में पीएसी से जिले में आए थे और तभी से लाइन में तैनात हैं।

मुंशी स्कूटी से घर जा रहे थे

पुलिस के अनुसार, गुजरात के सूरत निवासी ड्राई फ्रूट कारोबारी जितेंद्र पटेल उप्र के साथ मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कारोबार करते हैं। झांसी के आसपास का काम उनके मुंशी किशन पांचाल देखते हैं। गुरुवार की शाम किशन पांचाल अपने सहयोगी किशन कुमार के साथ विभिन्न व्यापारियों से वसूली कर करीब 24.90 लाख रुपये लेकर स्कूटी से अपने घर जा रहा था।

काले रंग की कार में जबरन बैठाया

रास्ते में मिनर्वा चौराहे के पास सुरेश होटल के सामने काले रंग की क्रेटा कार में सवार पांच लोगों ने उनकी स्कूटी रोकी और दोनों को जबरन कार में बैठा लिया। करीब डेढ़ घंटे तक आरोपित विभिन्न मार्गों से होकर कानपुर बाईपास के पास पहुंचे और 24.90 लाख रुपये से भरा बैग छीनकर दोनों को बाहर उतार दिया और भाग गए।

पांच लोगों ने लूट की वारदात को दिया अंजाम

मुंशी किशन ने बाद में कारोबारी जितेंद्र पटेल को बताया कि उसके साथ तीन पुलिस कर्मियों समेत पांच लोगों ने लूट की घटना को अंजाम दिया है। इसके बाद सदर कोतवाली झांसी में लूट का मुकदमा अज्ञात में दर्ज कराया तो
झांसी सीओ सिटी रामवीर सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो क्रेटा कार के फुटेज मिले, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

ये तीन सिपाही निलंबित

जांच के दौरान जालौन पुलिस लाइन में तैनात सिपाही मनोज, राघवेंद्र व नीरज के नाम प्रकाश में आए। रविवार दोपहर झांसी की टीम पुलिस लाइन पहुंची और तीनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई है।

देश का सबसे अमीर जिम ट्रेनर: अनंत अंबानी से कुमार बिड़ला तक को दी कोचिंग, गरीबी में कटा बचपन; अब रोज कमाते हैं ₹5 लाख

0

नई दिल्ली। हर प्रोफेशन में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने काम से जमकर पैसा कमाते हैं। उदाहरण के लिए सामान्य किसान हर साल सामान्य कमाई करते हैं, मगर कुछ किसान अलग तकनीक, प्लानिंग और फसलों से करोड़ों रुपये भी कमाते हैं। उसी तरह जिम ट्रेनर हैं, जिनमें से कुछ सेलेब्रिटीज के लिए जिम ट्रेनर बनते हैं और अच्छा पैसा कमाते हैं। यहां हम आपको आज भारत के सबसे अमीर जिम ट्रेनर के बारे में बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि कौन-कौन से अमीर लोग उनके क्लाइंट हैं।

कौन हैं सबसे अमीर जिम ट्रेनर?

विनोद चन्ना को भारत का सबसे अमीर और सबसे ज्यादा कमाई करने वाला जिम ट्रेनर माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वे रोजाना ₹3 से ₹5 लाख तक कमाते हैं। मुख्य रूप से मुंबई में काम करने वाले विनोद घर पर ट्रेनिंग देने के लिए हर महीने ₹3 लाख तक चार्ज करते हैं और उन्होंने ₹15 करोड़ की वैल्यू वाला अपना एक बड़ा कारोबार खड़ा किया है।

वीसी फिटनेस के फाउंडर

विनोद वीटी फिटनेस वेंचर के फाउंडर हैं। चन्ना मुंबई में गरीबी में पले-बढ़े और सबसे पहले वॉचमैन के तौर पर काम किया। मगर आज वे कई सेलेब्रिटी के फिटनेस कोच हैं।

कौन-कौन है चन्ना का क्लाइंट?

विनोद चन्ना कई बड़े बिजनेस टाइकून जैसे अनंत अंबानी, नीता अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला, अनन्या बिड़ला आदि और कई बॉलीवुड सेलिब्रिटी जैसे जॉन अब्राहम, शिल्पा शेट्टी कुंद्रा, हर्षवर्धन राणे, विवेक ओबेरॉय, अर्जुन रामपाल वगैरह के पर्सनल ट्रेनर भी हैं।

बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी मामला: सुरक्षा संवर्ग में स्वीकृत 57 पदों पर आज तक नहीं हुई नियुक्ति

0

गोपेश्वर (चमोली)। दान-चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण सामने आने से पहले भी बदरीनाथ धाम में विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन इन्हें हमेशा ही नजरअंदाज किया गया।

मंदिर की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था व दान-चढ़ावा गणना पर नजर रखने के लिए वर्ष 2024 में मजबूत सुरक्षा ढांचा बनाने की कवायद शुरू तो हुई, जो अंजाम तक नहीं पहुंची।

तब इसे सुरक्षा संवर्ग नाम देकर इसमें बाकायदा 57 पद स्वीकृत किए गए थे, जिन पर आज तक नियुक्तियां नहीं हो पाईं।

बदरी-केदार धाम की सुरक्षा जिम्मेदारी कभी पुलिस तो कभी आइटीबीपी के पास रहती है, लेकिन मंदिर के अंदर की सुरक्षा आज भी भगवान भरोसे है।

वर्ष 1984 में मंदिर की सुरक्षा को लेकर चार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी, जो कालांतर में सुरक्षा के बजाय सेवा भाव में जुट गए। इनके पास न बंदूक है, न डंडा और न वर्दी ही।

ऐसे में ये सुरक्षाकर्मी कम स्वयं सेवक ज्यादा नजर आते हैं। वर्तमान में बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधीन बदरी-केदार धाम समेत 47 मंदिर हैं और सभी जगह सुरक्षा का जिम्मा स्वंय सेवकों के भरोसे है।

वर्ष 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय के नेतृत्व वाली मंदिर समिति ने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली बनाई थी। इसी के साथ सुरक्षा संवर्ग की आवश्यकता को प्रमुखता देते हुए इसके लिए भी कार्ययोजना बनी।

तब सुरक्षा संवर्ग में 57 पदों की आवश्यकता बताते हुए पद सृजन के लिए शासन से पत्राचार हुआ और जुलाई 2024 में शासन ने इन पदों को भरने की स्वीकृति भी दे दी।

सुरक्षा संवर्ग में मुख्य मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए डीएसपी रैंक का एक पद, मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए इंस्पेक्टर रैंक के दो पद और उप मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए सब इंस्पेक्टर रैंक के चार पद स्वीकृत थे।

इन पर तैनाती नागरिक पुलिस व अद्धैसैनिक बलों से प्रतिनियुक्ति के आधार पर होनी थी।

इसके अलावा मुख्य मंदिर रक्षक के 10 और मंदिर रक्षक के 40 पद भी सृजित किए गए, जो हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल रैंक के थे। इन्हें आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाना था।

ऐसा हो जाता तो मंदिर में दर्शन, गणना व सुरक्षा के साथ ही भगवान बदरी विशाल के खजाने की सुरक्षा के लिए आज एक अलग ही ढांचा होता।

लेकिन, जिम्मेदारों की ओर से रुचि न लिए जाने के कारण सब-कुछ धरा का धरा रह गया। नतीजा आज सबके सामने है।

शासन से मांगी आइटीबी की दो बटालियन

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि धाम में सुरक्षा संवर्ग को लेकर पद स्वीकृत होने की जानकारी मिली है।

भविष्य में सुरक्षा संवर्ग का ढांचा खड़ा किया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा का मजबूत घेरा बनाने के लिए बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आइटीबीपी की दो बटालियन अस्थायी रूप से तैनात करने के लिए मंदिर समिति ने शासन को पत्र लिखा है।

तमिलनाडु में पिता ने अपने दोनों बच्चों की ली जान, फिर खुद भी की आत्महत्या; पत्नी के जाने के बाद था परेशान

0

चेन्नई। तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिले के पुदुकोट्टाई के पास सवेरियारपुरम में एक पिता ने अपने दो मासूम बच्चों की करंट लगाकर जान ले ली और फिर खुद भी उसी तार से करंट लगाकर आत्महत्या कर ली।

मामले में पुलिस ने बताया कि अपने बच्चों की जान लेने वाला व्यक्ति अपनी पत्नी के छोड़कर चले जाने के कारण काफी परेशान था और डिप्रेशन में था, जिसके बाद उसने ऐसा कदम उठाया।

अब समझिए पूरा मामला

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक शख्स की पहचान 40 साल के मैरी माइकल के रूप में हुई है, जो पहले ट्रक ड्राइवर का काम करता था। वहीं उसके बच्चों की पहचान 14 साल की मैरी निरोशा और 12 साल का मैरी केनिस्टन के रूप में हुई है। दोनों बच्चे एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे।

पुलिस ने बताया कि लगभग छह महीने पहले माइकल की पत्नी उसे और बच्चों को छोड़कर किसी दूसरे आदमी के साथ रहने चली गई थी। इस बात से माइकल बेहद टूट चुका था। उसने ट्रक चलाना भी कम कर दिया था और कभी-कभी पेंटिंग का काम करने लगा था।

कैसे अंजाम दी वारदात?

जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात को माइकल बाजार से बच्चों के लिए खाना लेकर आया। बच्चों को खाना खिलाने के बाद उसने उन्हें सोने के लिए भेज दिया। जब बच्चे सो गए, तो माइकल ने बिजली के तारों को बच्चों के शरीर से बांध दिया और उसे सीधे पावर बोर्ड से जोड़ दिया। बच्चों की मौत होने के बाद, उसने उसी तार का इस्तेमाल कर खुद की जान भी ले ली।

कैसे हुआ मामले का खुलासा, समझिए

गौरतलब है कि माइकल के 75 साल के बुजुर्ग पिता एंथनी मुथु भी उसी घर में रहते थे, जो उस रात कमरे के बाहर सो रहे थे। शनिवार की दोपहर तक जब कमरे का दरवाजा अंदर से बंद रहा और कोई हलचल नहीं हुई, तो बुजुर्ग पिता को शक हुआ। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को बुलाया और पुदुकोट्टाई पुलिस को इसकी जानकारी दी।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर खाट पर तीनों के शव बिजली के तारों से लिपटे हुए मिले। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तूतुकुड़ी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

9 साल का इंतजार खत्म! 15 जुलाई से शुरू होगी GST ट्रिब्यूनल में सुनवाई, व्यापारियों को बड़ी राहत

0

कानपुर। जीएसटी से जुड़े विवादों के निपटारे का इंतजार कर रहे व्यापारियों और करदाताओं के लिए राहत भरी खबर है। जीएसटी अपीलीय अधिकरण (जीएसटीएटी) की लखनऊ पीठ में 15 जुलाई से सुनवाई शुरू होने जा रही है। यह व्यवस्था नौ साल 15 दिन के लंबे इंतजार के बाद शुरू हो रही है।

जीएसटी अपीलीय अधिकरण पर व्यापारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी है। ट्रिब्यूनल के आनलाइन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार शनिवार तक 59,987 व्यापारियों ने अपना पंजीकरण कराया है और 54,229 अपीलें आनलाइन दाखिल की जा चुकी हैं।

13,461 अधिवक्ता भी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। जीएसटी ट्रिब्यूनल गठन की मुख्य अधिसूचना 31 जुलाई 2024 को वित्त मंत्रालय को जारी की गई थी, जिसे एक सितंबर 2023 से प्रभावी माना गया है। इसके बाद न्यायाधिकरण की पीठों के गठन में संशोधन के लिए एक और अधिसूचना 26 नवंबर 2024 को जारी की गई।

लखनऊ पीठ समेत विभिन्न ट्रिब्यूनल पीठ ने इसी साल काम शुरू किया है। कानपुर, लखनऊ और आस-पास के जिलों के व्यापारियों के जीएसटी विवादों की सुनवाई लखनऊ में गोमती नगर स्थित ट्रिब्यूनल कार्यालय में होगी।

कर विशेषज्ञ एवं अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि 15 जुलाई से जीएसटी ट्रिब्यूनल के कोर्ट रूम-एक में चार अपीलें और कोर्ट रूम-दो में एक अपील सूचीबद्ध की गई है। अभी इन अपीलों की सुनवाई अर्हता के आधार पर होगी। उन्होंने बताया कि अपील दाखिल करने की समय-सीमा में एक माह की अतिरिक्त छूट दी गई है।

इसके तहत 31 मार्च 2026 तक पारित प्रथम अपील (धारा 107) और रिवीजन आदेश (धारा 108) के विरुद्ध अब 31 जुलाई तक अपील की जा सकेगी। 30 अप्रैल 2026 तक पारित आदेशों के विरुद्ध भी अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।

एक अप्रैल 2026 के बाद पारित आदेशों के मामलों में भी नियमानुसार उपलब्ध अवधि के अतिरिक्त एक माह की राहत प्रदान की गई है। कर विशेषज्ञ ने बताया कि पोर्टल पर अब भी कुछ तकनीकी खामियां हैं, इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपील दाखिल कर दें।

31 जुलाई के बाद भी तीन माह तक विलंब क्षमा प्रार्थना पत्र के साथ अपील दाखिल की जा सकेगी, लेकिन इसके लिए 5,000 रुपये अतिरिक्त कोर्ट फीस जमा करनी होगी।

भारत के इस शहर में जापान की कंपनी बनाएगी बड़ा प्लांट, 200 करोड़ खर्च करने का बनाया प्लान

0

नई दिल्ली। जापान की वॉटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशन कंपनी, डाइकी एक्सिस, भारत में सस्टेनेबल वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए कर्नाटक के तुमकुरु में अपना तीसरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। कंपनी इस प्रोजेक्ट में लगभग ₹200 करोड़ का निवेश करेगी।

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि उसकी पूरी तरह से अपनी भारतीय सब्सिडियरी ‘डाइकी एक्सिस इंडिया’ के ज़रिए लगाए जाने वाले इस प्लांट में जापानी टेक्नोलॉजी ‘जोहकासो’ (Johkasou) पर आधारित सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम बनाए और असेंबल किए जाएंगे।

गंदे पानी को डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से ट्रीट करने करती है मदद

यह टेक्नोलॉजी वेस्टवॉटर (गंदे पानी) को डीसेंट्रलाइज़्ड तरीके से ट्रीट करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने में मदद करती है। डाइकी एक्सिस इंडिया के एडवाइज़र के.सी. पांडे ने PTI को बताया कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, इंडस्ट्रियल विस्तार और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत में एडवांस्ड वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़्यादा संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रस्तावित प्लांट से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और देश भर में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट समाधानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।

पांडे के अनुसार, भारत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पानी के दोबारा इस्तेमाल के समाधानों के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाज़ारों में से एक है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में “स्रोत पर ही ट्रीटमेंट और स्रोत पर ही दोबारा इस्तेमाल” के कॉन्सेप्ट को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।

पांडे ने कहा, “भारत में 24,000 से ज़्यादा शहरी पार्कों के अलावा, साफ़ किए गए वेस्टवॉटर का इस्तेमाल हॉर्टिकल्चर, ग्रीन स्पेस के रखरखाव और हज़ारों रिहायशी कॉम्प्लेक्स, संस्थानों, होटलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पीने के अलावा दूसरी ज़रूरतों के लिए किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि डाइकी एक्सिस का विस्तार केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप है। इसका मकसद वर्ल्ड-क्लास शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, टिकाऊ जल प्रबंधन और बेहतर स्वच्छता प्रणालियां विकसित करना है।

त्विषा शर्मा केस में बड़ा खुलासा: बेल्ट से बनाया था फंदा, AIIMS ने CBI को सौंपी फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट

0

भोपाल। मॉडल और एक्टर त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बहुचर्चित मामले में दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों ने अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। इसमें शव की गर्दन पर पाए गए घाव की स्थिति थोड़ी स्पष्ट हुई है। बताया जा रहा है कि यह घाव घटनास्थल पर मिले जिम्नास्टिक बेल्ट के पैटर्न से मेल खा रहा है। बेल्ट पर मृतका के त्वचा के ऊतक भी पाए गए हैं। इसमें साफ हुआ है कि जिम्नास्टिक बेल्ट ही त्विषा की गर्दन का फंदा बना था।

सीलबंद लिफाफे में सौंपी रिपोर्ट

दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने शुक्रवार को सीबीआई को एक सीलबंद लिफाफे में 11 पन्नों की अंतिम फारेंसिक रिपोर्ट सौंपी। इसकी एक प्रति न्यायालय को भी भेजी गई है। यह रिपोर्ट त्विषा की रहस्य बनी मौत का सच सामने लाने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।

एक माह तक हर पहलू की वैज्ञानिक जांच

एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. सुधीर गुप्ता ने न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए रिपोर्ट पर सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर बताया कि मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक हर एंगल से तथ्यों की बारीकी से जांच की है, जो सीबीआई को इस मौत की गुत्थी सुलझाने में मदद करेगी।

पहली पीएम रिपोर्ट में नहीं जुड़ पाया था बेल्ट का संबंध

बताया जा रहा है कि भोपाल एम्स में हुए पहले पोस्टमार्टम में इस बेल्ट और गर्दन की चोटों के बीच संबंध स्थापित नहीं हो पाया था, क्योंकि तब कटारा हिल्स थाने के जांच अधिकारी मेडिकल बोर्ड के सामने वह बेल्ट ही पेश नहीं कर पाए थे। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि त्विषा को फंदे पर लटका कर मारा गया था, या उसने आत्महत्या की थी?

आरोपित सास व पति जेल में

बता दें कि गत 12 मई को शहर के बागमुगालिया एक्सटेंसन स्थित अपनी ससुराल में त्विषा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। मामले में मृतका की सास भोपाल की सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और पति अधिवक्ता समर्थ सिंह जेल में हैं। दिल्ली एम्स की अंतिम फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा लगभग तय हो गई है। सीबीआई जुलाई के आखिरी सप्ताह में आरोपपत्र कोर्ट में पेश करने की तैयारी में है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ था पोस्टमार्टम

शुरुआती जांच से असंतुष्ट मृतका के पिता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय के आदेश पर 22 मई को शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। उसके बाद 24 मई को दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने भोपाल आकर दूसरा पोस्टमार्टम किया। फोरेंसिक साक्ष्यों को पुख्ता करने के लिए एम्स की टीम ने उस जगह का भी बारीकी से मुआयना किया था, जहां त्विषा शर्मा का शव मिला था।

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी आपकी बेसिक सैलरी? 2.28, 2.57 और 2.86 फिटमेंट फैक्टर का पूरा कैलकुलेशन

0

नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है। अगर सरकार 8वें वेतन आयोग को लागू करती है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बंपर इजाफा होना तय है। सैलरी में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) पर निर्भर करेगी।

अगर सरकार 2.28, 2.57 या 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो Level 1 से लेकर Level 18 तक के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिलेगा। आइए समझते हैं कि फिटमेंट फैक्टर क्या है और आपके पे-ग्रेड के हिसाब से आपकी नई बेसिक सैलरी कितनी हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) क्या होता है?

फिटमेंट फैक्टर एक तरह का मल्टीप्लायर (Multiplier) या फॉर्मूला है, जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदलने के लिए किया जाता है। इसे आसान भाषा में समझें तो सरकार पुराने वेतन को एक तय गुणांक से बढ़ाकर नई सैलरी फिक्स करती है। जैसे अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 है, तो 20,000 रुपये की बेसिक सैलरी सीधे 51,400 रुपये के आसपास हो जाएगी।

EPFO का नया फैसला, प्राइवेट नौकरी करने वालों के PF फंड पर माफी योजना शुरू; सिर्फ 6 महीने का समय

0

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा के मद्देनजर ईपीएफओ ने मान्यता प्राप्त गैर सरकारी भविष्य निधि ट्रस्टों को सरकारी नियमन के दायरे में लाने के लिए एमनेस्टी स्कीम (माफी योजना) की शुरूआत की है। ईपीएफओ ने कर्मचारियों के बकाए फंड समेत अन्य नियमों के पालन के लिए शुरू की गई इस माफी स्कीम के तहत निजी पीएफ ट्रस्टों से आवेदन मांगे है। श्रम मंत्रालय के अनुसार अगले छह महीने के दौरान योजना में शामिल होने का आवेदन करने वाले ट्रस्टों के खिलाफ पुराने लंबित मामलों से लेकर वित्तीय दंड जैसी कार्यवाही से छूट दे दी जाएगी। ईपीएफओ के दायरे से बाहर चलने वाले निजी पीएफ ट्रस्टों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है।

ईपीएफओ माफी योजना 2026 उन प्रतिष्ठानों पर लागू होती है जो आयकर अधिनियम 1961 के तहत मान्यता प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन जिनके पास संबंधित सरकार – केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, से औपचारिक छूट अधिसूचना नहीं है। संसद से पारित वित्त विधेयक 2026 ने मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्टों को नियंत्रित करने वाले आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 के वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रविधानों के अनुरूप कर दिया है।

सिर्फ इनको मिलेगी मान्यता

आयकर अधिनियम 2025 के अंतर्गत मान्यता केवल उन्हीं भविष्य निधियों को प्राप्त होगी जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 की धारा 17 के अंतर्गत छूट प्राप्त की है। ऐसे प्रतिष्ठानों को अधिनियम की धारा 17 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 143 के अंतर्गत माफी का लाभ मिल सकेगा। माफी योजना की अधिसूचना 29 जून को जारी की गई और जो संस्थाएं अपने पीएफ ट्रस्ट को पूर्व की तारीख से नियमित कराना चाहती हैं।साथ ही जिन्होंने पहले ही ””नॉन-एग्जेम्प्टेड”” (छूट-रहित) संस्थान के तौर पर नियमों का पालन शुरू कर दिया है या जो भविष्य में इसके पालन का विकल्प चुन रही हैं वे इस स्कीम के लिए पात्र हैं।

श्रम मंत्रालय के अनुसार जो संस्थान पीएफ ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराना चाहते हैं और सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 के तहत छूट-प्राप्त संस्थान के तौर पर काम जारी रखना चुनते हैं वे भी इस योजना के लिए पात्र होंगे। स्कीम के तहत मिलने वाले मुख्य फायदों में पूर्व की तारीख से रेगुलर होना, छूट का दर्जा और ट्रस्ट की शुरुआत से लेकर तय कट-ऑफ तारीख तक ट्रस्ट की मान्यता शामिल है।

पात्र संस्थाओं को सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 के तहत कुछ जरूरी शर्तों जैसे कर्मचारियों की कम-से-कम संख्या और कॉर्पस (फंड) के आकार से जुड़े नियमों से भी छूट मिलेगी। तीन साल तक नियमों के पालन की शर्त को पूरा माना जाएगा। बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए लंबित मामलों को वापस ले लिया जाएगा और वे खत्म माने जाएंगे। बशर्ते कर्मचारी सदस्य के पीएफ खातों में कानूनी दरों के बराबर या उससे बेहतर दर पर ब्याज और योगदान मिला हो।

साफ है कि माफी योजना के तहत कर्मचारियों के बकाए पीएफ को लेकर किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी बल्कि इसका लाभ लेने के लिए उनके पीएफ के बकाए पुराने रकम को भी जमा कराना होगा।